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चालू वित्त वर्ष में 7% की दर से बढ़ सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था: सीईए

नई दिल्लीः मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने बुधवार को कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों का मजबूती से सामना किया है और वित्त वर्ष 2025-26 में देश की GDP वृद्धि दर सात प्रतिशत तक पहुंचने की पूरी संभावना है। “भारत समुद्री सप्ताह” कार्यक्रम में बोलते हुए नागेश्वरन ने कहा कि तीन प्रमुख वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने हाल ही में भारत की साख बढ़ाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि मौजूदा नीतिगत रुख जारी रहा, तो भारत जल्द ही ‘A’ रेटिंग श्रेणी में शामिल हो सकता है।

CEA ने बताया कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संयमित कदमों ने अर्थव्यवस्था को “आरामदायक स्थिति” में बनाए रखा है, बावजूद इसके कि दुनिया अभी भी कई अनिश्चितताओं और शुल्क-आधारित तनावों से जूझ रही है। उन्होंने कहा, “अर्थव्यवस्था की जुझारूपन ने भारत को वैश्विक अस्थिरता के बीच स्थिर बनाए रखा है।”

नागेश्वरन ने यह भी बताया कि आयकर राहत और वस्तु एवं सेवा कर (GST) को युक्तिसंगत बनाने जैसे नीतिगत कदमों ने विकास को गति दी है, जिससे अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर सात प्रतिशत तक पहुंच सकती है। फरवरी में उन्होंने यह अनुमान 6.3% बताया था लेकिन अब उन्होंने इसे संशोधित कर सात प्रतिशत के करीब कर दिया है।

बैंक ऋण वृद्धि में सुस्ती की चिंताओं पर उन्होंने कहा, “हमें सिर्फ बैंक लोन पर नहीं, बल्कि पूरी वित्तीय प्रणाली में संसाधन जुटाने की तस्वीर को देखना चाहिए।” उन्होंने बताया कि गैर-बैंक ऋणदाताओं, वाणिज्यिक पत्रों और इक्विटी बाजारों के जरिए कुल संसाधन जुटाने में पिछले छह सालों में 28.5% सालाना की वृद्धि हुई है।

इसी कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) के चेयरमैन के. राजारामण ने कहा कि बंदरगाह, पोत-परिवहन और समुद्री उद्योग को 300 अरब डॉलर से अधिक की पूंजी की आवश्यकता होगी, और इस फंडिंग के लिए गिफ्ट सिटी एक मजबूत विकल्प साबित हो सकती है।

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