उस दिन आप कहां थे? बस मोबाइल की लोकेशन बता दीजिए, दिशा सालियान केस में आदित्य ठाकरे से नीलेश ओझा का सवाल

मुंबई : शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान के भेजे गए 500 करोड़ रुपए के मानहानि नोटिस को खारिज कर दिया। आदित्य ठाकरे ने इसे ‘तुच्छ’ बताया और दिशा सालियान को जानने से भी इनकार किया। सुप्रीम कोर्ट में अपने वकील अंशुमन सिन्हा के माध्यम से जवाब देते हुए ठाकरे ने मानहानि के सभी आरोपों का स्पष्ट खंडन किया। उन्होंने माफी मांगने या अपने सोशल मीडिया पोस्ट वापस लेने से इनकार कर दिया और अपने इस रुख को दोहराया कि वे ‘दिशा सालियान से कभी नहीं मिले और न ही उन्हें जानते हैं।’ वहीं सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने आदित्य ठाकरे के दिए गए जवाब पर सवाल उठाए हैं।
विवाद सतीश सालियान के वकील एडवोकेट अनुष्का सोनावाने द्वारा 17 सितंबर, 2026 को जारी किए गए नोटिस से शुरू हुआ। सालियान ने आरोप लगाया कि ठाकरे द्वारा 16 सितंबर, 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रकाशित अंग्रेजी और मराठी पोस्ट में मानहानिकारक बातें शामिल थीं और उन्होंने सार्वजनिक माफी के साथ 500 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग की।
आदित्य ठाकरे ने क्या-क्या कहा
आदित्य ठाकरे ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि उनकी पोस्ट में सतीश सालियान का नाम या पहचान कभी नहीं ली गई। जवाब में बताया गया कि सतीश सालियान के मौजूदा दावे उनकी बेटी की मृत्यु के तुरंत बाद दिए गए सार्वजनिक बयानों और कानूनी दस्तावेजों से मेल नहीं खाते। उन्होंने जनीतिक दलों पर अफवाहें फैलाकर परिवार को बदनाम करने का आरोप लगाया।
आदित्य ठाकरे ने कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच का निर्देश तो दिया, लेकिन उनके या किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष दर्ज नहीं किया और यह अनिवार्य किया कि जब तक सबूतों से पर्याप्त आधार न मिलें, किसी भी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाएगा। आरोपों का खंडन करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करने के अपने अधिकार का बचाव करते हुए ठाकरे ने पोस्ट हटाने, माफी मांगने, बयान वापस लेने या मुआवजा देने की मांगों को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने मीडिया ट्रायल या राजनीतिक हस्तक्षेप के बिना एक स्वतंत्र और निष्पक्ष सीबीआई जांच की अपनी मांग को दोहराया।
‘आदित्य ठाकरे के गोलमोल जवाब से नए सवाल’
दिशा सालियान मामले में दायर मानहानि के नोटिस पर आदित्य ठाकरे की ओर से आए जवाब को सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने ‘भ्रामक और तथ्यहीन’ करार दिया। ओझा ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट के याचिका खारिज होने के बाद पहले नोटिस पर चुप्पी और अब दूसरे नोटिस पर गोलमोल जवाब कई नए सवाल खड़े करता है। उन्होंने ड्रग्स कारोबार के आरोपों से लेकर मोबाइल टावर लोकेशन और हलफनामे में दी गई निजी जानकारी तक पर ठाकरे से सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग की है।
दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने कहा कि पहले नोटिस का जवाब वह नहीं दे पाए क्योंकि हाईकोर्ट ने उनकी पूरी याचिका खारिज कर दी थी, इसलिए उनके पास जवाब देने के लिए कुछ था ही नहीं। आश्चर्य की बात है कि पहले नोटिस का जवाब नहीं दे रहे हैं और दूसरे नोटिस का जवाब दे रहे हैं। दूसरे नोटिस का जवाब अभी आया है और पूरे जवाब में वही स्थिति बन गई है, जो हाईकोर्ट ने मालवणी पुलिस के बारे में कहा था कि जवाब कई और सवाल खड़े करता है।
आदित्य ठाकरे का जवाब है कि मैं दिशा सालियान को नहीं जानता था। मेरी पोस्ट सतीश सालियान को बदनाम करने के लिए नहीं थी। जो लोग राजनीतिक रूप से प्रेरित होकर इस मामले को लेकर मुझे बदनाम कर रहे थे, मेरी पोस्ट उनसे संबंधित थी। मुझे अपना बचाव करने का अधिकार है। उन्हें बिल्कुल अधिकार है, लेकिन उनके पास सबूत होना चाहिए। उन्होंने किसी भी बात का जवाब नहीं दिया है। उनका जवाब सिर्फ शब्दों की बाजीगरी है।
नीलेश ओझा
दस ग्राउंड के ब्योरे और पैरा 38 में लिखी पूरी बात
नीलेश ओझा ने कहा कि आपके माध्यम से मैं उनसे फिर एक बार सवाल पूछ रहा हूं कि आप कह रहे हैं कि यह राजनीतिक रूप से प्रेरित केस है। आपने इसी आधार पर एफआईआर न हो और सीबीआई को आदेश न दिया जाए, ऐसी आपत्ति हाईकोर्ट में ली थी। हाईकोर्ट ने आपकी आपत्ति को नहीं माना और हमारी बात में दम पाया, इसलिए एफआईआर का आदेश दिया। दस ग्राउंड के ब्योरे और पैरा 38 में पूरा लिखा है कि मुंबई पुलिस ने जब आपकी सरकार थी तब कैसे फर्जीवाड़ा किया और बाद में अब की पुलिस ने भी उसमें कवर-अप करने में कैसे मदद की।
उस दिन आप कहां थे?’
निलेश ओझा ने आगे कहा कि दूसरी बात, आप आज तक यह क्यों नहीं बता रहे हैं कि उस दिन आपकी मोबाइल टावर लोकेशन कहां थी? हम पहले दिन से ही यह कह रहे हैं। हमने तो यह सवाल पूछा ही है, अब तो आपसे राजनीतिक रूप से संबंधित नहीं होने वाले थर्ड पर्सन जैसे प्रकाश अंबेडकर जी ने भी पूछा है कि आप बता दीजिए कि उस दिन आप कहां थे। आप मंत्री हैं, आपके साथ सरकारी बॉडीगार्ड रहते हैं तो उस समय आपका पूरा मूवमेंट रजिस्टर वगैरह रहता है, तो आप अपनी मोबाइल टावर लोकेशन बता दीजिए।
उन्होंने आगे कहा कि उसका भी कोई जवाब नहीं है। तीसरी बात हमारे एफिडेविट में भी थी और 2025 में आपके वकील को जो नोटिस भेजी थी, उसमें भी लिखा था कि आप ड्रग्स का बिजनेस करते हैं; यह बात नारकोटिक्स ब्यूरो के क्राइम नंबर 15/2020 में सामने आई है। इस पर आज तक कोई जवाब नहीं है। आपके रिप्लाई में भी नहीं है। विषय ड्रग्स का बिजनेस नहीं है।




