पैरों को नमक वाले पानी में डालते ही शुरू होता है डिटॉक्स, आयुर्वेद ने बताए फायदे

आयुर्वेद के अनुसार पाद-स्नान, यानी पैरों को गुनगुने नमक वाले पानी में डालकर कुछ देर बैठना, शरीर और मन दोनों को आराम देने वाला अभ्यास है.
कई बार ऐसा लगता है कि शरीर में एनर्जी ही नहीं बची. इस थकान का असर सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दिमाग और मन भी इससे प्रभावित हो जाते हैं. ऐसे में लोग दवाइयों का सहारा लेने लगते हैं, जबकि आयुर्वेद में इसका एक बहुत ही सरल और प्राकृतिक उपाय बताया गया है. आयुर्वेद के अनुसार पाद-स्नान, यानी पैरों को गुनगुने नमक वाले पानी में डालकर कुछ देर बैठना, शरीर और मन दोनों को आराम देने वाला अभ्यास है.इसे शाम के समय करने से दिन भर की थकान धीरे-धीरे दूर होने लगती है और एक तरह से शरीर का डिटॉक्स शुरू हो जाता है.
जब पैरों को गुनगुने नमक पानी में डाला जाता है, तो शरीर की नसें धीरे-धीरे शांत होने लगती हैं. इससे मांसपेशियों में जकड़न कम होती है और दिन भर का भारीपन उतरने लगता है. कमर, पैरों और शरीर के हल्के दर्द में भी आराम महसूस होता है.
पाद-स्नान सिर्फ शरीर को ही नहीं, मन को भी सुकून देता है. नमक और गुनगुने पानी का असर तंत्रिका तंत्र पर पड़ता है, जिससे मन की बेचैनी कम होती है. तनाव, चिड़चिड़ापन और घबराहट में धीरे-धीरे कमी आने लगती है.
अगर आपको रात में नींद नहीं आती या बार-बार नींद टूट जाती है, तो पाद-स्नान बहुत फायदेमंद हो सकता है. यह शरीर को रिलैक्स करता है और दिमाग को शांत संकेत देता है, जिससे नींद जल्दी आती है और नींद की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.
पाद-स्नान के बाद शरीर में एक अलग ही हल्कापन महसूस होता है. ऐसा लगता है जैसे दिन भर का बोझ उतर गया हो, यह अभ्यास शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करता है, जिससे थकावट कम होती है और ताजगी महसूस होती है.
नमक को आयुर्वेद में संतुलन बनाने वाला तत्व माना गया है. जब नमक पानी के साथ पैरों के संपर्क में आता है, तो यह मन की बेचैनी को शांत करने में मदद करता है. इससे नाड़ियां शांत होती हैं और दिमाग को आराम मिलता है.
नियमित रूप से पाद-स्नान करने से मन अधिक स्थिर रहता है. इससे ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है और नकारात्मक विचार कम होते हैं. आयुर्वेद के अनुसार यह अभ्यास शरीर में हैप्पी हार्मोन को बढ़ाने में भी मदद करता है, जिससे मन अच्छा रहता है.




