मध्यप्रदेश

गजब फर्जीवाड़ा, “हमारा तालाब चोरी हो गया”, 108 साल पुरानी सरकारी जमीन ‘गायब’!

Balaghat Land Scam:मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले की खैरलांजी तहसील के सावरी गांव से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. गांव की करीब 61 एकड़ 21 डिसमिल जमीन साल 1917 में झुड़पी जंगल के नाम दर्ज थी. लेकिन इसी में से करीब 11 एकड़ जमीन 1954-55 में पड़ोस के गांव के एक परिवार के तीन लोगों के नाम दर्ज हो गई. अब उन लोगों की मौत के बाद जमीन उनके 9 वंशजों के नाम पर आ चुकी है और हाल ही में फरवरी-मार्च 2025 में इस जमीन का सौदा होने की बात सामने आई है. पूर्व सरपंच मोहनलाल बनोटे और ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन असल में गांव के तालाब की है, जिसे बेचा नहीं जा सकता.

सिर्फ खसरा नंबर, नहीं कोई पक्का दस्तावेज
ग्रामीणों ने तहसीलदार के यहां आपत्ति दर्ज करवाई है. उनका कहना है कि जमीन पर मालिकाना हक जताने वाले लोग दानपत्र या खरीद-बिक्री का कोई प्रमाण नहीं दिखा पाए. सिर्फ खसरा नंबर दिखाया गया है. पूर्व सरपंच का कहना है कि महज खसरा नंबर किसी जमीन का मालिकाना हक साबित नहीं करता.

गिरदावरी रिपोर्ट में गड़बड़ी
एमपी किसान ऐप से खुलासा हुआ कि पटवारी ने परती जमीन पर खेती दर्शा दी. 2021 में भूमि परती दिखाई गई, लेकिन 2022 और 2025 में वहां धान की खेती होना बताया गया. जब मौके पर जांच हुई तो वहां धान के डंठल तक नहीं मिले. तहसीलदार के निरीक्षण में भी खेती के कोई प्रमाण नहीं मिले. हालांकि अधिकारियों ने इसे तकनीकी भूल बताया है.

जांच जारी, ग्रामीणों की मांग तालाब बचाओ
पूर्व सरपंच का कहना है कि इस जमीन में बरसात के बाद महीनों तक पानी भरा रहता है, ऐसे में खेती संभव ही नहीं है. उनका आरोप है कि गलत तरीके से जमीन बेची जा रही है.

ग्रामीण चाहते हैं कि इस बिक्री को शून्य घोषित किया जाए और जमीन को फिर से तालाब में शामिल किया जाए. उनका कहना है कि इस तालाब के पानी से दो गांवों के हजारों किसानों को फायदा मिलता है.

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