फडणवीस गुस्सा, फिर भी ‘इस’ जिले में BJP-AIMIM और कांग्रेस का गठबंधन

अमरावती : महाराष्ट्र में नगरपालिका चुनाव रिजल्ट के बाद राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। अमरावती जिले की सबसे बड़ी अचलपुर म्युनिसिपल काउंसिल के चुनाव में चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन के पदों के लिए बीजेपी ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और कांग्रेस से गठबंधन किया है। इससे पहले अकोला जिले की अकोट म्युनिसिपल काउंसिल में बीजेपी-एमआईएम गठबंधन का एक्सपेरिमेंट किया गया था। हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ किया था कि एआईएमआईएम के साथ गठबंधन नहीं चाहिए और कार्रवाई की चेतावनी दी थी। दरअसल अचलपुर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इसके बाद यह त्रिपक्षीय समझौता हुआ।
अचलपुर में किसको कितनी सीट?
पिछले दिनों अचलपुर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में 41 सदस्यीय नगर परिषद में कांग्रेस ने 15 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को नौ, एआईएमआईएम को तीन, निर्दलीयों को 10, प्रहार जनशक्ति पार्टी को दो और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को दो सीटें मिली थीं। इस तालमेल के बाद एआईएमआईएम के एक पार्षद को शिक्षा एवं खेल समिति का अध्यक्ष निर्विरोध चुना गया। इसी तरह कांग्रेस के एक सदस्य को जलापूर्ति समिति का अध्यक्ष बनाया गया, जबकि बीजेपी के एक पार्षद को महिला एवं बाल कल्याण समिति की कमान सौंपी गई।
बीजेपी विधायक ने क्या बताया?
अचलपुर से बीजेपी विधायक प्रवीण तयाडे ने मीडिया से कहा कि इस तालमेल के लिए उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया। उन्होंने बताया कि स्थानीय निकाय चुनावों में उन्हें केवल वार्ड संख्या एक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बीजेपी और एआईएमआईएम के बीच तालमेल को लेकर पूछे गए सवाल पर तयाडे ने कहा कि मैं हिंदुत्व विचारधारा वाला विधायक हूं और हमारी पार्टी भी हिंदुत्व की विचारधारा पर काम करती है, इसलिए मैं ऐसा कभी नहीं कर सकता। हालांकि, इस मामले में पार्टी के वरिष्ठ नेता जो भी निर्णय लेंगे, हम उसे स्वीकार करेंगे।
अकोट-अंबरनाथ में क्या हुआ था?
राज्य में पिछले दिनों हुए स्थानीय निकाय चुनावों के बाद बीजेपी ने अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में एआईएमआईएम के साथ गठजोड़ किया था लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की फटकार के बाद इसे खत्म कर दिया गया। वहीं, अंबरनाथ नगर परिषद में शिवसेना को सत्ता से दूर रखने के लिए बीजेपी और कांग्रेस ने हाथ मिलाया। इस कदम के बाद कांग्रेस ने अपने सभी 12 पार्षदों को निलंबित कर दिया था, हालांकि वे बाद में भाजपा में शामिल हो गए।




