इंदौर: प्रशासन का सर्वे पूरा, विभाग का दावा 26 हजार घरों का सर्वे, हकीकत में पीड़ितों तक नहीं पहुंची टीमें

इंदौर: एक तरफ दूषित पानी पीने से इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में 16 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। दूसरी तरफ प्रशासन पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। दरअसल, शहर में दूषित पानी से फैल रही बीमारियों के बीच स्वास्थ्य विभाग के सर्वेक्षण दावों पर सवाल उठ रहे हैं, जहां विभाग 26 हजार से अधिक घरों के सर्वे का दावा कर रहा है, वहीं बीमारों तक स्वास्थ्य टीमें नहीं पहुंची हैं। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से बीमार होने वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा सर्वेक्षण किया जा रहा है।
न सर्वे वाले पहुंचे, न सैंपल वाले
विभाग का दावा है कि अब तक 26 हजार से अधिक घरों का सर्वे किया जा चुका है। इसके बावजूद, भागीरथपुरा स्थित स्वास्थ्य केंद्र से मात्र 200 मीटर की दूरी पर चावला जी की गली में सर्वे टीम अब तक नहीं पहुंची है। यहां बीमार लोग अभी भी किसी स्वास्थ्यकर्मी के आने का इंतजार कर रहे हैं। क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार के तहत लगभग सात टीमें कार्यरत हैं। लेकिन चावला जी की गली में न तो सर्वे के लिए कोई टीम आई है और न ही पानी का सैंपल लेने के लिए।
16 परिवार के 20 लोग पीड़ित
इस गली में 16 परिवार निवास करते हैं। इनमें से 20 से अधिक लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित हो चुके हैं। वर्तमान में दो मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि एक हाल ही में डिस्चार्ज होकर घर लौटा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम का कोई भी सदस्य यहां नहीं आया है। नेहा, जो चार दिनों से एलआईजी क्षेत्र के एक निजी क्लीनिक में भर्ती हैं, ने बताया कि उनके घर पर कोई स्वास्थ्यकर्मी नहीं आया।
मरीज के 50 पड़ोसी घरों का सर्वे
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिन घरों में मरीज मिले हैं, उनके आसपास के 50 घरों का सर्वे किया जा रहा है। ललिता कौशल, जो दो दिन पहले अस्पताल से लौटीं, ने भी फॉलोअप न होने की शिकायत की है। गुरुवार से मलेरिया विभाग की टीम भागीरथपुरा में सर्वेक्षण करेगी। 40 सदस्यों की यह टीम गंदगी वाले स्थानों पर लार्वा नष्ट करने की दवाई का छिड़काव करेगी। यह टीम डेंगू-मलेरिया से बचाव के लिए जागरूकता भी फैलाएगी। यह पहली बार है जब मरीज मिलने पर भी टीम दवाईयों का छिड़काव करेगी।




