मध्यप्रदेश

थाने के अंदर गूंज रहा ‘A For Apple’, रीवा में इस पुलिस स्टेशन में FIR के साथ लिखा जा रहा बच्चों का भविष्य

रीवा: पुलिस स्टेशन बनाए जाते हैं ताकि इलाके में कहीं अपराध हो तो वह अपराध रजिस्टर किया जा सके। जिसे हम FIR का नाम देते हैं। हालांकि मध्य प्रदेश में एक पुलिस स्टेशन ऐसा भी है, जिसमें आस-पड़ोस के 100 से ज्यादा बच्चे पढ़ने जाते हैं। जी हां! मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक अनोखी पहल हुई है। यहां के अमहिया पुलिस स्टेशन में अब सिर्फ FIR दर्ज नहीं होती, बल्कि बच्चों को पढ़ाया भी जाता है। पुलिसकर्मी खुद पैसे जोड़कर शाम को 4 से 6 बजे तक 100 से ज़्यादा ज़रूरतमंद बच्चों को मुफ्त में पढ़ाते हैं। यह पहल पिछले आठ महीनों से चल रही है और इससे बच्चों का भविष्य सुधर रहा है और पुलिस की छवि भी बेहतर हो रही है।

स्कूल जैसा ही है यहां का माहौल

पुलिस स्टेशन इंचार्ज शिव अग्रवाल ने बताया कि शुरुआत में कुछ बच्चों को चादरों पर बिठाकर पढ़ाया जाता था, लेकिन अब यह एक पूरा स्कूल बन गया है। यहां पहली क्लास से लेकर बड़ी क्लासों तक के करीब 100 बच्चे पढ़ते हैं और उन्हें पढ़ाने के लिए तीन टीचर भी हैं। अग्रवाल, जो खुद भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते समय पढ़ाते थे, ने कहा कि यह समाज को कुछ वापस देने और खाकी के डर को कम करने का एक तरीका है। उन्होंने कहा, ‘लोग पुलिस से डरते हैं। जब बच्चे यहां पढ़ते हैं, तो वे और उनके माता-पिता पुलिस का एक अलग चेहरा देखते हैं। हमारे लिए, पुलिस स्टेशन के अंदर बच्चों को पढ़ते देखना एक बड़ा स्ट्रेस बस्टर है।’

पुलिसकर्मियों के योगदान से चल रहा स्कूल

यह स्कूल पूरी तरह से पुलिस स्टेशन के कर्मचारियों के योगदान से चलता है। अग्रवाल ने बताया, ‘हमने जानबूझकर डोनेशन से परहेज किया है ताकि यह पहल सरल और पारदर्शी बनी रहे।’ तीन शिक्षकों में से एक एक बुजुर्ग पूर्व स्कूल टीचर हैं, जिन्हें उनके परिवार ने छोड़ दिया था और वे पास के एक ओल्ड एज होम में रहते हैं। अग्रवाल ने कहा, ‘इस स्कूल ने उन्हें फिर से गरिमा और उद्देश्य दिया है।’

तीन बैचों में लग रहीं क्लास

यहां तीन बैचों में क्लासें लगती हैं, ज़्यादातर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए। अग्रवाल ने बताया, ‘हर दिन, हम 15 मिनट की इंग्लिश स्पीकिंग क्लास लेते हैं, और हर रविवार को हम पर्सनैलिटी डेवलपमेंट क्लास आयोजित करते हैं।’ उन्होंने कहा कि यह एक छोटी सी पहल है, जो धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। टीचर आयुष अवस्थी ने बच्चों में आए बदलाव पर गर्व जताया और इसे अविश्वसनीय बताया।

बेसिक अंग्रेजी बोलना सीखे बच्चे

उन्होंने कहा, ‘कुछ बच्चे तो अक्षर भी नहीं लिख पाते थे। अब वे बेसिक इंग्लिश बोल सकते हैं और आत्मविश्वास से भाग लेते हैं।’ अनन्या मिश्रा जैसी छात्राओं के लिए यह स्कूल एक खुशहाल जगह बन गया है। वह कहती हैं कि मुझे यहां आना बहुत पसंद है। यह मेरी पढ़ाई में मदद करता है। कुल मिलाकर जहां कानून और व्यवस्था बनाए रखने का काम होता है, वहीं अब हर शाम विश्वास, सीखने और उम्मीद के सबक सिखाए जा रहे हैं।

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