रूस से सस्ता तेल खरीदता रहेगा भारत, ट्रंप प्रशासन का बड़ा यूटर्न

US On Russian Oil: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने शुक्रवार को एक छूट जारी की, जिसके तहत भारत और अन्य देशों को लगभग एक महीने तक समुद्र में ही रूस के प्रतिबंधित तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने की अनुमति दी गई है. इस कदम का उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करना है, जो ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल युद्ध के दौरान काफी बढ़ गई थीं.
Russian Crude Oil: रूसी तेल पर भारत को सुबह-सुबह खुशखबरी मिली है. पश्चिम एशिया संघर्ष और ईंधन संकट के बीच अमेरिका ने बड़ा यूटर्न लिया है. अमेरिका ने रूसी तेल पर वह ऐलान किया है, जिसका भारत को बंपर फायदा मिलेगा. अमेरिका ने अब उस तेल वाले छूट को रिन्यू करने का फैसला किया है, जिससे भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिलती है. जी हां, अमेरिका ने घोषणा की है कि वह उन देशों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने वाली प्रतिबंधों में छूट को आगे बढ़ाएगा, जिसका मकसद ईरान युद्ध के कारण आपूर्ति में आई कमी को दूर करना था. बता दें कि बीते दिनों ही अमेरिका के वित्त मंत्री ने कहा था कि अमेरिका अब रूसी तेल वाली छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की अनुमति देने वाली प्रतिबंधों से छूट को बढ़ा दिया है. यह छूट एक महीने के लिए बढ़ाई गई है. यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण बने दबाव को कम किया जा सके. पहले अमेरिका ने रूसी तेल पर मिली छूट को बढ़ाने से इनकार कर दिया था. अमेरिका का यह फैसला केवल उन रूसी तेल को लेकर है, जो समंदर में जहाज पर मौजूद हैं.
अमेरिकी वित्त विभाग का नया फैसला
अमेरिकी वित्त विभाग ने शुक्रवार देर रात एक नया लाइसेंस वाला आदेश जारी किया. इसमें देशों को 17 अप्रैल से 16 मई के बीच जहाजों पर लदे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी गई है. यह कदम पहले जारी 30 दिन की छूट की जगह लेता है, जो 11 अप्रैल को समाप्त हो गई थी. अमेरिका के इस फैसले से भारत को अब फायदा ही फायदा है.
अमेरिका के लिए यह यूटर्न क्यों
अमेरिका का फैसला उस फैसले से उलट है, जो इसी हफ्ते की शुरुआत में वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने लिया था. अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट ने बीते दिनों कहा था कि अमेरिका रूसी तेल वाली इस राहत को आगे बढ़ाएगा. ट्रंप प्रशासन का रूसी तेल वाला यह छूट अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण प्रभावित ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के प्रयासों का हिस्सा है. हालांकि, अमेरिका का यह फैसला केवल रूसी तेल को लेकर है. ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया के तेल इस लाइसेंस वाले आदेश से बाहर हैं.
रूसी तेल पर अभी और छूट मिलेगी?
ब्रेट एरिक्सन ने कहा, ‘ईरान-अमेरिका संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थायी नुकसान पहुंचाया है और उन्हें स्थिर करने के लिए उपलब्ध उपाय लगभग खत्म हो चुके हैं.’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि आगे और छूट दी जा सकती है. वहीं, बेसेंट ने बताया कि इससे पहले मार्च में जारी एक अलग छूट के तहत लगभग 14 करोड़ बैरल ईरानी तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचा था, जिससे संघर्ष के दौरान आपूर्ति पर बने दबाव को कम करने में मदद मिली थी.
भारत को कितना फायदा?
यहां ध्यान देने वाली बात है कि भारत भी प्रतिबंधों में छूट का एक बड़ा लाभार्थी है. यूं कहिए तो बड़ा लाभार्थी. अमेरिकी छूट मिलने के बाद भारत ने बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदे थे. ट्रंप प्रशासन के इस छूट वाले फैसले की अमेरिकी नेताओं ने आलोचना की थी कि इससे मास्को और तेहरान पर वित्तीय दबाव कम हो रहा है. सरकारी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने रूसी तेल पर अमेरिकी छूट लागू होने के बाद रूस से करीब 3 करोड़ बैरल तेल का ऑर्डर दिया था. अब नए फैसले का मतलब है कि भारत अभी आगे भी रूस से सस्ता तेल खरीदता रहेगा.




