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खालिस्तान जनमत संग्रह में लोगों की उपस्थिति पर उठे सवाल

भारत द्वारा प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’, (एस.एफ.जे.) द्वारा 18 अक्तूबर को एडमॉन्टन में आयोजित बहुचर्चित खालिस्तान जनमत संग्रह अपनी वास्तविक उपस्थिति को लेकर जांच के घेरे में आ गया है, जबकि इसके नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कथित तौर पर भारत के खिलाफ अपनी धमकियों को फिर से दोहराया है। इन आरोपों के बीच कि यह जनमत संग्रह प्रत्याशित भागीदारी जुटाने में विफल रहा, पन्नू ने भारत को निशाना बनाते हुए एक टकरावपूर्ण भाषण दिया। उनकी टिप्पणियों ने संगठन के अभियान की आलोचना को हवा दी है और इसकी राजनीतिक रणनीति पर नए सवाल खड़े किए हैं। पन्नू ने कथित तौर पर इस सभा के दौरान ‘दिल्ली बनेगा खालिस्तान’ का नारा लगाया और अपने अलगाववादी एजैंडे को दोहराया।  

उनके टकरावपूर्ण अंदाज को कार्यक्रम की प्रतिक्रिया पर निराशा के रूप में देखा जा सकता है, हालांकि उनके हाव-भाव या शारीरिक भाषा से उनकी भावनात्मक स्थिति का निश्चित रूप से पता नहीं लगाया जा सकता है। उपस्थिति को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने की बजाय, उनके भाषण में संगठन के भारत विरोधी बयानों को और अधिक उग्र करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। पन्नू ने देश को तोडऩे के प्रयास के तहत भारत में सीजेपी का समर्थन करने का अपना इरादा भी कथित तौर पर जाहिर किया। रिकॉर्डिंग में जैसा बताया गया है, यह बयान एक गंभीर आरोप है जिसके लिए उनके सटीक शब्दों और उनके संदर्भ के सत्यापन की आवश्यकता है। 

पन्नू ने पहले भी भारत को लक्षित धमकियों को लेकर विवाद खड़ा किया है, और उनकी हालिया कथित टिप्पणियों ने अलगाववादी संगठन की गतिविधियों पर फिर से ध्यान आकर्षित किया है। व्यापक प्रचार के बावजूद, एडमॉन्टन जनमत संग्रह में वास्तविक उपस्थिति स्वतंत्र रूप से असत्यापित बनी हुई है। एस.एफ.जे. ने दावा किया कि लगभग 23,000 वोट डाले गए थे, लेकिन स्वतंत्र रूप से ऑडिट किए गए आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। यह आयोजन फ्लॉप रहा, ऐसे आरोप भी इसी तरह असत्यापित हैं। यह जनमत संग्रह एक निजी तौर पर आयोजित, गैर-बाध्यकारी कवायद थी, जिसके पास भारत की क्षेत्रीय सीमाओं को बदलने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।-जोगिंदर बस्सी(प्रबंध निदेशक, रेडियो गाऊंदा पंजाब मुख्य संपादक, हिंदुस्तान पोस्ट, कनाडा)

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