BJP-कांग्रेस गठबंधन, होटल पॉलिटिक्स फिर सभा में चलीं जमकर चप्पल, अंबरनाथ नगर परिषद में एकनाथ शिंदे का कब्जा

मुंबई : अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता संघर्ष आखिरकार अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया, जहां जबरदस्त राजनीतिक उठापटक, होटल पॉलिटिक्स और खुले टकराव के बीच शिव सेना ने एक बार फिर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए बीजेपी को करारा झटका दिया। नगर परिषद के उप-नगराध्यक्ष पद के चुनाव में शिव सेना महायुति के उम्मीदवार सदामामा पाटील ने जीत दर्ज कर सत्ता में प्रभावी वापसी की है। इससे पहले सदन में जमकर झगड़ा हुआ। चप्पलें तक चलीं।
हालिया नगर परिषद चुनावों में शिव सेना 27 नगरसेवकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसे 50% से अधिक मत मिले थे। इसके बावजूद प्रत्यक्ष रूप से हुए नगराध्यक्ष पद के चुनाव में बीजेपी ने जीत हासिल कर ली।
ऐसे बना अंबरनाथ विकास आघाडी
हालांकि, नगर परिषद में केवल 15 नगरसेवकों के दम पर बीजेपी को सत्ता संतुलन साधने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बहुमत जुटाने के लिए बीजेपी ने कांग्रेस के 12 नगरसेवकों, एनसीपी (अजित गुट) गुट के चार नगरसेवकों और एक निर्दलीय को साथ लेकर अंबरनाथ विकास आघाडी का गठन किया। यह गठबंधन बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए असहज साबित हुआ और कांग्रेस ने अपने 12 नगरसेवकों को पार्टी से निलंबित कर दिया, जिसके बाद वे बीजेपी में शामिल हो गए।
32 वोटों से जीता महायुति उम्मीदवार
मतदान के दिन नगर परिषद परिसर में भारी हंगामा और नारेबाजी के बीच चुनाव संपन्न हुआ। आखिरकार, शिव सेना महायुति के पाटील को 32 वोट मिले, जबकि बीजेपी समर्थित उम्मीदवार को 28 वोटों से संतोष करना पड़ा। जीत के बाद शिव सेना खेमे में जश्न का माहौल रहा। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, एकनाथ और श्रीकांत शिंदे के संसदीय क्षेत्र में आने वाले इस शिव सेना गढ़ को हासिल करने की बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की कोशिश नाकाम रही, जबकि श्रीकांत अपने गढ़ को बचाने में सफल रहे।
शिव सेना ने इस तरह पलट दी पूरी बाजी
बीजेपी को लगा कि अब नगर परिषद में सत्ता का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन इसी दौरान कल्याण के सांसद और उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे ने राजनीतिक मोर्चा संभालते हुए बाजी पलट दी। उन्होंने बीजेपी समर्थित गुट में शामिल एनसीपी (अजित गुट) के चारों नगरसेवकों को पहले उस गुट से बाहर आने के लिए तैयार किया और फिर शिव सेना, एनसीपी और एक निर्दलीय को साथ लेकर ‘शिव सेना महायुति अंबरनाथ’ नाम से नया बनाया। इस नए समीकरण के साथ शिव सेना महायुति के पास 32 नगरसेवकों का स्पष्ट बहुमत हो गया।
एक बार फिर दिखी ‘होटल पॉलिटिक्स’
उप-नगराध्यक्ष पद के चुनाव से पहले बीजेपी ने अपने गुट से विप जारी कर सभी सदस्यों को एकजुट रहने का निर्देश दिया और नियम के उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी दी। वहीं, शिव सेना ने गुट गठन से जुड़े कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए अपने कदम को पूरी तरह वैध बताया। संभावित टूट से बचने के लिए दोनों पक्षों ने अपने-अपने नगरसेवकों को अलग-अलग स्थानों पर ठहराया, जिससे ‘होटल पॉलिटिक्स’ एक बार फिर चर्चा में रही।
जमकर चलीं चप्पल
अंबरनाथ नगर परिषद की आम सभा की बैठक में सोमवार को उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना के पार्षदों के बीच तीखी बहस के बाद अफरा-तफरी मच गई। भाजपा ने सोमवार की कार्यवाही के दौरान एवीए के सभी घटकों को उसके उम्मीदवार प्रदीप पाटिल के पक्ष में मतदान करने के लिए व्हिप जारी किया। हालांकि, NCP ने शिवसेना के स्थानीय विधायक डॉ. बालाजी किनीकर के नेतृत्व में व्हिप को ठुकरा दिया और किनीकर ने घोषणा की कि ‘एवीए का अब अस्तित्व नहीं है।’ शिवसेना ने एनसीपी के सदाशिव पाटिल को उपाध्यक्ष पद के लिए नामित किया था। बैठक में दोनों समूहों के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। भाजपा के नाराज पार्षदों को चप्पलें लहराते और शिवसेना उम्मीदवार पर चिल्लाते हुए देखा गया।




