संपादकीय

युद्धविराम के बाद युद्ध

अमरीका और ईरान के दरमियान कथित युद्धविराम 20-21 दिन ही टिक सका। अंतत: बीती 8 जुलाई को तडक़े 3-4 बजे ही ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों पर अमरीका ने ताबड़तोड़ हमले कर उसे दहला दिया। खौफ, अस्थिरता और संभावित हमलों की एक लहर ने खाड़ी देशों में झनझनाहट पैदा कर दी। जो सामान्य होने की उम्मीद कर रहा था, उसे असामान्य हालात में झोंक दिया। विश्व कांप उठा। बेशक ये हमले अप्रत्याशित, अनसोचे थे। पलटवार में ईरान ने भी दावा किया है कि उसने कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, जॉर्डन में करीब 85 ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए। बहरीन में अमरीकी नौसेना के 5वें बेड़े पर हमला किया गया। ओमान की खाड़ी में मौजूद अमरीकी जहाज को भी निशाना बनाकर क्षतिग्रस्त किया। बहरीन और कुवैत मेें बिजली की लाइन पर ऐसा हमला किया गया कि इलाका अंधेरे में डूब गया। अमरीकी सेना ने होर्मुज के पास 3 शहरों पर हवाई हमले कर उन्हें दहला दिया गया, जबकि 10 से अधिक शहरों पर बम बरसाए गए। ईरान की महत्वपूर्ण बंदर अब्बास बंदरगाह की बिल्कुल तबाही की खबरें सामने आई हैं और वहां मौजूद कई जहाज क्षतिग्रस्त भी हुए हैं। हमलों में ईरान की आईआरजीसी की 60 से अधिक पॉवर बोट्स को भी तबाह करने का दावा किया गया है। ईरान के सैन्य ठिकानों, वायु रक्षा प्रणाली, रडार सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, ड्रोन के ठिकानों पर अमरीकी हमले किए गए। बुशहर के परमाणु केंद्र के पास भी विस्फोट किए गए। सिरिक बंदरगाह और केश्म द्वीप के तेल ठिकानों पर भी मिसाइलें मारी गईं। हमलों में 8 ईरानी सैनिक मारे गए हैं, यह भी खबर है। सारांश यह है कि ईरान युद्ध का एक और चरण थोपा जा रहा है। यह अहंकार और विनाश का युद्ध है। अमरीका ही नहीं, इजरायल ने भी ईरान पर हमले बोलने की तैयारियां कर ली हैं। वहां के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने नया खुलासा किया है कि ईरान के पास ‘राायनिक हथियार’ हैं। ऐसे ही आरोप अमरीका ने इराक के तत्कालीन तानाशाह राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन पर लगाए थे कि इराक में जैविक, रासायनिक अस्त्र हैं, नतीजतन तबाही और मौतें व्यापक हो सकती हैं, लेकिन कुछ भी नहीं निकला और सद्दाम को फांसी पर लटका दिया गया।

बहरहाल राष्ट्रपति टं्रप ने ऐलान कर दिया है कि युद्धविराम समाप्त हो गया है। उन्होंने ईरानियों को सनकी, धोखेबाज, झूठे, नीच, क्रूर आदि करार दिया है। टं्रप ने ये अपशब्द अंग्रेजी में बोले हैं। कितना निचला स्तर है अमरीकी राष्ट्रपति का! टं्रप का मानना है कि ईरान का नेतृत्व गलत हाथों में है, लिहाजा उससे बातचीत करना और समझौते की उम्मीद करना ‘वक्त की बर्बादी’ है। राष्ट्रपति टं्रप ने कहा है कि अब वह ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं करेंगे। अब ईरान कहर झेलने को तैयार रहे। हम ईरान के तटों को ‘नरक’ बना देंगे। टं्रप इतने अनिश्चित, अस्थिर हैं कि उनके बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, लेकिन युद्धविराम के बाद युद्ध के उनके आदेश और ऐलान के बाद ही कच्चे तेल की कीमत 6 फीसदी उछल गई। अब तेल की कीमत करीब 79 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। दुनिया के लगभग सभी देशों के शेयर बाजार धड़ाम गिरे हैं। एकदम हाहाकार मचना शुरू हो गया है। यूरोपीय संघ ने परामर्श जारी किया है कि 31 अगस्त तक ईरान-इराक वायु क्षेत्र में उड़ान न भरें। ईरान ने होर्मुज फिर बंद करने का ऐलान किया है, तो अमरीका ने फिर नाकेबंदी का आदेश दिया है। ईरान पर से जो पाबंदियां समझौते के सहमति-पत्र के तुरंत बाद उठा ली गई थीं, 7 जुलाई से फिर उन्हें थोप दिया गया है। अमरीका के वित्त विभाग ने जो छूट दी थी, उसे रद्द कर दिया गया है और लाइसेंस खारिज कर दिए गए हैं। शांति के समझौते की नियति यही है। होर्मुज में करीब 350 जहाज-टैंकर फंस गए हैं, जिन पर करीब 6000 नाविक सवार हैं। भारत के भी 9 जहाज फंसे हैं, जिन पर 198 नाविक मौजूद हैं। विदेश मंत्रालय ने सभी को ‘सुरक्षित’ माना है। भारतीय मुद्रा ‘रुपया’ 63 पैसे टूटा है और एक डॉलर के मुकाबले 95.59 रुपए हो गया है। ये हमले तब किए गए हैं, जब ईरान अपने सुप्रीम लीडर रहे खामेनेई पर मातम मना रहा है। अमरीका ने देर रात ईरान पर 150 हमले किए। प्रमुख चाबहार बंदरगाह पर भी हमला किया गया है। युद्ध पूर्णत: छिड़ चुका है। ईरान ने भी दावा किया है कि उसने कई देशों में स्थित अमरीका के सैन्य अड्डों को निशाना बनाया है। ईरान के एक नेता ने बताया कि होर्मुज को हम अपनी शर्तों पर खोलेंगे। इस मामले में अमरीका की धमकियों से हम डरने वाले नहीं हैं। ईरान जब चाहेगा तो होर्मुज को खोला जाएगा। होर्मुज खोलने के लिए ईरान ने अपनी कुछ शर्तें रखी हैं। जब तक यह शर्तें नहीं मानी जाती, होर्मुज बंद रहेगा।

Related Articles

Back to top button