अंतर्राष्ट्रीय

मिसाइलें, ड्रोन, लड़ाकू विमान, एयरक्राफ्ट कैरियर, अमेरिका ने ईरान के नजदीक क्या-क्या भेज दिया?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है. जनवरी के आखिर में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि बहुत बड़े और ताकतवर युद्धपोत ईरान की ओर बढ़ रहे हैं और अमेरिका उम्मीद करता है कि इन्हें इस्तेमाल न करना पड़े. इसके बाद से ही अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी काफी बढ़ा दी है.

ईरान ने अमेरिका की इस सैन्य तैनाती पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह ताकत की भाषा नहीं समझता. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका क्षेत्र में अपने जहाज और विमान तैनात कर रहा है, लेकिन इससे ईरान डरने वाला नहीं है. उन्होंने साफ कहा कि अमेरिकी सेना की मौजूदगी ईरान को भयभीत नहीं करती.

अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर 

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी के अंत में अमेरिका ने अपना एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln और तीन मिसाइल से लैस युद्धपोत अरब सागर में तैनात किए. इसके साथ करीब 5,700 अतिरिक्त सैनिक भी इस क्षेत्र में भेजे गए. अमेरिका ने सोशल मीडिया पर इन जहाजों की तस्वीरें जारी करते हुए शक्ति के जरिए शांति का संदेश दिया. इनके अलावा, अमेरिका के कई और युद्धपोत फारस की खाड़ी, होरमुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के आसपास तैनात हैं. जरूरत पड़ने पर समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए खास जहाज भी तैयार रखे गए हैं.

अमेरिका और ब्रिटेन की तैयारी

हवाई ताकत की बात करें तो अमेरिका ने F-15 लड़ाकू विमान, MQ-9 ड्रोन और A-10 हमलावर विमान भी मध्य पूर्व में भेजे हैं. ब्रिटेन ने भी कतर में अपने टाइफून फाइटर जेट तैनात किए हैं. इसके साथ ही अमेरिका ने थाड (THAAD) और पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली भी क्षेत्र में मजबूत की है. तनाव के बीच अमेरिका ने होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों के लिए चेतावनी जारी की है. अमेरिकी जहाजों को ईरानी सीमा से दूर रहने और किसी भी जांच से इनकार करने की सलाह दी गई है.

राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान से मांग

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान से यूरेनियम प्रोगाम को रोकने, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम बंद करने और क्षेत्रीय संगठनों को समर्थन न देने की मांग की है. हालांकि ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है. कुल मिलाकर, हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान टकराव पर टिकी हुई है.

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