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नेम-फेम सब मिला फिर भी धर्मेंद्र को ताउम्र रहा पछतावा, जानें कौन सी थी वो बात…

डेस्क : बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र सोमवार (24 नवंबर) को दुनिया को अलविदा कह गए। अपने 89 साल के सफर में धर्मेंद्र ने वो हर मुकाम हासिल किया, जो किसी भी कलाकार का सपना होता है। पर्दे पर सुपरहिट करियर, राजनीति में सेवा, खेती-किसानी में सफलता धर्मेंद्र ने जीवन में नाम, शोहरत और सम्मान सब कुछ पाया। लेकिन इसके बावजूद ‘हीमैन’ के दिल में एक पछतावा ऐसा था, जिसे वह जीवन भर नहीं भूल पाए।

संघर्ष के दिनों में मनोज कुमार ने थामा था हाथ

धर्मेंद्र और मनोज कुमार दोनों ने अपने करियर की शुरुआत संघर्ष से की थी। उन दिनों न काम था और न ही पैसा। स्क्रिप्ट राइटिंग के जरिए मनोज कुमार थोड़ी कमाई कर लेते थे और उसी से दोनों का खर्च चलता था। धर्मेंद्र ने कई बार कहा कि उन कठिन दिनों में मनोज कुमार ने उन्हें सहारा दिया। आर्थिक तौर पर भी और भावनात्मक रूप से भी। एक बार तो जब धर्मेंद्र मायानगरी छोड़कर घर लौटने वाले थे, तब मनोज कुमार ने उन्हें ट्रेन से उतरवाकर फिर से हिम्मत दी। धर्मेंद्र इसी बात को याद कर हमेशा भावुक हो जाते थे।

ताउम्र रहा एक ही पछतावा

जब 4 अप्रैल 2025 को अभिनेता-निर्देशक मनोज कुमार का निधन हुआ, तो धर्मेंद्र दो दिन बाद भारी दिल और नम आंखों के साथ उनके घर पहुंचे थे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने अपने दर्द का इज़हार करते हुए कहा था कि “मनोज भाई ने मेरे लिए जो किया, उसका कर्ज़ मैं कभी नहीं उतार पाया। मुझे ताउम्र इस बात का पछतावा रहेगा कि मैं उनकी निर्देशित एक भी फिल्म में काम नहीं कर पाया।” यह दर्द धर्मेंद्र अपने दिल में हमेशा लिए घूमते रहे। दोस्ती का ऋण जो वह पूरी तरह चुकाना चाहते थे, लेकिन मौका कभी नहीं मिला।

1960 में मिला पहला ब्रेक

मनोज कुमार की मदद के कुछ समय बाद धर्मेंद्र को 1960 में अपनी पहली फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ मिली। फिल्म हिट हुई और धर्मेंद्र का करियर उड़ान भर गया। लेकिन उतनी बड़ी सफलता के बाद भी उन्होंने संघर्ष के उस दौर को कभी नहीं भुलाया और न ही मनोज कुमार का वह साथ, जिसने उन्हें टूटने नहीं दिया।

किसानी से लेकर राजनीति और फिल्मों तक धर्मेंद्र ने हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें, उनका संघर्ष और उनकी इंसानियत हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी।

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