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नए निर्यात बाजार तलाशना जरूरी

उम्मीद करें कि 5 जनवरी को ट्रंप के द्वारा दी गई टैरिफ बढ़ाने की धमकी के बीच भारत के द्वारा नए निर्यात बाजारों की तलाश और एफटीए के साथ निर्यात की नई रणनीति भारत की निर्यात चुनौतियों को कम करने में कारगर भूमिका निभाएगी…

यद्यपि इस समय भारत पर अमेरिका के द्वारा 50 फीसदी टैरिफ होने से भारत से अमेरिका को निर्यात में कमी आई है और अब ट्रंप के द्वारा रूस पर प्रतिबंध वाले बिल के आधार पर भारत पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाए जाने की चुनौती सामने है। पिछले साल अगस्त 2025 से अब तक अमेरिका में भारतीय उत्पादों- गारमेंट, लैदर, जेम्स व ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स के निर्यात की वृद्धि दर घटी है। ऐसे में अमेरिका के बाजार में प्रभावित होने वाले निर्यात की भरपाई के लिए जहां वर्ष 2026 में मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के तहत निर्यात बढ़ाने होंगे, वहीं नए निर्यात बाजारों की तलाश करते हुए वैकल्पिक बाजार के रूप में भारत के द्वारा चिन्हित दुनिया के 200 बाजारों में निर्यात बढ़ाने की रणनीति के साथ आगे बढऩा होगा। इस समय देश और दुनिया में रेखांकित हो रहा है कि भारत के एफटीए इस समय ट्रंप की टैरिफ चुनौतियों के बीच भी भारत से अमेरिका को छोडक़र अन्य देशों में निर्यात बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं अब नए वर्ष 2026 में कई देशों के साथ एफटीए के आकार लेने से भारत का निर्यात तेजी से बढ़ेगा। भारत द्वारा किए गए विभिन्न एफटीए से पेशेवर सेवाओं के तहत साफ्टवेयर इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, आर्किटेक्ट जैसी पेशेवर सेवाओं पर कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं से भारतीय पेशेवरों के लिए वैश्विक अवसर खुलेंगे और पेशेवर सेवाओं का निर्यात भी बढ़ेगा। गौरतलब है कि विगत 22 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच एफटीए की घोषणा की है।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर कहा कि भारत-न्यूजीलैंड की साझेदारी नई ऊंचाइयों पर पहुंचने वाली है और इस एफटीए से अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने में मदद मिलेगी। इस एफटीए के तहत न्यूजीलैंड में 100 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर शून्य शुल्क सुनिश्चित किया गया है। साथ ही न्यूजीलैंड ने भारत में अगले 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर के एफडीआई की प्रतिबद्धता भी जताई है। दूसरी ओर भारत भारत ने न्यूजीलैंड के 70 प्रतिशत उत्पादों के लिए शुल्क में कमी की पेशकश की है, जो 95 प्रतिशत द्विपक्षीय व्यापार मूल्य को शामिल करती है। इस एफटीए का अत्यधिक मजबूत पक्ष भारत से सेवा निर्यात बढ़ाना और भारत से पेशेवरों को न्यूजीलैंड में अच्छे अवसरों के लिए आगे बढ़ाना भी है। यह एफटीए भारत की प्रतिभाओं, स्टार्टअप्स और नवाचार के लिए एक मजबूत बुनियाद प्रदान करता है। यह एफटीए भारत के लिए सबसे प्रमुख सेवाओं की ऐसी पेशकश करता है, जो अब तक किसी भी पिछले एफटीए में शामिल नहीं हैं। भारत-न्यूजीलैंड एफटीए के महज चार दिन पहले 18 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक की मौजूदगी में मस्कट में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ओमान के उनके समकक्ष कैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ ने एफटीए पर हस्ताक्षर किए हैं। इस एफटीए को आधिकारिक तौर पर समग्र आर्थिक भागीदारी समझौता (सीपा) कहा गया है। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि भारत-ओमान एफटीए के तहत भारत के 98 प्रतिशत निर्यात को ओमान के बाजार में शून्य पर पहुंच मिलेगी। इसमें ओमान को होने वाले 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात शामिल हैं।

इस समझौते से भारत के कपड़ा, रत्न-आभूषण, दवाई, वाहन, कृषि उत्पाद और चमड़ा उद्योग को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। यह बात महत्वपूर्ण है कि मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ऑस्ट्रेलिया के साथ किए गए एफटीए की प्रगति से संबंधित जो नए आंकड़े प्रकाशित हुए हैं, उनके मुताबिक जहां इन देशों के साथ व्यापार तेजी से बढ़ा है, वहीं इन देशों में निर्यात भी बढ़ रहे हैं। और इन देशों से भारत में अधिक निवेश प्राप्त हो रहा है। एक अक्टूबर से भारत और चार यूरोपीय देशों आइसलैंड, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और लिकटेंस्टाइन के समूह यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) के बीच एफटीए लागू हो गया है और एफ्टा देशों को निर्यात बढऩे लगे हंै। इसी तरह अब 2026 में भारत के द्वारा ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ किए गए एफटीए लागू हो जाएंगे। इतना ही नहीं, वर्ष 2026 में अमेरिका, यूरोपीय यूनियन, पेरू, चिली, आसियान, मैक्सिको, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, इजराइल, भारत गल्फ कंट्रीज काउंसिल सहित अन्य प्रमुख देशों के साथ भी एफटीए आकार लेते हुए दिखाई देंगे। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 5 दिसंबर को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई 23वीं भारत-रूस शिखर बैठक में भारत के 2030 तक द्विपक्षीय कारोबार 64 से बढ़ाकर 100 अरब डालर किया जाना सुनिश्चित करते हुए भारत-रूस एफटीए के लिए वार्ता तेजी से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। ऐसे में भारत के द्वारा द्विपक्षीय व्यापार और एफटीए के अधिकतम लाभ लेने और विकास की नई संभावनाओं को साकार करने के लिए 1 अप्रैल 2026 से लागू किए जाने वाले नए श्रम कानून मील का पत्थर साबित होते हुए दिखाई दे सकेंगे। नए श्रम कानून के तहत चार श्रम संहिताएं- मजदूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता 2020 शामिल हैं।

नई श्रम संहिताओं से देश दुनिया में सेवा क्षेत्र के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की डगर पर तेजी से आगे बढ़ सकेगा। इन सबके साथ-साथ नए श्रम कानून भारत के एफटीए में जान फूंकते हुए दिखाई दे सकेंगे। इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि वैश्विक व्यापार की चुनौतियों के बीच भारत से निर्यात बढ़ाना कोई सरल काम नहीं है। ऐसे में भारत के द्वारा निर्यात बढ़ाने के लिए चिन्हित किए गए करीब 200 देशों में निर्यात की नई रणनीति के साथ आगे बढऩा होगा। इस बात को ध्यान में रखना होगा कि निर्यात को गति देने के लिए मार्केट एक्सेस सपोर्ट के साथ संरचनात्मक सुधार भी जरूरी हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने निर्यात बढ़ाने के मद्देनजर 4531 करोड़ रुपए की जो मार्केट एक्सेस सपोर्ट योजना घोषित की है, वह अत्यधिक लाभदायक कदम है। इस समय भारतीय निर्यातकों को धीमी होती वैश्विक मांग के साथ भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसे में नई निर्यात योजना के तहत खरीददार-विक्रेता मुलाकात, व्यापार मेलों और बाजार विविधीकरण जैसी रणनीतियां नए बाजार तलाश करने में लाभप्रद हैं। हमें इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि निर्यातकों की दिक्कतें केवल शुल्क वृद्धि तक सीमित नहीं हैं वरन उन पर लगाए गए एंटी-डंपिंग शुल्क से भी संबंधित है। घरेलू कच्चे माल की ऊंची लागत और ईंधन की उच्च कीमतों के कारण भी भारत के द्वारा निर्यात किए जाने वाले उत्पाद वैश्विक स्तर से करीब 20 फीसदी की अधिक लागत पर दिखाई देते हैं। निर्यात बढ़ाने के लिए सभी राज्यों में मान्यता प्राप्त आधुनिक प्रयोगशालाएं भी जरूरी हैं। इससे लागत और समय की बचत के साथ लॉजिस्टिक की बाधाएं कम होती हैं। ऐसे में अब निर्यात बढ़ाने के लिए बाजार तक पहुंच सहयोग के साथ-साथ लॉजिस्टिक लागत में कमी, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, अधिक विश्वसनीय कच्चे माल, कम ऊर्जा लागत, अधोसंरचना और गंतव्य निर्यात बाजारों के साथ नियामकीय समन्वय स्थापित किया जाना भी जरूरी है। उम्मीद करें कि 5 जनवरी को ट्रंप के द्वारा दी गई टैरिफ बढ़ाने की धमकी के बीच भारत के द्वारा नए निर्यात बाजारों की तलाश और एफटीए के साथ निर्यात की नई रणनीति भारत की निर्यात चुनौतियों को कम करने में कारगर भूमिका निभाएगी और इससे भारत 2026 में 6.5-7 प्रतिशत विकास दर के साथ तेजी से आगे बढ़ते हुए दिखाई देगा।

डा. जयंती लाल भंडारी

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