कई बीमारियों के लिए रामबाण है ये छोटी सी बूटी, कैसे करना है सेवन

विंध्य क्षेत्र के पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अनेक दुर्लभ औषधीय पौधे भी पाए जाते हैं. इन्हीं में से एक है निर्गुंडी, जिसे स्थानीय लोग संजीवनी बूटी के समान मानते हैं. छुहिया घाटी में आसानी से मिलने वाला यह पौधा ग्रामीण जीवन का अहम हिस्सा बना हुआ है. सीधी के आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ विपिन सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि इसके पत्तों में कई औषधीय गुण मौजूद हैं, जिनका उपयोग वर्षों से विभिन्न बीमारियों के उपचार में किया जाता रहा है. विशेष रूप से पक्षाघात (पैरालिसिस) जैसी गंभीर बीमारी में इसका पारंपरिक उपयोग उल्लेखनीय माना जाता है. आयुर्वेदिक दृष्टि से देखें, तो निर्गुंडी के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और दर्द निवारक गुण पाए जाते हैं. यही कारण है कि इसका उपयोग सूजन, जोड़ों के दर्द, संक्रमण और अन्य शारीरिक पीड़ा में किया जाता है.




