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8 महीने बाद समाधि से निकली सही-सलामत लाश, चमत्कार बताकर जुटी हजारों की भीड़, स्वामी का मंदिर बनना शुरू

बेंगलुरु : कर्नाटक के विजयपुरा में एक स्वामीजी का शव आठ महीने बाद उनकी समाधि से खोदकर निकाला गया। सब लोग यह देखकर हैरान रह गए कि शव जस का तस था। बिना सड़ा-गला शव निकलने की खबर फैली तो भक्तों का तांता लग गया। उनके पार्थिव शरूर को एक जुलूस के साथ बाहर निकाला गया और बाद में उसका दोबारा अंतिम संस्कार किया गया। भक्तों ने इस घटना को चमत्कारिक बताया और पूरे इलाके में इस बात को चर्चा हो रही है।

हाल ही में विजयपुरा जिले के मनागुली कस्बे में एक अजीब और हैरान करने वाली घटना हुई। हलुमता गुरुपीठ के मल्लैया सरूर मुत्या, लंबे समय से बीमार थे। उनका 31 दिसंबर 2025 को निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार 1 जनवरी, 2026 को कस्बे में चौकी मठ के पास किया गया था।

भक्त के शरीर में आकर पार्थिव शरीर निकालने को कहा

बताया जाता है कि मल्लैया सरूर मुत्या ने एक भक्त के शरीर में आए। उन्होंने एक दैवीय आवाज के जरिए निर्देश दिया। निर्देश में उन्होंने कहा कि मेरा शरीर अभी भी समाधि में है। इसे बाहर निकालें और श्रावण महीने के दौरान बिरलिंगेश्वर मंदिर के ‘गड्डुगे’ (समाधि स्थल) के पास इसका दोबारा अंतिम संस्कार करें।

लोगों ने माना दैवीय आदेश

गांव वालों ने ऐसा ही किया। उनका पार्थिव शरीर खोदकर समाधि से निकाला गया। जुलूस निकाल और उनका दोबारा अंतिम संस्कार किया। बताया जाता है कि जब भक्तों ने दैवीय आदेश के बाद कब्र खोदी, तो उन्होंने पाया कि शरीर सड़ा-गला नहीं था और आठ महीने बाद भी वैसा ही था, जैसे कि अभी-अभी उनका निधन हुआ हो। अब जहां पर उनके पार्थिव शरीर को दफनाया गया है, वहां दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ जुट रही है।

क्या हो सकता है वैज्ञानिक कारण

विशेषज्ञों की मानें तो जब किसी शव को नमी वाली और ऑक्सिजन की कमी वाली जगह पर दफनाया जाता है, तो शरीर में मौजूद फैट (वसा) में केमिकल बदलाव हो सकते हैं और वे ‘एडिपोसेर’ नाम के मोम जैसे पदार्थ में बदल सकते हैं। इस प्रक्रिया को ‘सैपोनिफिकेशन’ कहा जाता है। यह मोम जैसा पदार्थ शरीर कि टिश्यू पर एक परत बना सकता है और बैक्टीरिया की गतिविधि को रोककर सड़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है, जिससे शरीर लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है।

बहुत सूखी जगहों पर, जहां कब्र के अंदर तापमान और नमी बहुत कम होती है, शरीर में मौजूद पानी धीरे-धीरे सूख सकता है। बहुत कम नमी होने पर बैक्टीरिया की गतिविधि कम हो जाती है, जिससे सड़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और शरीर ‘ममी’ जैसी हालत में सुरक्षित रह सकता है।

चंदन, कपूर, हल्दी हो सकते हैं कारण

अगर दफनाने वाली जगह की मिट्टी बहुत ज्यादा एसिडिक या अल्कलाइन हो, या उसमें नमक और बोरेक्स जैसे प्राकृतिक मिनरल ज़्यादा हों, तो ये स्थितियां कुछ सूक्ष्मजीवों की बढ़त और गतिविधि को रोक सकती हैं। अंतिम संस्कार या दफनाने के दौरान इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक चीजें जैसे कपूर, चंदन का पाउडर, राख, हल्दी, नमक और कुछ खास जड़ी-बूटियों में भी रोगाणुरोधी गुण हो सकते हैं। ये पदार्थ सूक्ष्मजीवों की गतिविधि और सड़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं।

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