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क्यों दो टुकड़ों में बंट रहा अफ्रीका महाद्वीप? वैज्ञानिकों ने किया चौंकाने वाला खुलासा

Science News: धरती के भीतर एक असामान्य हलमच रही है। इसका असर अफ्रीका महाद्वीप पर हो रहा है। इस होने वाली असाधारण हलचल से अफ्रीका महाद्वीप दो हिस्सों में बट रहा है। इस घटना से दुनियाभर के भूगर्भ वैज्ञानिकों में उत्सुकता बढ़ रही है। एक नए अध्ययन के मुताबिक, फ्रीका महाद्वीप में एक बड़ी दरार पड़ रही है। ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट के साथ यह बंटवारा हो रहा है। जहां पर महाद्वीप का सोमालियन प्लेट का पूर्वी भाग बड़ी नूबियन प्लेट से अलग हो रहा है। अध्ययन के मुताबिक, इस पड़ रही दरार से भविष्य में जमीन के दो बड़े हिस्सों के बीच एक नए महासागर का निर्माण होगा। 

कितने तेज बंट रहा है अफ्रीका महाद्वीप? 

वैज्ञानिकों ने बताया कि दरार की प्रक्रिया फिलहाल धीमी गति हो रही है, लेकिन यह लगातार होती जा रही है। हालांकि, इस अभी टूटने में लाखों साल लगेंगे। अध्ययन के मुताबिक, हर साल इसमें कुछ मिलीमीटर हलचल हो रही है। 

अध्ययन में बताया गया है कि न्यूबियन और सोमालियन प्लेटें उत्तर अरेबियन प्लेट से अलग हो रही है, जिसके Y आकार का रिफ्टिंग सिस्टम बन रहा है। इथियोपिया के अफार क्षेत्र में यह प्लेटें मिलती हैं। इसे ट्रिपल जंक्शन कहा जाता है। धरती पर दुर्लभ जगहों में शामिल है, जहां तीन टेक्टोनिक रिफ्ट मिलते हैं, जिनमें इथियोपियन, रेड सी और गल्फ ऑफ अदन रिफ्ट शामिल हैं।

दरार के बीच जाने लगेगा महासागरों का पानी

वर्जीनिया टेक की जियोफिजिस्ट डी सारा स्टैम्पस ने खुलासा किया है कि दरार के बढ़ने की दर उत्तर में सबसे ज्यादा है। इसकी वजह से सबसे पहले वहीं महासागर बनेगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक,  इथियोपिया के अफार क्षेत्र में धरती की ऊपरी परत पहले से ही पतली है। यहां जमीन का कुछ इलाका समुद्र तल से नीचे है। 

इसमें दरार की दो भुजाएं लाल सागर और अदन की खाड़ी में पहले ही डूब चुकी हैं। जब उन्हें जोड़ने वाली घाटी ज्यादा नीचे चली जाएगी, तो अलग होने वाली प्लेटों के बीच समुद्र का पानी तेजी से जाने लगेगा। इस प्रक्रिया से एक नए महासागर का बेसिन बनेगा।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर वर्ष प्लेटें एक दूसरे से करीब 0.28 इंच दूर होती जा रही हैं। इस रफ्तार से पूरे महासागर बेसिन को भरने में 10 लाख साल लगेंगे। हालांकि, यह दरार भूकंप और ज्वालामुखी से जिंदगी पर जल्दी असर डाल सकती है। पृथ्वी की ऊपरी परत का निर्माण 15-20 टेक्टोनिक प्लेटों से हुआ है, जो धीरे-धीरे नीचे पिघले मैग्मा मेंटल के ऊपर तैरती हैं। 

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