
नई दिल्ली: भारत आज एक ऐसा इतिहास रचने जा रहा है, जिसके बाद अमेरिका इस रेस में भारत से पीछे छूट सकता है और हम चीन की बराबरी में जाकर खड़े हो जाएंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज ऑर्बिटएड का 25 किलोग्राम का आयुलसैट PSLV-C62 रॉकेट से लॉन्च करेगा। इस मिशन की सफलता के साथ ही भारत ऑन-ऑर्बिट सैटेलाइट रिफ्यूलिंग दिखाने वाला दुनिया का दूसरा देश बनने के एक कदम और करीब पहुंच जाएग। यह क्षमता अब तक सिर्फ चीन के पास होने का दावा किया जाता है।
दरअसल, पिछले साल चीन ने भी ऐसा ही एक प्रदर्शन किया था, लेकिन उसकी जानकारी दुनिया में सीमित ही है। इस पर आधिकारिक खुलासे भी कम हुए हैं। अमेरिका समेत किसी भी दूसरे स्पेस ट्रैवल करने वाले देश ने ऑर्बिट में इस टेक्नोलॉजी का सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन नहीं किया है। हालांकि, अमेरिकी कंपनी एस्ट्रोस्केल एक रिफ्यूलिंग टेक्नोलॉजी डेवलप कर रही है, लेकिन इसे अभी लॉन्च नहीं किया गया है।
इंटरनल री-फ्यूलिंग पर फोकस
हालांकि, अयुलसैट पूरी तरह से ऑन-ऑर्बिट री-फ्यूलिंग नहीं दिखाएगा। इसे स्पेस एनवायरनमेंट में फ्यूल ट्रांसफर को वैलिडेट करने के लिए एक टारगेट सैटेलाइट के तौर पर डिजाइन किया गया है। दो स्पेसक्राफ्ट वाले ज्यादा कॉम्प्लेक्स सर्विसिंग मिशन के उलट, ऑर्बिटएड का पहला कदम एक ही सैटेलाइट के अंदर इंटरनल री-फ्यूलिंग पर फोकस करता है, जिससे इंजीनियर यह स्टडी कर सकें कि असली ऑर्बिटल कंडीशन में माइक्रोग्रैविटी में फ्लूइड्स कैसे बिहेव करते हैं। ऑर्बिटएड के फाउंडर और CEO शक्ति कुमार आर ने हमारे सहयोगी TOI को बताया कि पहली री-फ्यूलिंग लॉन्च के चार घंटे के अंदर होने की उम्मीद है।
14 दूसरे अपग्रह भी जाएंगे स्पेस में
बता दें कि इस साल के पहले मिशन के जरिये इसरो पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के साथ-साथ 14 अन्य सह उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करेगा। इसरो की वाणिज्यिक शाखा, न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) के लिए भेजे जा रहे इस मिशन में 14 घरेलू और विदेशी उपग्रहों को कक्ष में स्थापित किया जाएगा। इसरो ने बताया कि 260 टन के भार वाले पीएसएलवी-सी62 रॉकेट का लॉन्च आज 10.18 बजे किया जाएगा।
स्पेनिश स्टार्टअप का कैप्सूल भी शामिल
लॉन्च के लगभग 17 मिनट बाद 13 अन्य उपग्रहों को सूर्य-समकालिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इसके बाद, रॉकेट के चौथे चरण (पीएस4) के अलग होने और स्पेनिश स्टार्टअप से संबंधित लगभग 25 किलोग्राम वजनी केस्ट्रेल इनिशियल टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर (केआईडी) कैप्सूल स्थापित होगा। ऐसा प्रक्षेपण के दो घंटे से अधिक समय बाद होने की उम्मीद है। इसरो के मुताबिक, वैज्ञानिक रॉकेट के चौथे चरण को फिर से प्रणोदित करेंगे, ताकि केआईडी कैप्सूल को पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करते हुए प्रदर्शित किया जा सके।




