उत्तरप्रदेश

गांव में रानी बेगम बनकर रह रही महिला निकली महमूदा, पर्स खुला तो उड़ गए सबके होश

Hapur News: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से सुरक्षा और सतर्कता को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां गढ़मुक्तेश्वर तहसील के दौताई गांव में एक विदेशी महिला पिछले कई सालों से अपनी पहचान बदलकर रह रही थी। जिस महिला को गांव के लोग रानी बेगम के नाम से जानते थे, असल में वह बांग्लादेश की नागरिक महमूदा खातून निकली।

SIR सत्यापन ने बिगाड़ा रानी का खेल
इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान होने वाले SIR (सत्यापन) में हुआ। जब वोटर लिस्ट की जांच की जा रही थी, तब एक महिला के दस्तावेजों पर अधिकारियों को शक हुआ। गहनता से जांच की गई तो पता चला कि महिला ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे न केवल भारतीय पहचान बनाई, बल्कि गांव की प्रधान अफसाना के नाम का फर्जी लेटर हेड इस्तेमाल कर कागजात भी तैयार करवाए। इस धोखाधड़ी को लेकर ग्राम प्रधान ने कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई है।

संदिग्ध पर्स ने खोले कई राज
शिकायत मिलने के बाद जब पुलिस आरोपी मसरूफ के घर पहुंची, तो वहां सन्नाटा पसरा था। तलाशी के दौरान पुलिस के हाथ एक संदिग्ध लेडीज पर्स लगा, जिसने पूरी कहानी बयां कर दी। पर्स के अंदर से महमूदा खातून और उसकी बेटी रोजा का बांग्लादेशी पासपोर्ट और वीजा मिला। बांग्लादेशी दस्तावेज और वहां की करेंसी (मुद्रा) बरामद हुई। एक निकाहनामा भी मिला, जो फर्जीवाड़े की कड़ियां जोड़ता है।

निजामुद्दीन में निकाह और बांग्लादेश में बेटी का जन्म
पुलिस को मिले निकाहनामे के अनुसार, दौताई गांव निवासी मसरूफ ने 11 फरवरी 2021 को दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन में महमूदा खातून से निकाह किया था। इस शादी के गवाह दिल्ली के बाटला हाउस के दो लोग बने थे। निकाह के बाद महमूदा का नाम बदलकर ‘रानी बेगम’ रख दिया गया और वह चुपचाप गांव में रहने लगी। हैरानी की बात यह है कि मसरूफ और महमूदा के तीन बच्चे हैं। उनकी बड़ी बेटी रोजा का जन्म 2023 में बांग्लादेश में हुआ था, जिसका बर्थ सर्टिफिकेट और पासपोर्ट भी पुलिस को घर से मिला है।

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