उत्तरप्रदेश

क्या यूपी में नहीं होंगे विस उपचुनाव? दूसरे राज्यों की खाली सीटों पर चुनाव की घोषणा के बाद अब उठ रहे सवाल

लखनऊ: चुनाव आयोग के बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की एक-एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा किए जाने के बाद यूपी की खाली पड़ी विधानसभा सीटों को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि जिन राज्यों में हाल ही में सीटें खाली हुई, वहां उपचुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया गया, जबकि यूपी में कई महीने पहले रिक्त हुई सीटों पर अब तक चुनाव की घोषणा नहीं हुई है। इससे अब यूपी में उपचुनाव की संभावना न के बराबर रह गई है।

चुनाव आयोग ने उपचुनाव की घोषणा की

चुनाव आयोग ने गुरुवार को बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर उपुचनाव का कार्यक्रम घोषित किया है। यहां 30 जुलाई को वोटिंग और 3 अगस्त को मतगणना होगी। बिहार की बांकीपुर सीट नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। नवीन को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद राज्यसभा भेज दिया गया था। ऐसे में 30 मार्च को उन्होंने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। वहीं, मध्य प्रदेश की दतिया सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की अयोग्यता और गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा विधायक येगेशभाई पटेल के निधन के बाद खाली हुई थी।

यूपी में 7 महीने से खाली सीटें

महज तीन महीने पहले खाली हुई सीटों पर चुनाव के कार्यक्रम आ गए, लेकिन यूपी में 7 महीने से खाली सीट पर उपचुनाव को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं है। इनमें सबसे पहले मऊ की घोसी सीट 20 नवंबर 2025 को सपा विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद रिक्त हुई थी। इसके बाद बरेली की फरीदपुर सीट भाजपा विधायक प्रो. श्याम बिहारी लाल के और सोनभद्र की दुद्धी सीट भी सपा विधायक विजय सिंह गोंड के 8 जनवरी को निधन के बाद रिक्त हो गई थी। इन दोनों सीटों के खाली हुए भी छह महीने पूरे हो रहे हैं। विधानसभा सचिवालय की ओर से इन रिक्तियों की सूचना भी चुनाव आयोग को काफी पहले भेजी जा चुकी है।

छह महीने में होने चाहिए उपचुनाव

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार यदि कोई विधानसभा सीट रिक्त होती है तो छह महीने के भीतर उसको भरा जाना जरूरी होता है। हालांकि, यदि विधानसभा का बचा हुआ कार्यकाल एक साल से कम हो या केंद्र सरकार से परामर्श के आधार पर आयोग को लगे कि चुनाव कराना संभव नहीं है, तो उपचुनाव टाले जा सकते हैं।

चुनाव आयोग की ओर से कोई संकेत नहीं

यूपी की खाली सीटों के संदर्भ में फिलहाल कम कार्यकाल की बंदिश लागू नहीं होती। यहां विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 तक है। ऐसे में घोसी सीट के लिए लगभग डेढ़ साल और बाकी के लिए भी 15 महीने से अधिक का कार्यकाल रिक्ति के समय बचा था। इसके बाद भी उपचुनाव न होने से सियासी गलियारों में इसकी अलग-अलग व्याख्याएं की जा रही है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सूत्रों के अनुसार चुनाव आयोग की ओर से अब तक उपचुनाव के लिए कोई संकेत नहीं दिया गया है।

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