स्वास्थ्य

 कितने साल तक इस्तेमाल करना चाहिए एक तकिया, कब बन जाता है बीमारी का कारण?

How Many Years Should You Use a Pillow: अच्छी और गहरी नींद फिजिकल व मेंटल हेल्थ के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है.  बेहतर नींद के लिए केवल समय पर सोना ही काफी नहीं होता, बल्कि बेडरूम का माहौल और बिस्तर भी सही होना चाहिए. इसमें तकिए की भूमिका अहम होती है. तकिया अगर सही सपोर्ट न दे तो नींद की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है. इसलिए समय-समय पर तकिए की स्थिति जांचना और जरूरत पड़ने पर उसे बदलना जरूरी है.

हम रोज कई घंटे तक सिर को तकिए पर टिकाकर सोते हैं, इसलिए उसकी साफ-सफाई और क्वालिटी का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है. अगर तकिया लंबे समय तक नहीं बदला जाए तो इससे एलर्जी, त्वचा पर दाने या गर्दन में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

कितने समय में बदलना चाहिए तकिया?

नींद से जुड़े विषयों पर जानकारी देने वाली अमेरिका की फेमस sleepfoundation के अनुसार, एक्सपर्ट बताते हैं कि तकिया हर 1 से 2 साल में बदल देना चाहिए. इससे यह सुनिश्चित होता है कि तकिया साफ, सपोर्टिव और एलर्जन-फ्री रहे. हालांकि, यह पूरी तरह तकिए के मटेरियल और उसकी क्वालिटी पर भी निर्भर करता है.अगर आप सुबह उठते समय गर्दन में अकड़न या दर्द महसूस करते हैं, या आरामदायक पोजिशन नहीं मिलती, तो यह संकेत हो सकता है कि आपका तकिया अब सही सपोर्ट नहीं दे रहा. जिस तरह गद्दा समय के साथ दबने लगता है, उसी तरह तकिए भी चपटे हो जाते हैं या उनमें गांठें पड़ जाती हैं. ऐसे में उन्हें बदल देना बेहतर होता है. इसके अलावा तकिए पर ज्यादा पीले दाग दिखना या रात में एलर्जी बढ़ना भी संकेत है कि अब नया तकिया लेने का समय आ गया है।

अलग-अलग मटेरियल की उम्र

पॉलिएस्टर वाले तकिए आमतौर पर करीब एक साल तक चलते हैं, जबकि लेटेक्स जैसे मजबूत मटेरियल से बने तकिए तीन साल तक टिक सकते हैं. फोम की क्वालिटी और घनत्व भी इसकी उम्र तय करते हैं.  बेहतर क्वालिटी वाला तकिया अपेक्षाकृत ज्यादा समय तक चलता है.

साफ-सफाई क्यों जरूरी है?

तकिए और तकिए के कवर को नियमित रूप से धोना चाहिए. हर बार चादर धोते समय तकिए का कवर भी बदलें. कई तकिए मशीन में धोए और सुखाए जा सकते हैं. इससे उनमें जमा धूल, पसीना और गंदगी कम होती है और उनकी उम्र बढ़ती है. पुराने तकियों में धूल के कण, फंगस, फफूंदी और पालतू जानवरों के रोंए जमा हो सकते हैं. ये एलर्जी का कारण बनते हैं, जिससे नाक बहना, आंखों में जलन या त्वचा में खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा चेहरे और बालों का तेल, पसीना या लार तकिए में समाकर दाग बना सकते हैं.

सबसे जरूरी बात यह है कि तकिया सिर और गर्दन को सही सहारा देने के लिए बनाया जाता है. समय के साथ जब तकिया दब जाता है तो वह रीढ़ की हड्डी की सही स्थिति बनाए रखने में असमर्थ हो जाता है. इससे गर्दन, कंधों और मांसपेशियों में दर्द हो सकता है.

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