एक राष्ट्रपति अमरीकी बंधक

अमरीका का राष्ट्रपति कोई भी हो, वह किसी भी देश पर हमला करा सकता है, किसी भी संप्रभु एवं स्वतंत्र देश के राष्ट्रपति को अगवा करा अमरीकी जेल में डाल सकता है अथवा फांसी पर लटका सकता है। अमरीकी राष्ट्रपति किसी भी देश के बेशकीमती संसाधनों, तेल एवं खनिज और सत्ता पर कब्जा कर सकता है। कोई भी देश, रूस और चीन भी, अमरीकी राष्ट्रपति को कोसते रहें अथवा चेतावनियां जारी करते रहें, लेकिन अमरीका ही दुनिया का सबसे ‘खूंख्वार डॉन’ है। उसके सामने संयुक्त राष्ट्र आम सभा और सुरक्षा परिषद बिल्कुल नपुंसक और बेमानी हैं। अमरीकी राष्ट्रपति का आदेश ही ‘वैश्विक कानून’ है। अमरीकी राष्ट्रपति को वहां की संसद (कांग्रेस) और अदालत की भी परवाह नहीं है। वह ही ‘वैश्विक साम्राज्यवादी शासक’ है। मौजूदा राष्ट्रपति टं्रप ने वेनेजुएला पर गहरी रात में, करीब 2 बजे, चौतरफा हमले करा और वहां के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को उनके बेडरूम में ही बंधक बना कर साबित कर दिया है कि दुनिया अमरीका के मुताबिक ही चलेगी। अमरीकी सत्ता को कोई चुनौती नहीं दे सकता। राष्ट्रपति टं्रप ने बार-बार दोहराया कि जो मादुरो के साथ हुआ है, वह किसी के भी साथ हो सकता है! लिहाजा डर, खौफ और खतरा भांपते हुए ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने सेनाओं को अलर्ट कर दिया है और सीमाओं पर तैनाती के आदेश दिए हैं। क्या अगली बारी ईरान के सुप्रीम लीडर की है? बहरहाल राष्ट्रपति टं्रप ने कथित तानाशाह मादुरो को हटाने और नार्को आतंकवाद के अपराध में दंडित करने के लिए ही वेनेजुएला के रक्षा मंत्री के आवास, हवाई अड्डे, एयरबेस, वायुसेना मुख्यालय, सैन्य रणनीतिक कार्यालय आदि पर बम-वर्षा के आदेश दिए हों, दरअसल ऐसा नहीं है।
अमरीका की नजरें वेनेजुएला के करीब 305 अरब बैरल तेल के भंडारों और 1.36 ट्रिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के बेशकीमती खनिजों पर थी। दुनिया के 20-22 फीसदी से अधिक तेल के भंडार वेनेजुएला में हैं। मादुरो को बंधक बनाने के बाद राष्ट्रपति टं्रप ने जो प्रेस कॉन्फ्रेंस की, उसमें उन्होंने साफ ऐलान कर दिया कि अब वेनेजुएला पर अमरीका का कब्जा है। जो ऑपरेशन किया गया, वह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा ऑपरेशन था। अब वेनेजुएला के तेल कारोबार को अमरीकी कंपनियां देखेंगी। अमरीका खूब पैसा कमाएगा। मादुरो के शासन में अमरीकी तेल की चोरी की गई। अब मादुरो और उनकी पत्नी पर अमरीका में ही मुकदमा चलाया जाएगा। हम मादुरो को कड़ी सजा दिलवाएंगे। अमरीका ने पनामा के तानाशाह राष्ट्रपति मैनुअल नोरिएगा, ग्रेनेडा के शासक, इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन, लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी आदि को गिरफ्त में लेकर जो बर्ताव किया था, संभवत: वही नियति मादुरो की लगती है। अमरीकी विशेष कमांडोज ने ही अलकायदा के सरगना लादेन और आईएसआईएस के खलीफा सरगना बगदादी को भी खत्म किया था। दरअसल अमरीका के सामने वेनेजुएला ‘मेमना देश’ है, लिहाजा वह क्या चुनौती देता! राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को ‘सेफ हाउस’ से ही अगवा किया गया, तब पूरी सुरक्षा व्यवस्था क्या कर रही थी? वेनेजुएला के लाखों सैनिक और मिलिशिया कहां थे? राष्ट्रपति टं्रप ने यह भी कहा कि हमने वेनेजुएला की सैन्य-क्षमता को बिल्कुल शक्तिहीन कर दिया। बेशक यूरोपीय संघ के अधिकतर देशों, रूस, चीन, ईरान, क्यूबा, ब्रिटेन, मेक्सिको, ब्राजील, कोलंबिया आदि ने अमरीकी हमले की निंदा की है। उसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करार दिया है। इन बयानों से क्या होगा? यदि मामला सुरक्षा परिषद में जाता है, तो अमरीका उस प्रस्ताव के खिलाफ ‘वीटो’ कर देगा। इसी तरह प्रस्ताव रूस और चीन के खिलाफ आए हैं, तो वे ‘वीटो’ करते रहे हैं। राष्ट्रपति टं्रप ने साबित कर दिया है कि वह ही दुनिया के ‘सुप्रीम’ हैं। जो अमरीका का विरोध करेंगे या साजिशों में शामिल होंगे, उनका हश्र मादुरो जैसा ही होगा। लिहाजा यूरोप का यह कथन सटीक लगता है कि टं्रप दुनिया के लिए नया खतरा हैं। वेनेजुएला की नेता प्रतिपक्ष मारिया कोरिना को 2025 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था। संभव है कि उन्हें वेनेजुएला का नेतृत्व सौंप दिया जाए!




