कूनो के ‘जय-वीरू’, सहेली भी नहीं तोड़ पाई याराना, सगे भाइयों की तरह रहते हैं प्रभास और पावक

श्योपुर: कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों को हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। जंगल के सबसे तेज धावक कहे जाने वाले चीते रफ्तार के साथ-साथ अपनी अटूट दोस्ती और सामाजिक ताने-बाने के लिए भी मिसाल बन रहे हैं।
यहां बचपन से साथ पले-बढ़े नर चीते बड़े होने के बाद भी एक-दूसरे का साथ छोड़ने को तैयार नहीं हैं। वे न सिर्फ साथ घूमते हैं, बल्कि मिलकर शिकार भी साझा करते हैं।
कूनो में चीतों का ‘जय-वीरू’ अवतार
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, कूनो में गौरव-शौर्य, अग्नि-वायु और प्रभाष-पावक जैसी जोड़ियां लंबे समय से इस गठबंधन व्यवहार का उदाहरण पेश कर रही हैं। अब मादा चीता ज्वाला के दो नर शावकों में भी यही गहरी कशिश दिख रही है। ये चीते अपने इलाके की सुरक्षा और बड़े शिकार पर संयुक्त रूप से हमला करने के लिए जाने जाते हैं।
कूनो में साथ रहने वाले अधिकांश नर चीते सगे भाई या बचपन के साथी हैं। उनके बीच स्वाभाविक रूप से मजबूत सामाजिक संबंध विकसित हो जाते हैं। यही कारण है कि वे लंबे समय तक एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते और जंगल में एक टीम की तरह व्यवहार करते हैं।
डॉ. समीता राजोरा, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ
बाहरी दखल बर्दाश्त नहीं
यह याराना जितना मजबूत है, उतना ही खतरनाक भी है। ये चीते अपने समूह में किसी तीसरे का दखल पसंद नहीं करते। कुछ समय पहले गौरव-शौर्य के इलाके में आई एक मादा चीता पर इन्हीं के ग्रुप ने हमला कर दिया था, जिसमें उसकी जान चली गई थी।
| गौरव और शौर्य | कूनो नेशनल पार्क | सगे भाई, आक्रामक सुरक्षा |
| अग्नि और वायु | कूनो नेशनल पार्क | बचपन के साथी, संयुक्त शिकार |
| प्रभाष और पावक | गांधी सागर अभयारण्य | शिफ्टेड जोड़ी, धीरा के साथ तालमेल |
कूनो के बाहर भी बरकरार है याराना
दक्षिण अफ्रीका से लाए गए नर चीते प्रभाष और पावक को अप्रैल 2025 में गांधी सागर अभयारण्य शिफ्ट किया गया था। वहां सितंबर 2025 में मादा चीता ‘धीरा’ को भी भेजा गया, ताकि ब्रीडिंग हो सके। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि धीरा के आने के बाद भी प्रभाष और पावक की जोड़ी टूटी नहीं है और वे अब भी साथ-साथ ही शिकार और पहरेदारी कर रहे हैं।




