धर्म के कारण छोड़ना पड़ा देश, आज हैं सबसे अमीर यहूदी

नई दिल्ली: गूगल के को-फाउंडर सर्गेई ब्रिन दुनिया के तीसरे सबसे बड़े रईस हैं। उन्होंने 1998 में लैरी पेज के साथ मिलकर इस कंपनी की स्थापना की थी और आज यह 3.498 ट्रिलियन डॉलर के साथ मार्केट कैप के हिसाब से दुनिया की तीसरी बड़ी कंपनी है। सर्गेई ब्रिन का जन्म सोवियत संघ में हुआ था लेकिन वहां बढ़ रही यहूदी विरोधी भावनाओं के चलते 1979 में उनका परिवार अमेरिका आ गया। आज वह दुनिया के सबसे अमीर यहूदी हैं। दुनिया के अमीर यहूदियों की लिस्ट में लैरी एलिसन, मार्क जकरबर्ग, स्टीव बाल्मर, माइकल डेल और माइकल ब्लूमबर्ग शामिल हैं। लैरी पेज की मां भी यहूदी थीं लेकिन उनके पिता प्रोटेस्टेंट थे। एक नजर सर्गेई ब्रिन के करियर पर।
ब्रिन सोवियत संघ में जन्मे अमेरिका के कंप्यूटर साइंटिस्ट और अरबपति उद्यमी हैं। उन्होंने लैरी पेज के साथ मिलकर इंटरनेट सर्च इंजन गूगल की नींव रखी थी जिसने दुनिया भर में इंटरनेट की दुनिया में क्रांति ला दी। उनका जन्म साल 1973 में मॉस्को में हुआ था लेकिन सोवियत संघ में यहूदी विरोधी भावनाओं से बचने के लिए उनका परिवार 1979 में अमेरिका आ गया। उनके पिता मैथमेटिशियन थे और इसी से ब्रिन को भी प्रेरणा मिली। उन्होंने 19 साल की उम्र में यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड से कंप्यूटर साइंस और मैथमेटिक्स में ग्रेएजुएशन किया।
कैसे हुई शुरुआत?
स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी में पीएचडी के दौरान उनकी मुलाकात साल 1995 में लैरी पेज से हुई। शुरुआत में कई मुद्दों पर दोनों में गहरे मतभेद थे लेकिन दोनों ने मिलकर वेब सर्च इंजन बैकरब बनाया। यह लिंक एनालिसिस को यूज करके पेज की अहमियत बताता था। आखिरकार साल 1998 में दोनों ने गूगल.कॉम को रजिस्टर्ड कराया और कैलिफोर्निया के मेलनो पार्क में सुसान वोज्स्की के गैराज में इसका दफ्तर खोला। जल्दी ही दुनिया का ध्यान इसकी तरफ गया और कंपनी को फंडिंग मिलने लगी।
आखिरकार साल 2004 में कंपनी का आईपीओ आया और फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह कई साल तक कंपनी में टेक्नोलॉजी के प्रमुख रहे। इस दौरान उन्होंने कंपनी में इनोवेशन की संस्कृति विकसित की और गूगल ग्लास तथा सेल्फ ड्राइविंग कार जैसे प्रोजेक्ट को संभाला। साल 2015 में ब्रिन गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट इंक के प्रेजिडेंट बने। हाल में वह एआई रिसर्च (जेमिनी) में एक्टिव रोल में लौटे हैं।




