मध्यप्रदेश

हाईकोर्ट में खाकी की किरकिरी, केस खत्म होने के बाद भी महिला रजिस्ट्रार को किया गिरफ्तार, अब नपेंगे अफसर

जबलपुर: जमानती वारंट जारी होने पर चित्रकूट पुलिस द्वारा एक महिला रजिस्ट्रार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जबकि उनके पेश होने से पहले ही हाईकोर्ट याचिका का निराकरण कर चुका था। इस मामले में हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक मिश्रा की एकलपीठ ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने संबंधित सीएसपी और महिला एसआई को तलब किया था, जिन्होंने गुरुवार को पेश होकर अपना जवाब देने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने आग्रह स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 13 मई को निर्धारित की है और दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. प्रमिला सिंह ने महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट में सेवा देयकों का भुगतान न होने पर अवमानना याचिका दायर की थी। दिसंबर 2024 में हाईकोर्ट ने भुगतान के आदेश दिए थे। इसी मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने महिला रजिस्ट्रार नीरजा नामदेव के खिलाफ 25 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी कर उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को कहा था।

आदेश के बाद भी पुलिस की मनमानी

6 मई को हुई सुनवाई के दौरान महिला रजिस्ट्रार के अधिवक्ता ने भुगतान की रसीद पेश की और बताया कि उनका स्थानांतरण जून 2025 में रीवा विश्वविद्यालय हो चुका है। इसके बाद एकलपीठ ने याचिका का निराकरण कर दिया। अधिवक्ता ने इसकी सूचना व्यक्तिगत रूप से सीएसपी चित्रकूट को दी थी, फिर भी पुलिस ने महिला रजिस्ट्रार को रिहा नहीं किया और उन्हें जबरन कोर्ट में पेश किया।

कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

सुनवाई के दौरान चित्रकूट थाने में पदस्थ सब इंस्पेक्टर नेहा ठाकुर ने दलील दी कि उन्होंने एसडीओपी के आदेश पर और बेल बॉन्ड न भरने के कारण रजिस्ट्रार को पेश किया। इस पर एकलपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि महिला रजिस्ट्रार को जबरन पेश करने का कोई निर्देश नहीं दिया गया था। कोर्ट ने रजिस्ट्रार को तत्काल रिहा करने के आदेश देते हुए एसडीओपी राकेश बंजारा और महिला सब इंस्पेक्टर को तलब किया था। गुरुवार को उपस्थित हुए इन अधिकारियों को अब 13 मई तक अपना स्पष्टीकरण हलफनामे के जरिए देना होगा।

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