स्वास्थ्य

घुटनों से कट-कट की आवाज क्या हड्डियां घिसने का संकेत है या बढ़ती उम्र है वजह? ऑर्थोपेडिक सर्जन से जानें सच

पटना. सीढ़ियां चढ़ते समय घुटनों से कट-कट की आवाज आना, काफी देर तक बैठने के बाद खड़े होने में परेशानी होना या जमीन पर पालथी मारकर बैठने में दिक्कत महसूस करना. अक्सर लोग इन समस्याओं को उम्र बढ़ने का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. कुछ लोग घुटनों से आवाज आने को हड्डियों के घिसने का संकेत समझते हैं, तो कुछ इसे सामान्य मानकर अनदेखा कर देते हैं. लेकिन क्या घुटनों से आने वाली हर कट-कट की आवाज गठिया का संकेत होती है? आखिर घुटनों में ऐसा क्या होता है, जिससे चलने-फिरने के दौरान आवाज आने लगती है? इन्हीं सवालों को लेकर लोकल 18 ने पटना के चर्चित ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. आशीष सिंह से खास बातचीत की.

घुटनों की कट-कट आवाज के पीछे क्या है वजह?
AIOR सुपर स्पेशियलिटी यूनिट के आर्थोपेडिक सर्जन और रोबोटिक एक्सपर्ट डॉ. आशीष सिंह बताते हैं कि घुटने में तीन प्रमुख कंपार्टमेंट होते हैं. इनमें आगे का हिस्सा पेटेलोफेमोरल, अंदर का हिस्सा मीडियल और बाहर का हिस्सा लेटरल कंपार्टमेंट कहलाता है. घुटने के आगे वाले हिस्से में पटेला यानी घुटने की टोपी की गति और उसकी स्थिति से भी आवाज आने की समस्या हो सकती है. कुछ मामलों में पटेला सही तरीके से अपनी जगह पर नहीं चलता, जिसे पटेला मैलट्रैकिंग कहा जाता है. इसके अलावा मांसपेशियों के बीच असंतुलन भी इसकी वजह हो सकता है.

डॉ. आशीष सिंह ने आगे बताया कि घुटनों से कट-कट की आवाज आना ऑस्टियोआर्थराइटिस का शुरुआती लक्षण हो सकता है. हालांकि, केवल आवाज आने से यह तय नहीं किया जा सकता कि घुटने में गठिया है या हड्डियां घिस रही हैं. इसके लिए लक्षणों और घुटने की स्थिति की मेडिकल जांच जरूरी है.

सिर्फ आवाज नहीं, इन संकेतों पर भी दें ध्यान
घुटनों से आवाज आने के साथ अगर रोजमर्रा के कामों में परेशानी होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉ. आशीष सिंह ने बताया कि गठिया की आशंका होने पर इन लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है. जैसे, सीढ़ियां चढ़ने और उतरने में घुटनों में परेशानी होना, लंबे समय तक बैठने के बाद खड़े होने में कठिनाई महसूस करना, भारतीय शैली के शौचालय का इस्तेमाल करने में परेशानी होना, जमीन पर पालथी मारकर बैठने या वहां से उठने में दिक्कत होना, घुटनों के अलावा हाथों या दूसरे जोड़ों में भी दर्द होना.

इन लक्षणों का मतलब हर बार गठिया होना नहीं है. लेकिन लगातार परेशानी होने पर ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है. समय पर जांच से समस्या की वजह समझने और उचित इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है.

वजन बढ़ने से घुटनों पर पड़ता है अतिरिक्त दबाव
डॉ. आशीष सिंह बताते हैं कि उम्र के साथ जोड़ों में बदलाव होना स्वाभाविक है. ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ की कार्टिलेज प्रभावित होती है. हालांकि, शरीर का वजन अधिक होने से घुटनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे परेशानी बढ़ सकती है. ऐसे में वजन को नियंत्रित रखना और नियमित रूप से मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम करना महत्वपूर्ण है. व्यायाम का चुनाव घुटनों की स्थिति और दर्द के अनुसार करना चाहिए. जरूरत पड़ने पर फिजियोथेरेपिस्ट की मदद भी ली जा सकती है.

कैल्शियम और विटामिन डी भी हैं जरूरी
जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार और हड्डियों की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है. शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है. डॉक्टर का कहना है कि घुटनों में परेशानी होने पर समय रहते विशेषज्ञ से मिलना चाहिए. शुरुआती अवस्था में वजन नियंत्रण, सही व्यायाम और जरूरत के अनुसार उपचार से लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.

क्या घुटने घिसने की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है?
डॉ. आशीष सिंह बताते हैं कि ऑस्टियोआर्थराइटिस होने का मतलब यह नहीं है कि मरीज के पास इलाज का विकल्प नहीं बचा है. बीमारी की गंभीरता के आधार पर उपचार के अलग-अलग तरीके अपनाए जा सकते हैं. इनमें व्यायाम, फिजियोथेरेपी, वजन नियंत्रण और जरूरत के अनुसार दवाएं शामिल हैं.

उन्होंने बताया कि कुछ चुनिंदा मरीजों में पीआरपी (PRP), बोन मैरो एस्पिरेट कंसंट्रेट और एसीपी मैक्स जैसी रीजनरेटिव मेडिसिन प्रक्रियाओं पर भी विचार किया जाता है. इन तरीकों से इलाज करवाने के लिए पटना या बिहार से बाहर जाने की जरूरत नहीं है. पटना के AIOR सुपर स्पेशियलिटी यूनिट में ये सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं.

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