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गर्मी आते ही देश के कई हिस्सों में जलसंकट की आहट…

Highlightsकुल स्टोरेज घटकर 82.02 अरब घन मीटर रह गया है, जो कुल क्षमता का सिर्फ 44.71 प्रतिशत है.वर्ष 2001 में प्रतिव्यक्ति जल की उपलब्धता 1816 घन मीटर थी जो कि वर्ष 2011 में घटकर 1545 घन मीटर हो गई.सरकार द्वारा दिए जाने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य के कारण किसान इन फसलों की कृषि के लिए प्रेरित होते हैं.

पिछले कुछ वर्षों की तरह इस साल भी गर्मी आते ही देश के कई हिस्सों में जलसंकट की आहट मिलनी शुरू हो गई है. देश के 166 बड़े जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से गिर रहा है. केंद्रीय जल आयोग द्वारा 9 अप्रैल को दी गई जानकारी के अनुसार, इन जलाशयों में कुल स्टोरेज घटकर 82.02 अरब घन मीटर रह गया है, जो कुल क्षमता का सिर्फ 44.71 प्रतिशत है.

फरवरी के बाद से पानी तेजी से घट रहा है. दो महीने में ही इसमें 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे मई-जून में जल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है. देश में बढ़ते जलसंकट के तीन मुख्य कारण हैं, जिसमें से बढ़ती जनसंख्या एवं नगरीकरण एक प्रमुख कारण है. वर्ष 2001 में प्रतिव्यक्ति जल की उपलब्धता 1816 घन मीटर थी जो कि वर्ष 2011 में घटकर 1545 घन मीटर हो गई.

और वर्ष 2031 तक इसके घटकर 1367 घन मीटर होने की संभावना है. दूसरा प्रमुख कारण जल-गहन फसलों की कृषि है. देश की कुल कृषि योग्य भूमि के लगभग 54 प्रतिशत भाग पर जल-गहन फसलों जैसे- चावल, गेहूं, गन्ना, कपास इत्यादि की खेती की जाती है. सरकार द्वारा दिए जाने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य के कारण किसान इन फसलों की कृषि के लिए प्रेरित होते हैं.

तीसरा प्रमुख कारण जल का अकुशल प्रबंधन है. भारत प्रति व्यक्ति जल की खपत के मामले में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है. यहां प्रति व्यक्ति प्रतिदिन जल की खपत लगभग 250 लीटर है. इसका प्रमुख कारण जल की बर्बादी तथा औद्योगिक खपत है.

देश में जलसंकट के समाधान के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं लागू की गईं जिनमें अटल भू-जल योजना, नदी जोड़ो परियोजना, कैच-द-रेन अभियान इत्यादि प्रमुख हैं. किंतु सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के साथ ही जन-मानस का सहयोग भी अपेक्षित है.

इसके लिए जन-जागरूकता बढ़ाने के साथ ही ग्राम पंचायतों के अधिकारों को बढ़ाने की भी आवश्यकता है. भू-जल प्रबंधन, कुशल सिंचाई प्रबंधन एवं वर्षा जल संचयन जैसे उपायों को अपनाकर जलसंकट को कम किया जा सकता है.-rishabh-mishra/

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