व्यापार

केमिकल इंजीनियर का प्‍लान हुआ चेंज, लैब की जगह यहां किया कमाल, अब 2 लाख महीने की कमाई

नई दिल्‍ली: कल्याणी चवली मूल रूप से हैदराबाद की हैं। पुणे में पली-बढ़ी हैं। वह एक केमिकल इंजीनियर हैं। उन्‍होंने पुणे के पास तलेगांव में ‘सहृदया फूड्स’ (Sahrudaya Foods) नाम के स्‍टार्टअप की नींव रखी है। 2021 में शुरू हुई यह कंपनी ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देती है। उपभोक्ताओं को सेहतमंद स्नैक्स और मिठाइयां पहुंचाती है। कल्याणी ने अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री का इस्तेमाल पारंपरिक व्यंजनों को बेहतर बनाने और उन्हें वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए किया है। कोरोना महामारी के कारण विदेश में पढ़ाई का उनका प्लान रुक गया। इसके बाद उन्होंने भारत में ही कुछ करने का फैसला किया। उन्होंने पाया कि ग्रामीण महिलाएं बेहतरीन पारंपरिक व्यंजन बनाती हैं। उन्हें लगा कि इन व्यंजनों को दुनिया तक पहुंचाना चाहिए। आज सहृदया फूड्स के पुणे में 2,500 ऑनलाइन और 3,000 ऑफलाइन ग्राहक हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु के साथ न्यूजीलैंड, जापान और अमेरिका जैसे देशों में भी इसके कस्‍टमर हैं। कंपनी का मंथली रेवेन्‍यू 2 लाख रुपये से ज्‍यादा पहुंच गया है। आइए, यहां कल्याणी चवली की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।

इंजीनियरिंग से उद्यमिता का सफर

पुणे की रहने वाली 24 वर्षीय केमिकल इंजीनियर कल्याणी चवली के लिए लैब की टेस्ट ट्यूब और रसोई की कड़ाही में कोई खास अंतर नहीं है। मुंबई के प्रतिष्ठित ICT से पढ़ाई करने वाली कल्याणी हायर एजुकेशन के लिए विदेश जाना चाहती थीं। लेकिन, कोरोना महामारी ने उनके रास्ते बदल दिए। इस खाली समय में उन्होंने महाराष्ट्र के पाबल गांव में विज्ञान आश्रम के साथ एक प्रोजेक्ट पर काम किया। वहां उनकी मुलाकात उन ग्रामीण महिलाओं से हुई जो पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजन बनाने में माहिर थीं। यहीं से उनके मन में ‘सहृदया फूड्स’ की नींव पड़ी, जिसका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का मेल कराना था।

विशेषज्ञता का किया सही इस्‍तेमाल

कल्याणी ने अपनी इंजीनियरिंग विशेषज्ञता का इस्‍तेमाल खाद्य पदार्थों के पोषण को बरकरार रखने के लिए किया। उदाहरण के लिए वह मोरिंगा (सहजन) की चिक्की बनाते समय उसे अधिक गर्म नहीं करतीं ताकि विटामिन-C नष्ट न हो। उनके उत्पादों में मैदा, रिफाइंड शुगर या किसी भी प्रकार के प्रिजर्वेटिव्स का इस्‍तेमाल नहीं होता। सहृदया फूड्स के ‘गारेलु’ (तेलंगाना का स्नैक), ‘मोरिंगा चिक्की’ और ‘सप्तधान्य लड्डू’ जैसे उत्पाद आज पुणे के अलावा दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में बेहद लोकप्रिय हैं। यहां तक कि कैलिफोर्निया के एक मंदिर और जापान के ग्राहक भी उनके मुरीद हैं।

कल्याणी का स्टार्टअप केवल मुनाफे के लिए नहीं है। इसका उद्देश्‍य सामाजिक बदलाव लाना भी है। उन्होंने अब तक असम, जयपुर और महाराष्ट्र की 160 से ज्‍यादा महिलाओं को ट्रेनिंग दी है। सहृदया के किचन में काम करने वाली महिलाएं न केवल वेतन पाती हैं, बल्कि कंपनी के 70% कच्चे माल की सप्‍लाई भी इन्ही महिलाओं के खेतों से होती है। इससे उन्हें डबल बेनिफिट होता है। कल्याणी की मां लक्ष्मी भी इस काम में उनका हाथ बंटाती हैं। वह ग्रामीण महिलाओं के साथ मिलकर रसोई का प्रबंधन संभालती हैं। इससे इन महिलाओं को घर जैसा माहौल मिलता है।

शुरुआत में चुनौतियां आईं। लेकिन, कल्याणी ने हार नहीं मानी। उन्होंने कोविड केयर सेंटर्स को इम्यूनिटी-बूस्टिंग स्नैक्स भेजकर अपनी पहचान बनाई। आज उनका रेवेन्यू 2 लाख रुपये प्रति माह से ज्‍यादा है। उन्हें ‘स्टार्टअप इंडिया’ से 10.4 लाख रुपये की ग्रांट भी मिल चुकी है। द बुद्धा इंस्टीट्यूट से मिली फेलोशिप ने उनके हौसलों को और उड़ान दी है। कल्याणी का मानना है कि भारत तेजी से बढ़ रहा है। वह अपनी पारंपरिक विरासत को वैश्विक स्तर पर ले जाकर इस विकास का हिस्सा बने रहना चाहती हैं।

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