राजनीति

मैं विश्वास के साथ कह रहा हूं कि 21वीं सदी का सबसे बड़ा रिफॉर्म… अमित शाह ने कर दिया बड़ा दावा

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन को 21वीं सदी का सबसे बड़ा सुधार बताते हुए सोमवार को कहा कि इससे लोगों को समय पर, सुलभ तरीके से और सरलता से न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि तीन नए कानून लागू होने के बाद राजस्थान में सजा दिलाने की दर 42 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गई है और इनके पूरी तरह से लागू होने के बाद यह दर 90 फीसदी तक पहुंच जाएगी।

शाह ने आज जयपुर में तीन नए आपराधिक कानूनों पर राज्यस्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह में शाह ने कहा कि तीन नए कानूनों के संपूर्ण कार्यान्वयन के बाद देश की आपराधिक न्याय प्रणाली पूरी दुनिया में सबसे आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली बन जाएगी।

मैं विश्वास के साथ कह रहा हूं…

अमित शाह ने कहा कि मैं विश्वास के साथ कह रहा हूं कि इक्कीसवीं शताब्दी का सबसे बड़ा ‘रिफॉर्म’ हमारे तीन आपराधिक न्याय कानूनों को आगे लागू करना है। इसके संपूर्ण क्रियान्वयन के बाद हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली पूरी दुनिया में सबसे आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली बन जाएगी, इसका मुझे पूरा विश्वास है।

पुरानी व्यवस्था के तहत न्याय में होने वाली देरी पर शाह ने कहा कि कुछ मामले बिना सजा के 25 से 30-30 साल तक चलते रहते थे। उन्होंने कहा, ‘‘लोगों को समय पर न्याय नहीं मिलता था। अब इससे मुक्ति मिल जाएगी।’’

शाह ने नए कानूनों के तहत प्रकियाओं की समयसीमा तय किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा, “ जब हमने समयसीमाएं तय कीं तब सबके मन में संशय था कि क्या ऐसा हो पायेगा? लेकिन सिर्फ एक साल हुआ है, देश में पचास प्रतिशत से ज्यादा चार्जशीट (आरोप पत्र) समय पर होने लगे हैं।”

एक साल के भीतर अब 90 फीसदी चार्जशीट समय पर होने लगेंगे

अमित शाह ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है एक और साल में ये नब्बे प्रतिशत तक पहुंच जायेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि राजस्थान में सजा कराने की दर 42 प्रतिशत थी, जो इन कानूनों के अमल में आने के एक ही साल में बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन कानूनों पर पूर्ण अमल होने के बाद यह दर 60 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत तक हो जाएगी। गृह मंत्री ने यह भी बताया कि भारत सरकार ने नयी प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए लाखों पुलिसकर्मियों, हजारों न्यायिक अधिकारियों और फोरेंसिक प्रयोगशालाओं व जेल कर्मचारियों का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है।

आरोपियों के जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया जाएगा

अमित शाह ने कहा कि इन सुधारों से अदालत में प्रत्यक्ष रूप से पेश होने की जरूरत कम हो जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘आरोपियों को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया जाएगा, जबकि पुलिस अधिकारी, बैंक कर्मचारी, डॉक्टर और फोरेंसिक विशेषज्ञ भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हो सकेंगे। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी।’’

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इससे विचाराधीन कैदियों के पुलिस हिरासत से भागने की संभावना भी कम हो जाएगी। शाह ने कहा कि देश में लागू तीन नए आपराधिक कानून लोगों को समय पर, सुलभ तरीके से और सरलता से न्याय देने का काम करेंगे।

उन्होंने कहा कि पूरे देश में किसी के भी साथ अन्याय होता है तो वो अदालत में जाना पसंद नहीं करता। हमारी न्यायिक व्यवस्था की छवि न्याय समय पर ना मिले, ऐसी बनी है। मैं विश्वास के साथ बताने आया हूं आपराधिक न्याय प्रणाली के तीन कानून आपको समय पर, सुलभ तरीके से, सरलता से न्याय देने का काम करेंगे।’’

अमित शाह ने पीएम मोदी के कामों की चर्चा की

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘ईज ऑफ लिविंग’ के लिए ढेर सारे परिवर्तन किए लेकिन इन कानूनों के अमल के साथ ‘ईज ऑफ जस्टिस’ के लिए भी बहुत बड़ा परिवर्तन होगा। उन्होंने कहा, ‘‘इन कानूनों के माध्यम से हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली दंड की जगह न्याय से प्रेरित होकर काम करेगी।’’

शाह ने कहा कि पूरे देश में इन नये कानूनों का सटीक क्रियान्वयन हो चुका है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय के माध्यम से सभी राज्यों को इन कानूनों पर अमल में सहायता और अनुपालन में मार्गदर्शन मिल रहा है।

शाह ने कहा कि अंग्रेजों द्वारा संसद में पारित पुराने कानून अंग्रेजी शासन को बचाने के लिए बने कानूनों की जगह भारतीयों द्वारा बनाए गए, भारतीय संसद में पारित हुए और भारतीयों को न्याय दिलाने वाले कानूनों की शुरुआत एक ऐतिहासिक बात है।

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