अब ग्रीनलैंड को लेकर अमरीकी प्राणायाम

अमरीका ने कुछ वर्ष पहले दुनिया भर में मानवीय अधिकारों की रक्षा करने की ठेकेदारी स्वयं ही अपने नाम घोषित कर दी थी। उस हिसाब से उसे चाहिए तो यह था कि वह ग्रीनलैंड को डेन लोगों के कब्जे से छुड़ा कर उनको अपना स्वतंत्र राज्य स्थापित करने में मदद करता। लेकिन उसने उसे अपने कब्जे में लेने का निर्णय कर लिया। अब वह अपनी संसद में कुछ उसी प्रकार का विधान पास करवा रहा है जो उसे ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अनुमति दे। इतिहास में कभी इसी प्रकार का विधान डेनमार्क ने भी अपनी संसद में पास करवाया ही होगा। लेकिन अमरीका ग्रीनलैंड को डेनों के कब्जे से छुड़ाकर उनकी स्वतंत्रता वापस दिलवाने की कोशिश क्यों नहीं करता…
ग्रीनलैंड की कहानी भी अनोखी है। इसलिए भी क्योंकि अमरीका के राष्ट्रपति ने वेनेजुएला पर कब्जे के उपरांत अब ग्रीनलैंड पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं। वेनेजुएला का स्वयं को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित करने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को लेकर कुछ छिटपुट कानूनी विधि विधान भी तैयार करने शुरू किए हैं। अमरीकी संसद में कुछ इस प्रकार का विधेयक भी रखा जाने वाला है जो अमरीका को ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेने का अधिकार दे देगा। अमरीका स्वयं ही अमरीका को एक तीसरे देश पर कब्जा करने का अधिकार देगा। एक बार फिर पुरानी कहावत को दोहराने की जरूरत है। जिसकी लाठी उसकी भैंस। अब थोड़ा ग्रीनलैंड के बारे में भी। भौगोलिक लिहाज से ग्रीनलैंड अमरीकी महाद्वीप का हिस्सा है। इस विशाल महाद्वीप पर यूरोप की विभिन्न जातियों ने कब्जा कर लिया था। इस महाद्वीप पर रहने वाले लोगों को इंडियन कहा जाता था क्योंकि यह माना जाता है कि आज से लगभग पन्द्रह बीस हजार साल पहले ये लोग एशिया/जम्बूद्वीप से हिजरत करके यहां पहुंचे थे। यह कहानी भी प्रचलित है कि जब पन्द्रहवीं शताब्दी में कोलम्बस यहां पहुंचा तो उसने इनको एशिया मूल होने के कारण इंडियन कहा। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि कोलम्बस जब अमरीका द्वीप में पहुंचा तो उसको धोखा लगा कि वह इंडिया पहुंच गया, इसलिए इन लोगों को इंडियन कहा जाने लगा। आजकल इन लोगों को भारतीयों से अलग बताने के लिए इन्हें नेटिव इंडियन कहा जाता है। कोलम्बस के बाद सत्रहवीं शताब्दी में इंग्लैंड से लोगों ने खासकर उत्तरी अमरीका आना शुरू कर दिया और यहां बस्तियां बसाईं। बताते हैं कि उसके बाद फ्रांस के लोग भी आए।




