छत्तीसगढ़

मजदूरों के शोषण मामले में विभागीय टीम ने दी दबिश, ठेकेदार बच्चों से करा रहा था बालश्रम

धरसींवा। आदिवासी श्रमिकों के शोषण की खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग तथा बाल संरक्षण इकाई की संयुक्त टीम ने धरसींवा क्षेत्र स्थित श्रमिक कालोनी और फैक्ट्री में छापेमारी की.

इस कार्रवाई में तहसीलदार धरसींवा बाबूलाल कुर्रे और महिला पुलिस अधिकारी नंदिनी ठाकुर भी मौजूद रहीं. जांच के दौरान टीम को फैक्ट्री के अंदर कुछ बाल श्रमिक काम करते हुए मिले, जिन्हें तत्काल वहां से हटाया गया.

पूछताछ में श्रमिकों ने बताया कि लेबर ठेकेदार तिवारी उन्हें फैक्ट्री में रोजाना 12-12 घंटे काम कराता है. इसके बदले महिलाओं को ₹370 और पुरुषों को ₹450 मजदूरी दी जाती है. जबकि नियमों के अनुसार, 8 घंटे की मजदूरी ₹430 तय है और 4 घंटे ओवरटाइम पर डबल भुगतान, यानी कुल ₹860 दिया जाना चाहिए.

श्रम निरीक्षक ने बताया कि ठेकेदार द्वारा श्रम कानूनों का उल्लंघन किया जा रहा है. वहीं, महिला एवं बाल विकास अधिकारी संजय निराला ने कहा कि निरीक्षण के दौरान बाल श्रमिक पाए गए और मजदूरों से निर्धारित समय से अधिक कार्य कराया जा रहा है. साथ ही उन्हें ESIC जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ भी नहीं मिल रहे हैं. उन्होंने बताया कि मामले की पूरी जांच की जा रही है और दोषी ठेकेदारों पर विधि अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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