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दुनिया के एआई नक्शे पर चमका भारत…

उम्मीद करें कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 ने जिस तरह सफलता का परचम लहराया है, उससे भारत में डेटा सेंटर, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, कंप्यूटिंग क्षमता और पावर सिस्टम में तेजी से निवेश बढ़ेंगे। उम्मीद करें कि अब भारत ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर समावेशी और मानव केंद्रित एआई का नेतृत्व करेगा…

हाल ही में नई दिल्ली के भारत मंडपम में 16 फरवरी से 21 फरवरी तक आयोजित इंडिया ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इम्पैक्ट समिट-2026 से भारत की मुठ्ठियों में जो तकनीकी और रणनीतिक मोर्चों पर बड़ी उपलब्धियां आई हैं, उनसे दुनिया के एआई नक्शे पर भारत चमकते हुए दिखाई दे रहा है। यह समिट दो महत्वपूर्ण उद्देश्यों में सफल रहा है। एक, भारत को दुनिया में एआई के क्षेत्र में अग्रणी देश के रूप में स्थापित करना और दो, एआई को एक ऐसे भविष्य की ओर आगे बढ़ाना, जहां एआई मानवता व समावेशी विकास को बढ़ावा दे और हमारी साझा धरती की रक्षा करे। गौरतलब है कि समिट के समापन पर व्यापक आम सहमति के दिल्ली घोषणा पत्र में मानव केंद्रित एआई की वकालत की गई है। ग्लोबल साउथ में आयोजित दुनिया के पहले सबसे बड़े इस ऐतिहासिक एआई इम्पैक्ट समिट में दुनिया के 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष सहित 118 देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल, सभी प्रमुख डिजिटल कंपनियों के सीईओ और करीब 35 हजार से अधिक एआई एक्सपट्र्स 550 से अधिक सत्रों में शामिल हुए। साथ ही इस समिट में 5 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। खास बात यह भी है कि इस समिट के तहत भारत ने एआई के जिम्मेदार उपयोग को लेकर गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड बना दिया है। इंडिया एआई मिशन के एआई रिस्पॉन्सिबिलिटी कैंपेन में सिर्फ 24 घंटे के अंदर ढाई लाख से ज्यादा लोगों ने शपथ ली।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 फरवरी को औपचारिक रूप से एआई इम्पैक्ट समिट का उद्घाटन करते हुए कहा कि अब प्रौद्योगिकी को सर्वसुलभ बनाया जाना चाहिए, जिससे यह खास तौर पर ग्लोबल साउथ में समावेश और सशक्तीकरण का माध्यम बन सके। उन्होंने भारत की विविधता और जनसांख्यिकी पर जोर देते हुए कहा कि भारत में सफल होने वाला कोई भी एआई मॉडल दुनिया भर में इस्तेमाल किया जा सकेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के लिए ‘मानव’ (एमएएनएवी) दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। ऐसा मानवीय दृष्टिकोण पूरी दुनिया की जवाबदेही है। मोदी ने कहा कि आज दुनिया में दो तरह के लोग हैं- एक वे जो एआई में डर देखते हैं और दूसरे वे जो एआई में समृद्धि देखते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं गर्व और जिम्मेदारी के साथ कहता हूं कि हमें इसमें डर नहीं दिखता। भारत एआई में समृद्धि देखता है, भारत एआई में भविष्य देखता है। इस मौके पर टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि एआई आने वाले समय की सबसे बड़ी बुनियादी व्यवस्था बनने जा रही है। जैसे पहले स्टीम इंजन, बिजली और इंटरनेट ने दुनिया को बदला, उसी तरह एआई भी अर्थव्यवस्था और समाज पर गहरा असर डालेगा। एआई इंटेलिजेंस का इन्फ्रास्ट्रक्चर भविष्य की दिशा तय करेगा। इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में दुनिया ने भारत का लोहा माना है। चाहे फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों हों या अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई, चाहे गूगल डीप माइंड के सह संस्थापक डेमिस हसाबिस हों या फिर ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक हों, इस समिट में दुनिया भर के सभी दिग्गज नेताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने भारत के एआई क्षेत्र में बढ़ते कदमों की तारीफ की है। यह बार-बार कहा गया कि एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में जो कुछ हुआ, उसने साफ कर दिया कि यह केवल एक ग्लोबल इवेंट नहीं, बल्कि भारत की टेक्नोलॉजी सॉवरेनिटी का वैश्विक शंखनाद है, जिसकी गूंज दुनिया के कोने-कोने में सुनाई दी है। निश्चित रूप से इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट दुनिया के साथ-साथ भारत के लिए उपलब्धियों से परिपूर्ण रहा है।

दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों और भारत के बड़े इंडस्ट्री ग्रुप्स ने 250 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की घोषणाएं कर यह संकेत दे दिया है कि आने वाला दशक भारत के लिए एआई बुनियादी ढांचे की ऊंचाई का दशक हो सकता है। समिट के दौरान हुए समझौतों ने यह दिखाया कि भारत सिर्फ एआई तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उसका बड़ा उत्पादक और निर्यातक बनने की तैयारी में है। देश के सबसे बड़े उद्योग समूहों में से एक रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी टेलीकॉम इकाई जियो ने एआई और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश किया है। ग्रुप के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने घोषणा की कि अगले सात वर्षों में करीब 109.8 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा। अडानी समूह ने भी एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 100 अरब डॉलर निवेश की योजना पेश की है। यह निवेश 2035 तक नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित एआई डेटा सेंटर स्थापित करने पर केंद्रित होगा। वैश्विक टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने घोषणा की है कि वह इस दशक के अंत तक ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों में एआई विस्तार के लिए 50 अरब डॉलर तक निवेश करेगा। कंपनी पिछले वर्ष भारत में 17.5 अरब डॉलर के एआई निवेश का ऐलान कर चुकी है। भारतीय डेटा सेंटर कंपनी योट्टा डेटा सर्विसेज ने एशिया के सबसे बड़े एआई कंप्यूटिंग हब में दो अरब डॉलर लागत वाले एक प्रोजेक्ट को विकसित करने का ऐलान किया है। इसी क्रम में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने चैटजीपीटी की मूल कंपनी ओपनएआई को अपने डेटा सेंटर डिविजन का पहला ग्राहक बनाया है। यह साझेदारी वैश्विक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पहल ‘स्टारगेट’ के तहत हुई है, जो भारत को एआई सेवा निर्यात के नए अवसर दे सकती है। यह भी महत्वपूर्ण है कि एआई इम्पैक्ट समिट के मौके पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारत पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन का 12वां हस्ताक्षरकर्ता बन गया, जिसमें अमेरिका के अलावा जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, इजरायल और नीदरलैंड भी शामिल हैं। पैक्स सिलिका को बीते 12 दिसंबर को वाशिंटन में दुर्लभ खनिजों और एआई के लिए सुरक्षित, लचीली और नवाचार आधारित आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए लॉन्च किया गया था। नि:संदेह इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट की सफलता के बाद अब भारत एआई के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ेगा। वस्ततु: भारत में हेल्थकेयर, शिक्षा, कृषि, गवर्नेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर्स में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट ने भारत के लिए एआई के तहत उद्योग-कारोबार व अर्थव्यवस्था की रफ्तार के साथ एआई आधारित रोजगार के नए मौके मुठ्ठी में लेने का नया दौर सामने दिखाई दे रहा है। चूंकि भारत का श्रम बाजार ढांचागत बदलाव से गुजर रहा है।

नीति आयोग की रिपोर्टों के तहत भी बड़ी संख्या में पारंपारिक नौकरियां खत्म होने और एआई से जुड़ी नई नौकरियां निर्मित होने की बात कही गई है। ऐसे में देश की नई पीढ़ी को एआई आधारित नौकरियों के बढ़ते अवसरों के बीच एआई पेशेवर के रूप में सुसज्जित किया जाना होगा। नई पीढ़ी को स्कूली शिक्षा के साथ प्रारंभिक स्तर से ही एआई से जोड़े जाने की रणनीति के साथ आगे बढऩा होगा। उम्मीद करें कि 16 से 21 फरवरी तक आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 ने जिस तरह सफलता का परचम लहराया है, उससे भारत में डेटा सेंटर, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, कंप्यूटिंग क्षमता और पावर सिस्टम में तेजी से निवेश बढ़ेंगे। उम्मीद करें कि अब भारत ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर समावेशी और मानव केंद्रित एआई का नेतृत्व करेगा। उम्मीद करें कि भारत में सॉवरेन एआई का उपयोग शहरों की सीमाओं से दूर छोटे-छोटे गांवों तक कृषि और स्वास्थ्य सेवाओं में भी तेजी से बढ़ेगा। इन सबसे जीवन में आसानी होगी, नए रोजगार और विकास की रफ्तार बढ़ेगी। साथ ही यह समिट भारत को विकसित भारत बनाने की राह पर तेजी से आगे बढ़ाएगा। भारत का भविष्य उज्ज्वल है।-डा. जयंती लाल भंडारी

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