मध्यप्रदेश

इंदौर में पानी से फैली बीमारी महामारी घोषित, 15 से ज्यादा मौत, नर्मदा लाइन की सप्लाई रोकी

इंदौर: पानी से फैलने वाली बीमारी को अब इंदौर में महामारी घोषित कर दिया गया है। रविवार को स्वास्थ्य प्रशासन ने भगीरथपुरा इलाके में फैली इस बीमारी को महामारी का दर्जा दिया है। इस बीमारी से अब तक 15 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। केंद्र और राज्य सरकार की विशेष टीमें इस बीमारी को फैलने से रोकने और पानी में गंदगी की जड़ का पता लगाने के लिए बुलाई गई हैं।

इसलिए घोषित हुई महामारी

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव हसनानी ने बताया, ‘किसी खास इलाके में सामान्य से ज़्यादा बीमारी के मामले आने पर उसे महामारी घोषित किया जाता है। हम इसी पैमाने पर इस फैलाव को देख रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर की ये टीमें हमारे सर्वे के डेटा का विश्लेषण कर रही हैं ताकि पता चल सके कि पानी में गंदगी एक ही जगह से आई है या कई जगहों से।’

पाइपलाइन लीक होने से फैला डायरिया

इंदौर, जो कि सबसे साफ शहरों में गिना जाता है, अब पानी में गंदगी की मार झेल रहा है। लैब टेस्ट में पता चला है कि डायरिया के फैलाव की वजह पाइपलाइन लीक होना है। रविवार सुबह जिला कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्मार्ट सिटी ऑफिस में एक हाई-लेवल मीटिंग बुलाई। इसमें पूरे भारत से आए विशेषज्ञों को बुलाया गया था। इनमें ICMR-NIRBI (कोलकाता) के वैज्ञानिक डॉ. प्रमित घोष और डॉ. गौतम चौधरी, नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन बैक्टीरियल इन्फेक्शन्स के डॉ. अनुभव, और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) के साथ-साथ राज्य निगरानी टीम (भोपाल) के सामुदायिक चिकित्सा और महामारी विज्ञान के विशेषज्ञ शामिल थे।

कोलकाता से आई टीम ने की जांच

कोलकाता से आई टीम ने पानी के सैंपल लिए। उन्होंने खास वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करके पता लगाया कि कौन से बैक्टीरिया पानी में फैले हैं। वर्मा ने बताया कि प्रभावित इलाके में नर्मदा नदी से पानी की सप्लाई रोक दी गई है। जब तक विशेषज्ञ पाइपलाइन को पूरी तरह से साफ घोषित नहीं कर देते, तब तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं होगी।

32 हिस्सों में बांटा गया है भगीरथपुरा

वर्मा ने विशेषज्ञों को बताया कि इस समस्या से छोटे स्तर पर निपटने के लिए भगीरथपुरा इलाके को 32 हिस्सों में बांटा गया है। हर हिस्से में खास टीमें लोगों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि सरकारी और निजी बोरवेल में क्लोरीन का इस्तेमाल ज़रूरी हो। लोगों को बेसमेंट में बने पानी के टैंक (हौज) को खाली करके साफ करने और फिर से इस्तेमाल करने से पहले प्रोफेशनल तरीके से क्लोरीन से कीटाणुरहित करने का निर्देश दिया गया है।

अफवाहों को किया खारिज

लोगों को दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर चिंता थी। इस पर वर्मा ने कहा, मैं यह साफ करना चाहता हूं कि शहर में GBS (Guillain-Barre Syndrome) का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने इस न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के इस बीमारी से जुड़े होने की अफवाहों को खारिज कर दिया। प्रशासन टैंकरों से साफ पीने का पानी पहुंचा रहा है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर क्लोरीन की बूंदें बांट रहे हैं।

मुफ्त में हो रहा इलाज

उन्होंने बताया कि कई विभागों की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। शहर के दूसरे इलाकों से भी शिकायतें मिलने पर वहां भी सैंपल लिए जा रहे हैं। बीमार लोगों का इलाज मुफ्त में किया जा रहा है। इसमें ज़रूरी इंजेक्शन और दवाएं शामिल हैं। यह इलाज पड़ोसी जिलों से बुलाए गए विशेषज्ञों की देखरेख में विभिन्न अस्पतालों में हो रहा है।

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