हिंद महासागर तक पहुंची पश्चिम एशिया महासंग्राम की आंच, कतर पर मिसाइल अटैक; खामेनेई का शोक कार्यक्रम टला

नई दिल्ली। ईरान बनाम अमेरिका-इजरायल युद्ध गुरुवार को छठे दिन में प्रवेश कर गया। इस बीच संघर्ष का दायरा पश्चिम एशिया से बाहर फैलता दिखाई देने लगा है। अमेरिकी नौसेना ने हिंद महासागर में भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत आइआरआइएस डेना को निशाना बनाया, जबकि ईरान के दो ड्रोन अजरबैजान के क्षेत्र में जा गिरे।
ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल के एक हमले विफल
नाटो ने भी दावा किया है कि तुर्की में ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल के एक हमले को विफल कर दिया गया। इन घटनाओं के बाद यह संघर्ष क्षेत्रीय सीमाओं से आगे बढ़ता नजर आ रहा है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि उसके युद्धपोत पर हमले के बाद दुनिया में कहीं भी अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। इससे आने वाले दिनों में हालात और गंभीर होने की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिका और इजरायल के हवाई हमले ईरान पर लगातार जारी हैं, जबकि ईरान भी इजरायल के साथ-साथ पश्चिम एशिया के कई देशों में लक्ष्यों पर हमले कर रहा है। लेबनान में भी इजरायल ने तीव्र हवाई हमले किए, जिसके जवाब में हिजबुल्ला ने ड्रोन और मिसाइल से इजरायल को निशाना बनाया।
मोजतबा खामेनेई ईरान के के नए सुप्रीम लीडर
दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने पर सहमति बनने की खबर है।
न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, बुधवार को श्रीलंका की समुद्री सीमा से बाहर अमेरिकी पनडुब्बी के हमले का शिकार हुआ ईरानी युद्धपोत आइआरआइएस डेना 16 से 25 फरवरी 2026 तक विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में शामिल होकर ईरान लौट रहा था। इस युद्धपोत पर लगभग 180 नौसैनिक सवार थे, जिनमें से 32 को श्रीलंकाई नौसेना ने बचा लिया।
श्रीलंकाई नौसेना का कहना है कि 87 शव बरामद
करीब 100 नाविकों के मारे जाने की आशंका जताई गई है, जबकि श्रीलंकाई नौसेना का कहना है कि 87 शव बरामद कर लिए गए हैं। इस घटना के बाद एक अन्य ईरानी युद्धपोत ने श्रीलंका की समुद्री सीमा में प्रवेश की अनुमति मांगी है। यह पोत फिलहाल श्रीलंका की सीमा से लगभग 200 नाटिकल मील दूर है।
श्रीलंका की समुद्री सीमा उसके तट से 12 नॉटिकल मील तक मानी जाती है, जिसके बाद विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) शुरू होता है, जहां अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून लागू होते हैं।
ईरान का कहना है कि उसका जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में था और उस पर बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया। तेहरान ने इसे खतरनाक मिसाल बताते हुए कहा है कि अमेरिका को इसका पछतावा होगा और दुनिया भर में अमेरिकी युद्धपोत अब उसके निशाने पर हैं।
वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि हिंद महासागर में अमेरिका ने एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जिसे लगा कि वह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित है। उसे टारपीडो से डुबो दिया गया।
प्रेट्र के अनुसार, भारत ने स्पष्ट किया है कि हिंद महासागर में डुबोया गया ईरानी युद्धपोत उस समय भारत का “मेहमान” नहीं था। हालांकि ईरान का दावा है कि आइआरआइएस डेना भारतीय नौसेना के निमंत्रण पर आया था, लेकिन सरकारी सूत्रों के अनुसार 28 फरवरी को युद्ध की घोषणा के बाद जहाज ने भारत से किसी तरह की मदद नहीं मांगी थी।
इस बीच श्रीलंका के राष्ट्रपति और रक्षा मंत्री अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा कि क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक कूटनीतिक हस्तक्षेप पर विचार किया जा रहा है।
अजरबैजान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
एएनआइ के अनुसार, अजरबैजान ने दावा किया है कि ईरान के दो ड्रोन उसकी सीमा में स्थित नखचिवन क्षेत्र में गिरने से चार लोग घायल हो गए। इसके अलावा चार ड्रोन सीमा के ऊपर उड़ान भरते देखे गए। अजरबैजान के रक्षा मंत्रालय ने दक्षिणी क्षेत्र के हवाई क्षेत्र को 12 घंटे के लिए बंद कर दिया और कहा कि यदि इस तरह की घटनाएं दोहराई गईं तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
मंत्रालय के अनुसार एक ड्रोन नखचिवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की टर्मिनल इमारत पर गिरा, जो ईरान की सीमा से लगभग 10 किलोमीटर अंदर स्थित है। दूसरा ड्रोन एक गांव के स्कूल भवन पर गिरा। फिलहाल यह जांच की जा रही है कि इन हमलों में किस प्रकार के ड्रोन का इस्तेमाल हुआ।
अजरबैजान ने कहा कि देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हालांकि ईरान ने इन आरोपों से इनकार किया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम ग़रीबाबादी ने कहा कि तेहरान ने नखचिवन को निशाना नहीं बनाया।
खामेनेई का शोक कार्यक्रम टाला गया
एपी के अनुसार, अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों में मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान के एक प्रार्थना सभागार में तीन दिनों के सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा जाना था, लेकिन समारोह को अचानक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
अधिकारियों ने इसके पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया, हालांकि सूत्रों का कहना है कि अमेरिकी और इजरायली विमानों की मौजूदगी के बीच संभावित हमले की आशंका के कारण यह निर्णय लिया गया।
इसी बीच सत्ता हस्तांतरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता बनाए जाने की संभावना सबसे मजबूत मानी जा रही है। माना जा रहा है कि अंतिम संस्कार के बाद नए नेता की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। यह भी बताया गया कि जिस समय खामेनेई पर हमला हुआ, उस समय मोजतबा देश में मौजूद नहीं थे।
तेहरान में धमाके, सरकारी टीवी चैनल है
रॉयटर के अनुसार, तेहरान में गुरुवार को कई इलाकों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय निवासियों के अनुसार इजरायली लड़ाकू विमानों ने उत्तरी तेहरान और कई सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए अब तक के सबसे बड़े हवाई हमले किए। इजरायल का दावा है कि उसने ईरान के भूमिगत मिसाइल ठिकानों और सैन्य बंकरों को निशाना बनाया। इन हमलों में अब तक लगभग 1,230 लोगों के मारे जाने की खबर है।
बताया गया कि ईरान के सरकारी टेलीविजन को भी हैक कर लिया गया, जहां कुछ समय के लिए ईरान के अंतिम शाह के निर्वासित बेटे रेजा पहलवी का संबोधन प्रसारित होने लगा। अमेरिका का दावा है कि ईरान पर 2,000 से अधिक हमलों के बाद उसकी सैन्य क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
ईरान के 20 से अधिक सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी
इजरायल ने कहा कि उसने ईरान के 20 से अधिक सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी की है। इजरायल ने रिवोल्यूशनरी गार्ड के सहयोगी स्वयंसेवक बल बासिज से जुड़ी इमारतों पर हमले किए। इस बल पर सरकार विरोधी आंदोलनों के दौरान दमनचक्र चलाने का आरोप है। इसमें हजारों लोग मारे गए थे।
इजरायली वायुसेना के अनुसार इश्फहान और क़ुम क्षेत्र में बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया। इश्फहान में एंटी-एयरक्राफ्ट प्रणाली को नुकसान पहुंचा और एक सैन्य विमान नष्ट कर दिया गया। रिपोर्टों के मुताबिक यहां ईरान की उन्नत ‘ग़दर’ क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों से जुड़े ठिकानों पर भी हमले किए गए।
‘आपरेशन ट्रू प्रामिस-4’ की 19वीं लहर
एएनआइ के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कार्प्स (आइआरजीसी) ने बताया कि इजरायल और पश्चिम एशिया के अन्य लक्ष्यों के खिलाफ ‘आपरेशन ट्रू प्रामिस-4’ के तहत हमलों की 19वीं लहर शुरू की गई है। इस दौरान मिसाइलों और ड्रोन से कई हमले किए गए।
ईरानी हमलों के कारण इजरायल के कई शहरों में हवाई हमले के सायरन बजते रहे और लाखों लोगों को बंकरों में शरण लेनी पड़ी। आईआरजीसी ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल के सात उन्नत रडार सिस्टम नष्ट कर दिए गए, जिससे कम से कम दो देशों की निगरानी प्रणाली प्रभावित हुई है।
ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने थाड मिसाइल रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय कर दिया, जिसके बाद तेल अवीव और बेन गुरियन हवाई अड्डे सहित कई क्षेत्रों में मिसाइलें गिरीं। सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से किए गए हमलों में तेल अवीव और यरूशलम के साथ-साथ कुवैत, बहरीन और कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
आइआरजीसी ने अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन (सीवीएन-72) और हिंद महासागर में तैनात एक अमेरिकी विध्वंसक पोत को भी निशाना बनाने का दावा किया है। इसके अलावा बहरीन में स्थित अमेजन के सबसे बड़े अमेरिकी डाटा सेंटर पर भी हमले की खबर है, जिसे ईरानी मीडिया के अनुसार गंभीर नुकसान पहुंचा है।




