मध्यप्रदेश

आरोपी जज सास के खिलाफ जांच, बेटे समर्थ की बेल पर हाई कोर्ट में सुनवाई आज

भोपाल. मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब केवल दहेज प्रताड़ना या पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रह गया है. जांच की दिशा अब सीधे प्रशासनिक और संस्थागत जवाबदेही की तरफ बढ़ती दिख रही है. खाद्य एवं नागरिक उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत के आदेश के बाद पूर्व जज और वर्तमान भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष गिरीबाला सिंह के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. यह कार्रवाई उस समय हुई है जब ट्विशा के परिवार ने लगातार आरोप लगाया कि उनकी बेटी मानसिक प्रताड़ना और दबाव में थी. परिवार पहले ही इस मामले में निष्पक्ष जांच और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग उठा चुका है. अब शासन स्तर पर शुरू हुई जांच ने इस केस को और हाई प्रोफाइल बना दिया है. सरकारी पत्र में उपभोक्ता संरक्षण नियम 2020 के तहत कार्रवाई का उल्लेख होने से यह संकेत भी मिल रहा है कि जांच केवल औपचारिक नहीं बल्कि सेवा आचरण और पद पर बने रहने की पात्रता तक पहुंच सकती है.

मामले में सबसे बड़ा सवाल अब उन घटनाओं पर उठ रहा है जो 12 मई से 20 मई 2026 के बीच हुईं. ट्विशा के परिवार ने भोपाल अदालत में आवेदन देकर आरोपी समर्थ सिंह और उनकी मां गिरीबाला सिंह से जुड़े मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR निकलवाने की मांग की है. साथ ही एम्स भोपाल की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की अपील भी की गई है. परिवार का कहना है कि मौत के बाद अस्पताल और पुलिस प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे घटनाक्रम हुए जिनकी सच्चाई डिजिटल रिकॉर्ड से सामने आ सकती है. जांच एजेंसियों के लिए अब मोबाइल लोकेशन, कॉल पैटर्न, अस्पताल मूवमेंट और इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन बेहद अहम माने जा रहे हैं. यही वजह है कि अदालत में दिए गए आवेदन को केस की दिशा बदलने वाला कदम माना जा रहा है. यदि कोर्ट रिकॉर्ड संरक्षित करने के आदेश देती है तो आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बड़ा हो सकता है.

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