‘सामाजिक कुरीतियों व फिजूलखर्ची पर लगाम’ चंद पंचायतों के सराहनीय निर्णय!

भारतीय समाज को प्राचीन काल से ही दहेज, मृत्युभोज और नशों आदि की सामाजिक कुरीतियों ने जकड़ रखा है। इन कुरीतियों के दुष्प्रभाव को देखते हुए समय-समय पर ‘स्वामी राम कृष्ण परमहंस’, ‘स्वामी दयानंद’ तथा ‘स्वामी विवेकानंद’ जैसे समाज सुधारकों द्वारा अभियान चलाए गए परंतु अभी भी समाज इन कुरीतियों से मुक्त नहीं हो पाया है। वर्तमान में अनेक पंचायतों द्वारा इन बुराइयों को दूर करने के लिए अपने-अपने स्तर पर अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनके द्वारा लिए गए चंद प्रेरणादायक तथा जन हितकारी फैसले निम्न में दर्ज हैं :
* 16 फरवरी को ‘संभल’ (उत्तर प्रदेश) की ‘किदवई बिरादरी’ ने अपनी पंचायत में शादी-विवाह में फिजूलखर्ची रोकने के लिए शादी या बारात वाले दिन डी.जे. बजाने, नाच-गाने पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाने और इसका उल्लंघन करने वाले को ‘किदवई बिरादरी’ के प्रमुख ने दंडित करने का फैसला किया।
* 6 जुलाई को ‘सिरमौर’ (हिमाचल प्रदेश) के ‘शिलाई’ उपमंडल के ‘धारवा’ गांव की पंचायत द्वारा गांव में होने वाले विवाह समारोह सादगी से करने, शादी में बीयर, शराब और अन्य सभी प्रकार के नशों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने, दहेज के लेन-देन पर पूर्ण रोक लगाने आदि के निर्णय लिए गए। अब बारात में अधिकतम 100 बाराती और 15 वाहन ही शामिल हो सकेंगे।
इन नियमों का उल्लंघन करने वाले परिवार पर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाने और उनके परिवार में होने वाले किसी भी समारोह में शामिल न होने का फैसला भी किया गया।
* 9 जुलाई को ‘बठिंडा’ (पंजाब) के ‘जस्सी पौवाली’ गांव के लोगों ने एक प्रस्ताव पास करके नशे की बिक्री और सेवन करते पकड़े गए लोगों और उनका साथ देने वाले लोगों का बहिष्कार करने का फैसला किया।
इसके साथ ही किसी भी व्यक्ति को अपने घर में किराएदार रखने से पहले पुलिस द्वारा उसकी वैरीफिकेशन अवश्य करवाने और पंचायत में किराएदार का विवरण जमा करवाने की अपील भी की गई।
* 23 अगस्त को ‘मुक्तसर’ (पंजाब) के ‘कबरवाला’ गांव की पंचायत ने फैसला किया कि गांव का सरपंच या पंचायत का कोई भी सदस्य नशा बेचने के आरोप में पकड़े गए लोगों की जमानत नहीं देगा और ऐसा करने वाले पर 10,000 रुपए जुर्माना लगाया जाएगा।
* 23 अगस्त को ही ‘हांसी’ (हरियाणा) के गांव ‘राजथल’ की पंचायत ने नशों की रोकथाम के लिए गांव से गुजरने वाले जींद-हांसी रोड पर दिन-रात ठीकरी पहरा देने तथा गांव में नशा बेचने वाले को 1 लाख रुपए जुर्माना करने का फैसला किया।
* 2 अक्तूबर को ‘पलवल’ (हरियाणा) में हुई ‘ब्राह्मण समाज की महापंचायत’ में मृत्यु भोज पर पाबंदी लगाने के अलावा शादी-विवाह के दौरान होने वाले लेन-देन पर रोक लगाने आदि के निर्णय लिए गए।
इसके अनुसार सगाई में केवल एक रुपया और पांच जोड़ी कपड़े ही देने, बारात में अधिकतम 51 लोगों को शामिल करने और वर व वधू दोनों ही पक्षों की ओर से नशे पर प्रतिबंध लगाने आदि के निर्णय लिए गए। डी.जे. और तेज संगीत पर भी रोक लगाई गई है। कन्या पक्ष की ओर से वर पक्ष को अधिकतम दो तोले सोने के गहने, 100 ग्राम चांदी, 11 जोड़ी कपड़े, संदूक या अलमारी और बैड दिया जा सकेगा और इन नियमों का उल्लंघन करने वालों द्वारा आयोजित समारोहों का ब्राह्मïण समाज की महापंचायत द्वारा बहिष्कार करने का निर्णय भी लिया गया।
* और अब 2 अक्तूबर को ही ‘शिमला’ (हिमाचल प्रदेश) के गांव ‘लबाना-सदाना’ की पंचायत ने अपनी ग्राम सभा में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में फिजूलखर्ची रोकने के लिए बारात के गेट पर स्वागत, टोपी मालाएं व वस्त्र भेंट करने, महंगे उपहार देने आदि पर प्रतिबंध लगा दिया है। उक्त नियमों का उल्लंघन करने वाले पर 51,000 रुपए जुर्माना लगाया जाएगा। लोक-लाज या परम्परा के नाम पर न चाहते हुए भी इस तरह की रस्मों पर धन खर्च करना उचित नहीं है। अत: समाज में नशे, दहेज और मृत्यु भोज आदि रस्मों पर रोक लगाने के उक्त पंचायतों द्वारा लिए गए निर्णय सही हैं जिन्हें अन्य पंचायतों और समाजों को भी अपनाना चाहिए। ऐसा करके दिखावे के नाम पर फिजूलखर्ची और नशों के कारण होने वाली हानि से काफी हद तक बचा जा सकता है।—विजय कुमार




