अंबरनाथ में बीजेपी का बड़ा खेला, शिंदे सेना को सत्ता से किया दूर, कांग्रेस को भारी नुकसान

मुंबई: महाराष्ट्र म्युनिसिपल इलेक्शन में बीजेपी ने बड़ा खेला किया है। बीजेपी अंबरनाथ और अकोट नगर परिषद में सत्ता पाने में सफल हो गई। हालांकि, इसके लिए बीजेपी को काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इस पर बीजेपी ने एक नेता ने कहा कि , सत्ता लाना जरूरी है। इसे तो दो चार दिन में सब भूल जाएंगे। वैसे कांग्रेस के निर्णय कारण ही बीजेपी को सत्ता आसानी से मिली है, पर कांग्रेस अंबरनाथ में पूरी तरह से सफाया हो गई है। सवाल पूछे जा रहे हैं कि वहां के कांग्रेस प्रभारी ने समय रहते क्यों कदम नहीं उठाया ?
बीजेपी से जुड़े कांग्रेस के पार्षद
अंबरनाथ नगरपरिषद में कांग्रेस के 12 नगरसेवकों ने बीजेपी को समर्थन दे दिया। इससे नाराज होकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सभी 12 नगरसेवकों को पार्टी से निलंबित कर दिया। प्रदेश अध्यक्ष सपकाल के निलंबन का फायदा बीजेपी ने उठा लिया। तनिक भी देरी नहीं करते हुए सभी निलंबित को बीजेपी ने अपनी पार्टी में शामिल कर लिया। कांग्रेस के कारण बीजेपी अंबरनाथ नगर परिषद में कमल खिलाने में सफल हो गई। कांग्रेस अध्यक्ष के निर्णय पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस ने 12 नगरसेवकों को निलंबित कर सीधे-सीधे बीजेपी को फायदा पहुंचाया। उसे सत्ता की मंजिल तक पहुंचने का मार्ग आसान हो गया। दूसरी बात, अंबरनाथ में कांग्रेस पूरी तरह से साफ हो गई। अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सपकाल कहते है कि सत्ता के लिए बीजेपी किसी भी दल से गठजोड़ कर सकती है। सपकाल ने तंज कसते हुए कहा कि ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के नारे के पीछे भागते-भागते बीजेपी अब खुद ‘कांग्रेस युक्त’ हो गई है।
फैसले पर घिरे कांग्रेस चीफ सपकाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सपकाल के निर्णय पर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अध्यक्ष को राजनीति अनुभव होता, तो वह ऐसा निर्णय नहीं लेते। पहली बात की पार्टी से 12 नगरसेवकों को निलंबित करने की बजाय उन्हें कारण बताओं नोटिस जारी कर वक्त देते। इससे होता यह कि बीजेपी सत्ता तक नहीं पहुंच पाती और शिंदे सेना सत्ता में आने के लिए नए कदम उठाती। इससे शिंदे सेना और बीजेपी के बीच विवाद ही बढ़ता। लेकिन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने ऐसा निर्णय लिया जिससे सीधे-सीधे बीजेपी को फायदा हुआ।
एक पत्थर से दो शिकार किए
अंबरनाथ नगर परिषद में अपने ही सहयोगी दल शिंदे सेना को सत्ता में आने से रोकने के लिए बीजेपी अपने कट्टर विरोधी कांग्रेस से जा मिली। 60 सदस्यों वाली अंबरनाथ नगर परिषद में शिंदे सेना ने 27 सीटें जीती। उसे सत्ता पर तक पहुंचने के लिए महज चार सीटों की आवश्यकता थी, जबकि बीजेपी ने 14 सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस के 12 और एनसीपी की 4 सीटों के साथ-साथ दो निर्दलीय को मिलाकर बीजेपी सत्ता तक पहुंच गई और शिंदे सेना देखती रह गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सत्ता हासिल करने के लिए बीजेपी किसी भी हद तक जा सकती है। अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी ने ऐसा कर दिखा दिया है। अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी ने एक तरफ तो सत्ता हासिल कर ली, तो दूसरी तरफ अंबरनाथ से कांग्रेस को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब अंबरनाथ में शिंदे सेना और बीजेपी आमने-सामने होंगे।
कांग्रेस-AIMIM संग आघाड़ी
अंबरनाथ और अकोट नगर परिषद में सत्ता तक पहुंचने के लिए बीजेपी ने विकास परिषद का नया फार्मूला निकाला है। जिसके अंदर बीजेपी ने अपने घोर विरोधी कांग्रेस और ओवैसी की पार्टी को भी शामिल कर लिया। अंबरनाथ में बीजेपी ने कांग्रेस और अजित पवार की एनसीपी को मिलकर अंबरनाथ विकास आघाडी’ बना डाली। इसी तरह से अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में किया। वहां पर भी बीजेपी ने असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम के साथ अकोट विकास आघाडी बनाकर सत्ता हासिल की।




