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एसआईआर में कोई रुकावट नहीं की जाएगी बर्दाश्त

ब्यूरो — नई दिल्ली, देश के कई राज्यों में चल रहे एसआईआर के खिलाफ देश की शीर्ष अदालत में वकील बनकर पहुंचीं ममता बनर्जी को करारा झटका लगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बैंच ने साफ कर दिया है कि एसआईआर की प्रक्रिया में किसी तरह की रोक लगाने की मंजूरी नहीं दी जा सकती। सभी राज्यों को इस बात को समझ लेना चाहिए। मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में कोई रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में एसआईआर के तहत दस्तावेजों की जांच के लिए समय सीमा एक सप्ताह तक बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जो कुछ भी स्पष्टता चाहिए, वह सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी जाएगी। सेामवार की सुनवाई में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के सांसद कल्याण बनर्जी भी वकील बनकर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि ऐसा भी हुआ है कि अल्पसंख्यक बहुल विधानसभा क्षेत्रों में यदि 1000 वोटर थे, तो उनमें से 950 को लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी सूची में डाल दिया गया है। इस दौरान वोटर लिस्ट में किसी नाम को जोडऩे पर आपत्ति जताने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म सात पर भी बहस हुई।

कल्याण बनर्जी ने कहा कि ऐसी बहुत सी आपत्तियां दायर हुई हैं, लेकिन यह तक नहीं पता कि इन्हें किन लोगों ने दायर किया है। सुनवाई के दौरान ऐसे लोगों को भी मौजूद रहना चाहिए, जिससे पता चले कि आखिर आपत्ति जताने वाले कौन हैं। एक व्यक्ति 1000 से ज्यादा आपत्तियां दायर कर दे रहा है। ऐसी सभी शिकायतें अज्ञात व्यक्ति के नाम से दायर होती हैं। बता दें कि एसआईआर को लेकर ममता बनर्जी ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि असम में यह नहीं हो रहा है, जहां भाजपा की सरकार है। लेकिन विपक्षी दलों की सत्ता वाले राज्यों में ही भाजपा इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। इस केस में ममता बनर्जी वकील के रूप में पहुंची थीं। यह भारत की अदालतों के इतिहास में पहला मौका था, जब कोई मौजूदा मुख्यमंत्री वकील के तौर पर कोर्ट में दलीलें देने के लिए पहुंचा।

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