एंटी नक्सल ऑपरेशन टीम को नक्सलियों का वर्कशॉप मिला, लॉन्चर-डेटोनेटर और 300 कारतूस, 21 मैग्जीन मिले

गरियाबंद: नक्सलियों की बड़ी साजिश का खुलासा जवानों ने सर्चिंग के दौरान किया. दरअसल, जवान रूटीन सर्चिंग अभियान पर भालू डिग्गी के जंगल में निकले थे. सर्चिंग के दौरान जब जवान घने जंगलों के बीच पहुंचे तो वहां पर माओवादियों का वर्कशॉप नजर आया. सर्तक जवानों ने इलाके की घेराबंदी करते हुए अपने अपने पोजिशन लिए. जिसके बाद जवानों की एक टोली माओवादियों के बनाए गुप्त वर्कशॉप तक पहुंची.
जवानों ने जब नक्सलियों के गुप्त वर्कशॉप में जाकर देखा तो उनके होश उड़ गए. माओवादियों ने अपने गुप्त ठिकाने पर हथियारों का जखीरा जमा कर रखा था. मौके से सिर्फ हथियार ही नहीं बल्कि हथियार बनाने का सामान भी भारी मात्रा में मिला है. इसके साथ ही विस्फोटक बनाने और विस्फोट में काम आने वाले सामान भी भारी मात्रा में बरामद किए गए.
घने जंगल में माओवादियों ने बना रखा था हथियारों का वर्कशॉप
जिस जगह पर माओवादियों ने हथियारों का जखीरा जमा कर रखा था, वो इलाका घने जंगलों और पहाड़ों से घिरा हुआ है. हथियारों का भारी जखीरा देखकर ऐसा लगता है जैसे नक्सली किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे. नक्सली अपने घातक मंसूबे में कामयाब हो पाते उससे पहले, सर्तक जवानों ने उनके हाइड आउट को ध्वस्त कर हथियारों का बड़ा जखीरा जब्त कर लिया.
बरामद किए गए हथियार और विस्फोटक
- 2 इंसास रायफल
- 1 थ्री नॉट थ्री रायफल
- 2 12 बोर की बंदूक
- 1 देशी कट्टा
- 7 जिंदा बम
- विस्फोट में काम आने वाला कोडेक्स वायर
- 240 से ज्यादा डेटोनेटर
- 300 जिंदा कारतूस
- 21 स्वचालित हथियार के मैग्जीन
- नक्सलियों के 6 डंप
- ऑपरेशन विराट के तहत हुई कार्रवाई
- 36 घंटे से ज्यादा वक्त तक चला ऑपरेशन
- धमाके में काम आने वाला बीजीएल सेल
- हथियार बनाने का सामान
- ग्रेनेड लॉन्चर
- कुल 57 छोटे बड़े हथियार
- बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामान
बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे नक्सली
विस्फोटकों का जखीरा देखकर ऐसा लगता है, जैसे नक्सली किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की साजिश में जुटे थे. जवानों ने बड़ी सावधानी के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम दिया. पूरे ऑपरेशन को जवानों ने ऑपरेशन विराट नाम दिया था. करीब 36 घंटे से ज्यादा वक्त तक ये ऑपरेशन भालू डिग्गी के घने जंगल में चला. गरियाबंद जिले की सीमा महाराष्ट्र राज्य के जंगल से लगती है. अक्सर नक्सली दूसरे राज्य में वारदात को अंजाम देने के बाद सुरक्षित जगहों पर जाकर छिप जाते हैं. सीमावर्ती इलाके में नक्सलियों के आने जाने का रास्ता अब सुरक्षित नहीं रहा. इस लिहाज से नक्सली अब सिमटते जा रहे हैं.




