बॉलीवुड का इकलौता एक्टर, जिसे मिला ‘बेस्ट एक्ट्रेस’ का अवॉर्ड, दुनियाभर में बनाई खास पहचान

नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के इतिहास में निर्मल पांडे एक ऐसे कलाकार रहे हैं, जिनकी जगह आज तक कोई नहीं भर पाया. उत्तराखंड के नैनीताल में जन्मे निर्मल का असली नाम राजकुमार पांडे था, लेकिन अभिनय की दुनिया में वे निर्मल पांडे के नाम से मशहूर हुए. उनकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि वे दुनिया के इकलौते ऐसे पुरुष अभिनेता हैं जिन्हें ‘बेस्ट एक्ट्रेस’ (बेस्ट एक्ट्रेस) का अवॉर्ड मिला. यह अनोखा कारनामा उन्होंने साल 1997 में अमोल पालेकर की फिल्म ‘दायरा’ के लिए किया था. फ्रांस के एक फिल्म फेस्टिवल में जब उन्हें यह सम्मान मिला, तो पूरी दुनिया हैरान रह गई थी. फिल्म की कहानी ही कुछ ऐसी थी जहाँ निर्मल ने एक किन्नर का किरदार निभाया था और उनके साथ काम कर रही सोनाली कुलकर्णी को ‘बेस्ट एक्टर’ का अवॉर्ड मिला था.
निर्मल पांडे की अभिनय यात्रा रामलीला के मंचों से शुरू होकर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) और फिर लंदन के थिएटर तक पहुँची. उन्होंने शेखर कपूर की फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ में विक्रम मल्लाह का किरदार निभाकर बॉलीवुड में तहलका मचा दिया था. इसके बाद उन्होंने ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ और ‘प्यार किया तो डरना क्या’ जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया. वे सिर्फ हीरो या विलेन बनने तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे किरदार की गहराई में उतरने वाले कलाकार थे. उनकी आवाज़ और उनके अभिनय का जादू छोटे पर्दे पर भी खूब चला, जहाँ ‘हातिम’ जैसे शो में उनके नेगेटिव रोल को दर्शकों ने काफी पसंद किया. अभिनय के साथ-साथ उन्हें संगीत का भी शौक था और उन्होंने ‘जज्बा’ नाम से अपना एक म्यूजिक एल्बम भी निकाला था.
हार्ट अटैक की वजह से गई जान
टैलेंटेड एक्टर का सफर बहुत ही कम उम्र में खत्म हो गया. महज 47 साल की उम्र में, 18 फरवरी 2010 को हार्ट अटैक की वजह से उनका निधन हो गया. निर्मल पांडे ने अपने छोटे से करियर में दिखा दिया कि एक सच्चा कलाकार लिंग और सीमाओं के बंधनों से ऊपर होता है. आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि उन्होंने भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान दिलाई. वे भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन ‘दायरा’ और ‘बैंडिट क्वीन’ जैसी फिल्मों में उनका काम आने वाली पीढ़ियों के लिए अभिनय की एक पाठशाला की तरह रहेगा.




