एक तरफ H-1B वीजा पर एक्शन, दूसरी तरफ ‘भारतीय’ सत्या नडेला को अवॉर्ड, एक ही दिन में ट्रंप के दो रंग

Donald Trump H-1B Visa: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ विदेशी लोगों के लिए अमेरिका में नौकरी का रास्ता मुश्किल बना रहे हैं. इसका असर भारतीयों पर भी पड़ेगा. वहीं, दूसरी तरफ ट्रंप सरकार ने भारतीय मूल के माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र के बड़े अमेरिकी सम्मान से नवाजा है. हैरानी की बात यह है कि जिस दिन सत्या नडेला को सम्मान दिया गया, उसी दिन कुछ घंटे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा के इस्तेमाल को लेकर माइक्रोसॉफ्ट पर कार्रवाई करने का ऐलान किया था.
H-1B वीजा वह वीजा है, जिसके जरिए भारत जैसे दूसरे देशों के लोग अमेरिका जाकर टेक्नोलॉजी समेत अन्य क्षेत्रों में खास तरह की नौकरियां कर सकते हैं. एक ही दिन में हुई इन दोनों घटनाओं से ट्रंप सरकार की नीति पर सवाल उठ रहे हैं. एक तरफ सरकार दुनिया के बड़े वैज्ञानिकों और टेक्नोलॉजी के जानकारों की तारीफ कर रही है, तो दूसरी तरफ विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने वाली कंपनियों पर सख्ती भी कर रही है.
सत्या नडेला को अमेरिका का बड़ा सम्मान
गुरुवार को व्हाइट हाउस से जुड़े एक कार्यक्रम में माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला को नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन दिया गया. यह अमेरिका में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करने वालों को मिलने वाले सबसे बड़े सम्मानों में से एक है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नडेला के काम की तारीफ की. उन्होंने कहा कि नडेला ने माइक्रोसॉफ्ट को आगे बढ़ाने और उसकी तकनीक को दुनिया भर में पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है. इस कार्यक्रम का नाम था ‘साइंस: ए न्यू गोल्डन एज’. इसमें टेक्नोलॉजी और साइंस के क्षेत्र में अच्छा काम करने वाली छह बड़े नामों को सम्मानित किया गया. सत्या नडेला के अलावा माइकल डेल को भी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में यह सम्मान मिला. वहीं, एलन मस्क, गूगल के सह-संस्थापक सर्गेई ब्रिन, एनवीडिया के सीईओ जेनसन हुआंग और AMD की सीईओ लिसा सु को विज्ञान के क्षेत्र में नेशनल मेडल ऑफ साइंस दिया गया.
ट्रंप ने एलन मस्क को राष्ट्रीय खजाना बताते हुए उन्हें मॉर्डन टाइम के एडीसन की उपाधि दी. थॉमस अल्बा एडिसन एक महान आविष्कारक थे. मुख्य तौर पर उन्हें इलेक्ट्रिक बल्ब के आविष्कार के लिए जाना जाता है. वहीं ट्रंप प्रशासन ने जिन छह लोगों को अवार्ड दिया, उनमें से पांच का परिवार दूसरे देशों से आकर अमेरिका में बसा था. ट्रंप ने सभी को ‘नेशनल ट्रेजर्स’ यानी देश की अनमोल प्रतिभाएं बताया और खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में उनके योगदान की तारीफ की.
अवॉर्ड से कुछ घंटे पहले माइक्रोसॉफ्ट पर कार्रवाई
सत्या नडेला को सम्मान दिए जाने से कुछ घंटे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ कार्रवाई का ऐलान किया. कंपनी को एक सरकारी कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया. यह कार्यक्रम उन विदेशी कर्मचारियों को ग्रीन कार्ड दिलाने की प्रक्रिया से जुड़ा है, जो H-1B वीजा पर अमेरिका में काम करते हैं. ग्रीन कार्ड मिलने के बाद कोई विदेशी नागरिक अमेरिका में लंबे समय तक रह सकता है और वहां काम कर सकता है. वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर H-1B वीजा का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि कंपनी को विदेशी कर्मचारियों की जगह अमेरिकी लोगों को ज्यादा नौकरी देनी चाहिए. वेंस ने दावा किया कि माइक्रोसॉफ्ट ने 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जबकि उनकी जगह 6,300 H-1B कर्मचारियों को रखा. हालांकि, वेंस के आरोपों को माइक्रोसॉफ्ट ने खारिज किया है.
माइक्रोसॉफ्ट ने क्या जवाब दिया?
माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि पिछले वित्त वर्ष में उसने करीब 6,000 H-1B वीजा के लिए आवेदन किया था. लेकिन इनमें से 80 फीसदी आवेदन नए लोगों को नौकरी देने के लिए नहीं, बल्कि पहले से कंपनी में काम कर रहे कर्मचारियों की वीजा समय सीमा बढ़वाने या उसमें बदलाव कराने के लिए थे. कंपनी ने बताया कि बाकी आवेदन उनके लिए थे, जो पहले से कानूनी रूप से अमेरिका में रह रहे थे और माइक्रोसॉफ्ट में नौकरी करने आए थे. कंपनी का कहना है कि ये लोग नए-नए अमेरिका नहीं पहुंचे थे और इनकी संख्या उसके कुल अमेरिकी कर्मचारियों की करीब एक फीसदी थी. माइक्रोसॉफ्ट ने यह भी कहा कि वह H-1B वीजा के लिए उन्हीं कर्मचारियों के आवेदन करती है, जो इसके नियमों को पूरा करते हैं.
H-1B वीजा पर ट्रंप सरकार क्या चाहती है?
H-1B वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां भारत जैसे दूसरे देशों से पढ़े-लिखे और टैलेंटेड लोगों को नौकरी पर बुलाती हैं. इस वीजा प्रोग्राम का फायदा बड़े पैमाने पर भारतीयों को मिलता है. भारतीय IT कर्मचारियों के लिए यह वीजा काफी अहम है. ट्रंप सरकार का कहना है कि विदेशी कर्मचारियों को तभी बुलाया जाना चाहिए, जब उनके पास कोई खास हुनर हो. अमेरिकी कंपनियां ऐसे कामों के लिए विदेश से कम वेतन पर कर्मचारी न बुलाएं, जिन्हें अमेरिकी लोग भी कर सकते हैं. सरकार ने H-1B वीजा के लिए ज्यादा फीस लेने के फैसले का भी बचाव किया है. उसका कहना है कि इससे कंपनियां सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही विदेशी कर्मचारियों को बुलाएंगी.




