स्वास्थ्य

बच्चे में बढ़ रहा है मोटापा तो डाइटिंग से पहले जान लें ये बातें

फरीदाबाद: बच्चों में बढ़ता मोटापा आज कई माता-पिता के लिए चिंता का विषय बन गया है. बदलती खान-पान की आदतें, जंक फूड, मोबाइल और टीवी पर ज्यादा समय बिताना, शारीरिक गतिविधि की कमी और नींद पूरी न होना इसके पीछे बड़ी वजहें हो सकती हैं. लेकिन बच्चे का वजन कम करने के लिए जल्दबाजी में डाइटिंग या कोई इलाज शुरू करना सही नहीं है. बच्चों में मोटापे के कारण, बचाव के आसान उपाय, एक्सरसाइज, नींद, खान-पान और आयुर्वेदिक उपचार से जुड़ी जरूरी बातें डॉक्टर ने बताई हैं.

फिजिकल एक्टिविटी कम होना मोटापे की बड़ी वजह

बच्चों में मोटापा बढ़ने की मुख्य वजह क्या है. इस पर Local18 से बातचीत में फरीदाबाद के Accord Hospital की आयुर्वेदिक डॉक्टर अनु शर्मा बताती हैं कि आजकल बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी बिल्कुल कम हो गई है और बाहर का खाना भी बच्चों में काफी बढ़ गया है. इसके कारण बच्चों में मोटापा बढ़ने की समस्या तेजी से सामने आ रही है. कई बच्चे खाना खाते समय मोबाइल देखते हैं. यह भी बच्चों के बढ़ते वजन का एक बड़ा कारण बन रहा है. मोबाइल की वजह से बच्चे का ध्यान खाने और शरीर की जरूरतों के बजाय स्क्रीन पर ज्यादा रहता है.

बच्चों के खाने में किन चीजों से बचना चाहिए. इस पर डॉक्टर अनु शर्मा बताती हैं कि आज के समय में जितना संभव हो, माता-पिता को बच्चों को जंक फूड से दूर रखना चाहिए. अगर बच्चे का कभी जंक फूड खाने का मन करे तो उसे पूरी तरह रोकने के बजाय उसकी एक सीमा तय की जा सकती है. बच्चों को करीब 15 दिन में एक बार जंक फूड दिया जा सकता है और इस तरह खाने की आदत को नियंत्रित करके चलना चाहिए.

योग और सूर्य नमस्कार बच्चों के लिए उपयोगी

आयुर्वेद में बच्चों का मोटापा कैसे कम करें. इस पर डॉक्टर अनु शर्मा बताती हैं कि आयुर्वेद में योग और मेडिटेशन का भी काफी महत्व है. बच्चों के लिए वज्रासन उपयोगी माना जाता है. सूर्य नमस्कार भी बच्चों को नियमित रूप से करना चाहिए. बच्चे रोजाना करीब 10 से 12 बार सूर्य नमस्कार कर सकते हैं. वज्रासन की खास बात यह है कि इसे खाना खाने के बाद भी किया जा सकता है.

हर मोटे बच्चे को डाइटिंग जरूरी नहीं

क्या मोटे बच्चे को डाइटिंग करानी चाहिए. इस पर डॉक्टर अनु शर्मा बताती हैं कि हर बच्चे को डाइटिंग करवाना जरूरी नहीं है. सबसे पहले बच्चे की खाने की आदतों को नियंत्रित करना चाहिए. बच्चा क्या खा रहा है, कितनी मात्रा में खा रहा है और कितनी बार खा रहा है, इस पर ध्यान देना जरूरी है. मैदा बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए इसे खाने में कम से कम रखना चाहिए. अगर बच्चे को रोजाना संतुलित आहार, सलाद और पोषण से भरपूर खाना दिया जाए और साथ में फिजिकल एक्टिविटी भी हो तो वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है.

मोटापे से बच्चों में बढ़ सकती हैं बीमारियां

डॉ. अनु शर्मा बताती हैं कि बच्चों में मोटापे के कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिल सकती हैं. लड़कियों में पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम जैसी समस्या का खतरा बढ़ सकता है और हार्मोन से जुड़ी परेशानियां भी सामने आ सकती हैं. बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज जैसी समस्या भी देखने को मिल सकती है. इसके अलावा मोटापे का असर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है.

अच्छी नींद वजन नियंत्रित रखने में मददगार

डॉ. अनु शर्मा बताती हैं कि बच्चों का वजन नियंत्रित रखने में नींद की भी अहम भूमिका होती है. बच्चों को रात में करीब 10 बजे तक सो जाना चाहिए और सुबह करीब 6 बजे उठने की आदत रखनी चाहिए. देर रात तक जागने से शरीर की नींद और हार्मोन से जुड़ी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. इससे स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है और वजन बढ़ने की समस्या भी हो सकती है. इसलिए बच्चों के लिए सही समय पर सोना और पर्याप्त नींद लेना जरूरी है.

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