संपादकीय

चैंपियन हैं भारत की बेटियां

जय हो, भारत की बेटियों की! वाह, क्या खेल दिखाया है? क्या जुझारू पारी और एकाग्रता की मिसाल कायम की है? क्या अर्जुन की तरह लक्ष्य पर निगाहें टिकी थीं और महिला एकदिनी क्रिकेट के 52 साला इतिहास में नया कीर्तिमान रच दिया? यह छोटे-छोटे मील-पत्थरों की कहानी नहीं है। यह पुरुष या महिला क्रिकेट की सबसे खूबसूरत, शानदार, जानदार जीत है। भारत और हम भारतीयों को अपेक्षाएं ही नहीं थीं। हमने महिला क्रिकेट तो क्या, महिला खिलाडिय़ों को कभी गंभीरता से नहीं लिया। जिन पलों में महिला टीम इंडिया ने 7 बार की विश्व चैम्पियन और लगातार 15 मैचों की अजेय ऑस्टे्रलिया टीम को पराजित कर विश्व कप के फाइनल में प्रवेश किया, लगभग उसी दौरान ‘एशियन यूथ गेम्स’ में भारत की चार बेटियों-खुशी, अहाना, चन्द्रिका, अंशिका-ने मुक्केबाजी में स्वर्णिम सफलता हासिल की। देश की जास्मीन और मीनाक्षी हुड्डा ने अपने-अपने भार-वर्ग में, विश्व चैम्पियनशिप के मुकाबलों में, स्वर्ण पदक जीते। कितने भारतीयों को ये स्वर्णिम उपलब्धियां याद हैं? शायद उन्हें जानकारी भी न हो! बहरहाल महिला क्रिकेट के विश्व कप में भारत की बेटियों ने जो खेल खेला है, वह वाकई अद्भुत, अप्रत्याशित, अभूतपूर्व, अकल्पनीय, अतुलनीय था! ऑस्टे्रलिया की टीम ने ग्रुप स्तर पर टीम इंडिया के 330 रनों का सफल चेज कर जीत हासिल की थी। लिहाजा सेमीफाइनल मुकाबले में किसी अतिरिक्त करिश्मे की उम्मीद नहीं थी, लेकिन जेमिमा रोड्रिग्स के रूप में मानो कोई फरिश्ता उतर आया और उसने अभूतपूर्व करिश्मा कर दिखाया। जेमिमा को इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबले में ‘ड्रॉप’ किया गया था। जेमिमा की फॉर्म भी अच्छी नहीं थी। हालांकि ऑस्टे्रलिया के खिलाफ उसने 70 से अधिक रन ठोंके थे।

विश्व कप के दौरान वह डे्रसिंग रूम या अकेले में ही सुबकती रहती थी, क्योंकि वह देश के लिए अच्छी क्रिकेट खेल नहीं पा रही थी। सेमीफाइनल में ऑस्टे्रलिया ने 338 रन का पहाड़-जैसा लक्ष्य दिया था। जवाब में जब टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज-शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना-अपेक्षाकृत कम स्कोर पर आउट हो गए, तो भारत की पारी डूबती-सी लगी। उन स्थितियों में जेमिमा ने नाबाद 127 रन (134 गेंद, 14 चौके) बनाकर न केवल विश्व कप का अपना पहला शतक लगाया, बल्कि कप्तान हरमनप्रीत कौर (88 गेंद पर 89 रन) के साथ तीसरे विकेट की साझेदारी में 167 रन (156 गेंद) बना कर ‘पहाड़’ की ऊंचाई को एक हद तक कम कर दिया। जेमिमा ने दीप्ति शर्मा के साथ 38 रन (34 गेंद), ऋचा घोष के साथ 46 रन (31 गेंद) और अमनजोत कौर के साथ नाबाद 31 रन (15 गेंद) जोड़े और एक अविश्वसनीय-सी लग रही जीत पर मुहर लगा दी। विश्व कप का यह सबसे बड़ा और सफल चेज रहा। यकीनन जेमिमा ‘प्लेयर ऑफ दि टीम इंडिया’ करार दी जानी चाहिए, जिस पर भरोसा किया गया, तो उन्होंने महान पारी खेली और टीम इंडिया को 5 विकेट की जीत से, 9 गेंद शेष थीं, विश्व कप के फाइनल में पहुंचाया। अब फाइनल मैच की न तो कोई आशंका है, न चुनौती, न अग्नि-परीक्षा और न ही किसी किस्म का खौफ है। दक्षिण अफ्रीकी टीम पहली बार विश्व कप के फाइनल में है। हम उनके खेल और हुनर को किसी भी तरह कमतर आंकने के पक्षधर नहीं हैं, लेकिन महिला टीम इंडिया 2005 और 2017 में भी फाइनल में पहुंच चुकी है। हमें उस स्तर के तनाव और दबाव का अनुभव हो चुका है। टीम इंडिया ने 2017 विश्व कप में भी, सेमीफाइनल मुकाबले में, ऑस्टे्रलिया टीम को पराजित किया था। हम यह कई बार साबित कर चुके हैं कि ऑस्टे्रलिया टीम ‘अजेय’ नहीं है। उसे किसी भी दिन, बेहतर खेल के जरिए, पराजित किया जा सकता है। अब बेशक टीम इंडिया फाइनल में जीते या हार जाए, लेकिन टीम इंडिया की बेटियां क्रिकेट की शेरनियां हैं। वे वाकई विश्व चैम्पियन हैं। हालांकि हमारा पूर्वाभास यह है कि अब बेटियों का जो जोश है, खेल जिस स्तर पर पहुंच चुका है, उस स्थिति में सर्वप्रथम महिला विश्व कप भारत में ही आना चाहिए। क्रिकेट में भारतीय महिलाएं अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। यह प्रदर्शन उम्मीद से कहीं ज्यादा है। इसे भारतीय महिला क्रिकेट का उभार भी कहा जा सकता है। आशा की जानी चाहिए कि फाइनल में भी भारतीय महिला क्रिकेटरों का अच्छा प्रदर्शन जारी रहेगा और भारत विश्व कप का फाइनल जीतकर कप अपने नाम करेगा।

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