महाराष्ट्र

TCS नासिक केस में महाराष्ट्र SIT ने दाखिल की 1500 पन्नों की पहली चार्जशीट, निदा खान समेत इनके खिलाफ मिले सबूत

नासिक: टीसीएस नासिक केस में महाराष्ट्र SIT ने 1500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह चार्जशीट नासिक रोड के सेशंस जज केदार जोशी की विशेष अदालत में दाखिल दी गई है। यह चार आरोपियों के खिलाफ दर्ज TCS के पहले यौन उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामले से जुड़ी जांच की चार्जशीट है।अब तक की जांच के आधार पर, पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 61(2) [आपराधिक साजिश में शामिल होना], 64 (बलात्कार), 68 (अधिकार प्राप्त व्यक्ति द्वारा यौन संबंध बनाना), 69 (धोखे से या शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाना), 75 (यौन उत्पीड़न), 46 (उकसाना), 299 (धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य करना), 238 (अपराध के सबूत मिटाना, या अपराधी को बचाने के लिए झूठी जानकारी देना), 249 (अपराधी को पनाह देना), और 3(5) [सामान्य इरादा] के तहत आरोप लगाए हैं।

इसके अलावा, 26 मार्च को देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में TCS की एक महिला कर्मचारी की शिकायत के आधार पर दर्ज FIR से संबंधित चार्जशीट में, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत भी प्रासंगिक आरोप लगाए गए हैं।

कंपनी का कोई रोल नहीं

नासिक टीसीएस यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण केस की जांच पुलिस कमिश्नर (CP) संदीप कार्णिक की एसआईटी कर रही है। संदीप कार्णिक ने बताया कि यह मामला बेहद गंभीर प्रकृति का था। इसमें कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न और शोषण शामिल था, जहां पीड़ितों को उनकी जातीयता के आधार पर निशाना बनाया गया था। इन अपराधों की गंभीरता को देखते हुए, गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए SIT का गठन किया गया था। इस मामले में TCS कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।

17 गवाहों के बयान दर्ज

SIT का नेतृत्व कर रहे सहायक पुलिस कमिश्नर (अपराध) संदीप मितके ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के समक्ष 17 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। चार्जशीट में पीड़ित और आरोपियों की मेडिकल जांच रिपोर्ट के अलावा, पीड़ित के जबरन धर्मांतरण और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के सबूत भी शामिल हैं।

Related Articles

Back to top button