ईरान ने दुनिया पर फोड़ा सबसे खतरनाक ‘ऑयल बम’, होर्मुज पर लगा दिया ताला, भारत पर क्या पड़ेगा असर?

तेहरान: 28 फरवरी 2026 को ईरान ने इजरायल और अमेरिका के हमलों के विरोध में ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लेते हुए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह बंद कर दिया है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस समुद्री मार्ग पर अपनी मिसाइलें और जंगी जहाज तैनात कर दिए हैं, जिससे खाड़ी देशों से होने वाला तेल और गैस का निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस घेराबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और $150 प्रति बैरल के पार तक पहुंच सकती हैं. जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी ‘ऑयल बम’ से कम नहीं होगा.
दुनिया की ऑयल सप्लाई की रीढ़ ठप्प
ईरान का यह कदम सीधे तौर पर अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती है, जिसने अब तीसरे विश्व युद्ध की संभावनाओं को बढ़ा दिया है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इतना संकरा है कि इसके सबसे कम चौड़ाई वाले हिस्से में जहाजों को गुजरने के लिए केवल 3 किलोमीटर का रास्ता मिलता है. ईरान ने इसी ‘कमजोरी’ को अपना हथियार बनाया है. खाड़ी के इस संकरे रास्ते से होकर दुनिया का करीब 25 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है, जिसके रुकने का सीधा मतलब है वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का महासंकट.
होर्मुज बंद होने से क्या होगा?
सैन्य टकराव का खतरा: अमेरिका ने हमेशा कहा है कि वह होर्मुज को खुला रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. ऐसे में अमेरिकी नौसेना और ईरान के बीच समुद्र में सीधा टकराव अब तय माना जा रहा है.
तेल की भारी कमी: भारत, चीन और जापान जैसे एशियाई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं. सप्लाई रुकने से पेट्रोल-डीजल की किल्लत हो सकती है.
महंगाई का विस्फोट: जब तेल महंगा होगा, तो माल ढुलाई से लेकर बिजली तक सब कुछ महंगा हो जाएगा, जिससे दुनिया भर में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगी.




