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खुदाई में मिली 300 साल पुरानी कब्रें, पत्थरों से दबाया था मुर्दों का सीना, गले पर हंसिया, देख कांप गए लोग!

दुनियाभर में प्राचीन सभ्यताओं और उनके रहन-सहन को लेकर समय-समय पर कई चौंकाने वाले खुलासे होते रहते हैं, लेकिन पोलैंड से सामने आई यह खोज इतिहास और अंधविश्वास के खतरनाक मेल को उजागर करती है. करीब 300 साल पुराने एक कब्रिस्तान में पुरातत्वविदों को ऐसी कब्रें मिली हैं, जिनका तरीका आज के नजरिए से बेहद असामान्य और डरावना लगता है. पोलैंड के पिन (Pien) गांव में चल रही खुदाई के दौरान वैज्ञानिकों ने 100 से ज्यादा कब्रें खोजी हैं. इस रिसर्च का नेतृत्व प्रोफेसर डेरियस पोलिंस्की कर रहे हैं, जो पिछले दो दशकों से इस क्षेत्र का अध्ययन कर रहे हैं. इन कब्रों में से कुछ ऐसी हैं, जिन्हें देखकर शोधकर्ताओं ने अंदाजा लगाया कि इन्हें जानबूझकर “एंटी-वैम्पायर” तरीके से तैयार किया गया था. जो भी इन कब्रों को देख रहा है, वो कांप जा रहा है.

कई शवों को औंधे मुंह यानी पेट के बल दफनाया गया था. ऐसा माना जाता है कि यह इस डर से किया जाता था कि अगर मृत व्यक्ति दोबारा जीवित होने की कोशिश करे, तो वह जमीन के अंदर की ओर ही बढ़े, बाहर न आ सके. कुछ कब्रों में लाशों के गले पर लोहे की तेज हंसिया रखी गई थी. उस समय लोगों का विश्वास था कि अगर शव उठने की कोशिश करेगा, तो उसका गला खुद ही कट जाएगा. इस कब्रिस्तान की सबसे चर्चित खोज एक महिला का कंकाल है, जिसे शोधकर्ताओं ने ‘वैम्पायर जोसिया’ नाम दिया है. इस कंकाल के गले पर हंसिया रखी हुई थी और पैर के अंगूठे में एक लोहे का ताला लगा हुआ था. माना जाता है कि यह ताला उसकी आत्मा को हमेशा के लिए “बंद” रखने का प्रतीक था. खुदाई में कुछ और असामान्य मामले भी सामने आए हैं, जो उस दौर की परंपराओं और कुरीतियों को उजागर करते हैं.

खुदाई में आर्कियोलॉजिस्ट की टीम को एक महिला का कंकाल भी मिला, जिसे सिफलिस जैसी गंभीर बीमारी थी. संभवतः बीमारी के कारण उसे समाज से अलग कर दिया गया था और मौत के बाद उसकी कब्र को भारी पत्थरों से घेर दिया गया. ऐसा लगता है मानो पत्थर से उसके सीने को दबा दिया गया है, जबकि एक अन्य कब्र में एक पुरुष की लाश के पैरों पर एक छोटे बच्चे का कंकाल लेटा हुआ मिला है. इतना ही नहीं, एक गर्भवती महिला का कंकाल भी मिला, जिसमें भ्रूण सुरक्षित अवस्था में था. यह खोज वैज्ञानिकों के लिए खास मायने रखती है, क्योंकि ऐसे मामले बेहद दुर्लभ होते हैं. कई बुजुर्गों के शवों के सिर के पास भी पत्थर रखे गए थे, जिन्हें “एंटी-वैम्पायर” अनुष्ठानों का हिस्सा माना जा रहा है.

इतिहासकारों के अनुसार, 17वीं सदी का यूरोप युद्ध, महामारी और अकाल से जूझ रहा था. उस समय लोग बीमारियों और अचानक होने वाली मौतों की वजह नहीं समझ पाते थे, इसलिए वे इन्हें अलौकिक शक्तियों या वैम्पायर जैसी मान्यताओं से जोड़ देते थे. जो लोग अलग दिखते थे, बीमार होते थे या जिनका व्यवहार सामान्य लोगों से हटकर होता था, उन्हें अक्सर ‘पिशाच’ मान लिया जाता था. आज के नजरिए से ये मान्यताएं अंधविश्वास लग सकती हैं, लेकिन उस दौर में यही लोगों के डर और असुरक्षा की अभिव्यक्ति थी. फिलहाल इस साइट पर खुदाई जारी है और वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में इस रहस्यमयी कब्रिस्तान से और भी अहम जानकारियां सामने आएंगी.

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