अपने-अपने मुद्दे, अपने-अपने खुदा: सियासत और मीडिया में किसकी चल रही है?

हर दिन एक मुद्दा पकड़े रहो, सत्ता को रगड़े रहो, मीडिया में छाए रहो..! ऐसे में सत्ता क्या ओढ़े, क्या बिछाए और क्या बचाए? ‘पैलेट गन’ किसने चलाई? चलाई, तो वह जिम्मेदार… न चलाई, तो भी जिम्मेदार..! जिम्मेदार को जाना होगा… वरना संसद नहीं चलेगी..! सत्ता ने कहा, चलने दो संसद को, बात होने दो और बिलों पर चर्चा होने दो। संसद से पहले सबकी हां, लेकिन संसद में ना! सत्ता हैरान- देखिए आप गोल-पोस्ट बदल रहे हैं। तय कुछ और हुआ था, कर कुछ और रहे हैं।
आप ‘गोल पोस्ट’ बदल रहे हैं और अब तो ‘गोल पोस्ट’ ही गायब कर दी। ऐसे कैसे चलेगी संसद? आधी संसद बाहर, आधी संसद अंदर। अंदर ‘इस्तीफा-इस्तीफा’, तो बाहर भी ‘इस्तीफा-इस्तीफा’। वे जनतंत्र तोड़ रहे हैं… हम तो बचा रहे हैं जी..! जनतंत्र बच रहा है, जनतंत्र बचाया जा रहा है… जनतंत्र बचा-बचा घूम रहा है..! चर्चा जारी- एक महर्षि कह चुके हैं कि सरकार सड़क से चलेगी, संसद से नहीं! यही होता दिख रहा है सर जी!
ये ‘फ्लैश धरने’ के दिन हैं! पैलेट गन-पीड़ित की एफआइआर लिखानी है। संसद मार्ग थाने पर समर्थकों के साथ विपक्ष के नेता पहुंचते हैं और सड़क पर धरना देकर बैठ जाते हैं। ‘हजरते दाग जहां बैठ गए बैठ गए..!’ मीडिया में ‘हाय हाय’ कि ईब के होगा? नेता जी की चेतावनी कि अब तभी उठेंगे, जब एफआइआर लिख ली जाएगी। अफसरों की मीटिंग पर मीटिंग… फिर आठ घंटे बाद किन्हीं अनाम के नाम ‘एफआइआर’! जीत की चमक चेहरे पर… जिंदाबाद-जिंदाबाद होता है… ये न्याय का पहला कदम है..!
एक प्रवक्ता- ‘झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए’। फिर एक पोस्टर में ‘जननायक’ का अवतार..! कहां तो तेजी से काम करने वाली सरकार और कहां ऐसी ‘लेट लतीफी’! विपक्ष चुस्त, सरकार सुस्त! जो एफआइआर पांच मिनट में लिखी जा सकती थी, आठ घंटे बाद लिखी जाती है। सत्ता की फजीहत, लेकिन ‘नो नसीहत’! विपक्ष ने ‘नस’ पकड़ ली है। अचानक कार्रवाई। पहले न बताओ, फिर धरने पर बैठ जाओ। सरकार सचमुच सड़क से चलती दिखती है। आप लाख आरोप लगाएं कि यह सब सस्ती लोकप्रियता के लिए किया जा रहा है, मगर अब सस्ती हो या महंगी… आपकी नाक में दम तो किए ही हुए हैं।
एक दिन दो हीरोइनें ‘वंदे मातरम्’ पर भिड़ जाती हैं। एक कहती हैं, पूरा क्यों गाएं… दूसरी कहती है कि पूरा ही गाना है, नहीं तो कानून की अवमानना है। चैनल ले उड़ते हैं। एक मरी हुई बहस जिंदा हो उठती है। ‘ईगो’ का अड़ना और लड़ना जारी रहता है। कौन कितना ‘देशभक्त’… कौन कितना ‘अभक्त’… संविधान क्या कहता है, क्या नहीं कहता है..! इस बीच 2027 के चुनावों के लिए तैयारी। उत्तर प्रदेश के विपक्षी नेता अर्थशास्त्र करने लगते हैं कि ‘पी’ माने ‘पंडित’, सत्ता प्रवक्ता बताने लगते हैं कल तक ‘पी’ का मतलब कुछ और था अब कुछ और।
फिर विपक्ष के नेता की ‘गूंज’ मीडिया में ‘गूंजने’ लगती है। विपक्ष के नेता एक नए ‘रॉकस्टार’ अवतार में… सामने जेन-जी, अल्फा, बीटा मस्त और मंच पर ‘रॉकस्टार’ मस्त। कृत्रिम फुहारे रोशनी फेंकते हैं। चमकीली पन्नियों की बरसात होती है… और ‘मनुस्मृति’ पिटती है कि बचपन में पिता, युवावस्था में पति, फिर वृद्धावस्था में पुत्र स्त्री की रक्षा करेगा। यानी महिला कभी आजाद नहीं हो सकती! पितृसत्ता को नष्ट करो..! एक ने ‘बैटमैन’ के अवतार में नीचे लिखा- ‘अ साइलेंट केअरटेकर’, यानी ‘एक खामोश रखवाला’। फिर दक्षिण से नारा आता है- ‘आज का मुख्यमंत्री, कल का प्रधानमंत्री’ …तभी विपक्षी दल के एक नेता होड़ में यह नारा देता है- ‘आज विपक्ष के नेता, कल के प्रधानमंत्री।’
कैसा सौभाग्य कि एक ही वक्त में तीन-तीन प्रधानमंत्री। एक वर्तमान प्रधानमंत्री और दो ‘भावी प्रधानमंत्री’ एकदम रेडीमेड..! सच! हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश में दम निकले! बहरहाल, ‘यहां की बतियां, यहां पे छोड़ें, वहां की बतियों पर ध्यान लगाएं।’ एक दिन एक हाई कोर्ट की व्यवस्था कि ‘हिजाब इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं।’ तुरंत मौलवी लोग और कई इस्लामिक नेता उबलते दिखे कि ये हमारे धर्म में हस्तक्षेप है। फिर आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला कि आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नहीं है। कई चैनलों पर चर्चा कि ‘क्रीमी लेअर’ कब तक?
अंत में ‘दो हीरोइनों’ के बीच ‘परंपरा का सम्मान व अपमान’ पर तकरार। राखी का अवसर। एक ‘ब्रांड आभूषण कंपनी’ का विज्ञापन- बिकनी पहने एक हीरोइन अपने भाई को राखी बांधती हुई, साथ में पालतू कुत्ते को भी राखी दिखाती हुई। इसे देख परंपरावादियों की ‘नैतिकता’ खतरे में। ‘परंपरा’ खतरे में… लेकिन ज्यों ही एक हीरोइन ने विज्ञापन पर ‘रक्षाबंधन’ जैसे पवित्र हिंदू त्योहार की अवमानना करने का, भाई बहन के संबंध को हल्का करने का आरोप लगाया, त्यों ही शाम तक विज्ञापन वापस।
ऐसे ही घमासान में एक बाबाजी भी कूद पड़े, लेकिन जैसे ही चर्चित हीरोइन ने आज के ‘उपभोक्तावाद’ का कोड़ा भांजा वैसे बाबा की बोलती बंद! इन दिनों कोई किसी की नहीं सुनता, सब अपने-अपने खुदा हैं।-सुधीश पचौरी




