राजनीति

क्या होता है वोटर लिस्ट से किसी का नाम कटाने का प्रोसेस?

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने गुरुवार को कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरों की रक्षा करने और कर्नाटक की एक विधानसभा आलंद से हजारों की संख्या में सुनियोजित वोट डिलीट करने के प्रयास वाले लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद और गलत बताया है। आयोग का कहना है कि कोई भी शख्स ऐसे ही ऑनलाइन या ऑफलाइन मतदाता सूची से किसी का नाम डिलीट नहीं करा सकता। इसके लिए एक तय प्रक्रिया है। जिसका पालन करने पर ही वोटर लिस्ट से किसी वोटर का नाम काटा जा सकता है। क्या है यह प्रक्रिया।

वोटर लिस्ट से नाम कटवाने के लिए जरूरी है फॉर्म नंबर-7 भरना

आयोग का कहना है कि वोटर लिस्ट से किसी भी वोटर का नाम डिलीट कराने के लिए फॉर्म नंबर-7 भरना जरूरी होता है। इसे चाहे ऑनलाइन भरे या फिर ऑफलाइन। इसमें कोई वोटर अपना या किसी दूसरे का नाम मतदाता सूची से काटने के लिए आवेदन कर सकता है। लेकिन इसमें आवेदन करने वाले का दावा अगर झूठा पाया जाता है तो उसके खिलाफ आरपी एक्ट-1950 के सेक्शन-31 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जिसमें एक साल तक की कैद या जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं।

बिना फॉर्म भरे ऐसे ही ऑनलाइन सिस्टम से नहीं काटा जा सकता नाम

आयोग का कहना है कि बिना प्रक्रिया पूरी किए बिना कोई भी ऑनलाइन तरीके से वोटर लिस्ट से किसी वोटर का नाम नहीं काट सकता। पूरे देश में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है कि ऑनलाइन तरीके से किसी का नाम काट दिया जाए। नाम काटने के लिए आवेदन करने वाले को अपना नाम, मोबाइल नंबर, वोटर कार्ड नंबर और अन्य जानकारियां देनी होती हैं। साथ ही जिसका नाम वह कटवाना चाहता है उसके बारे में भी बताना पड़ता है।

कैसे कटता है नाम?

फॉर्म-7 भरने के बाद पहले बीएलओ उस वोटर के घर पर जाकर वेरिफाई करता है जिसका नाम काटने के लिए आवेदन किया गया है। अगर उस वोटर ने फर्जी एड्रेस भरा है, उसकी डेथ हो गई है, वह 18 साल का नहीं हुआ है, वह लापता है या परमानेंट शिफ्ट हो गया है, पहले से ही उसका नाम वोटर लिस्ट में है या वह भारतीय नहीं है। ऐसी किसी भी परिस्थिति में मतदाता का नाम काटा जा सकता है। बीएलओ इसका पता करता है। इसके बाद एक नोटिस भी दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद ही वोटर का नाम काटा जाता है।

हां, कुछ प्रयास जरूर हुए नाम कटवाने के

आयोग का कहना है कि आलंद सीट से कुछ मतदाताओं के नाम डिलीट कराने के कुछ प्रयास जरूर हुए थे। इसके लिए वहां के ईआरओ की तरफ से पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। उसकी जांच चल रही है। रही बात सीआईडी को आयोग द्वारा आईपी एड्रेस समेत अन्य तरह की जानकारी देने की तो आयोग का कहना है कि सीआईडी को जो चाहिए था। वह जानकारी कर्नाटक सीईओ की तरफ से उन्हें मुहैया कराई गई।

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