टीचर, चपरासी और 112… बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल बना फोर्ट! क्या सच में सुरक्षित बच्चे?

छतरपुर, जिले के सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए शिक्षा विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं. जिला शिक्षा अधिकारी छतरपुर ने सभी स्कूल प्राचार्यों और प्रधानाध्यापकों को पत्र लिखकर आदेश दिए हैं कि किसी भी विद्यालय परिसर में आवारा कुत्तों का प्रवेश किसी भी स्थिति में न होने दिया जाए. विभाग का मानना है कि आवारा कुत्तों के कारण विद्यार्थियों के साथ कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है, इसलिए पहले से सतर्कता बरतना आवश्यक है.
इस आदेश का स्कूलों में क्या सख्ती से पालन हो रहा है? इसको देखने के लिए टीम छतरपुर के लवकुश नगर के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अचानक पहुंचती है. जहां स्कूल के प्राचार्य नहीं मिले. क्योंकि वह बच्चों को खजुराहो विजिट कराने गए थे. इस आदेश को लेकर वहां के शिक्षकों और छात्राओं ने क्या कहा? आइए जानते हैं…
हेड मास्टर राम अवतार अहिरवार बातचीत में बताते हैं कि छात्रों को आवारा कुत्तों से बचाने के लिए फुल इंतजाम कर लिए गए हैं. इसके लिए स्कूल में समिति का गठन भी किया गया है, जिसमें दो नोडल अधिकारी और सहायक नोडल अधिकारी भी बनाए गए हैं. इस समिति में मुझे भी नोडल अधिकारी बनाया गया है. साथ ही प्राचार्य महोदय ने स्कूल के दोनों गेट पर भृत्यों की ड्यूटी लगा रखी है. दोनों गेट का ताला लगाकर रखते हैं. स्कूल के खुलने और बंद होने पर ही ताला खोलते हैं.
वहीं, शिक्षक शिवकुमार प्रजापति बताते हैं कि इस स्कूल में चारों तरफ से बाउंड्री वॉल है. इसलिए आवारा कुत्तों का प्रवेश ही नहीं हो पता है. जब बच्चियां स्कूल आती हैं और गेट से बाहर छुट्टी में जाती है तो यहां हमने भृत्यों(चपरासी) की ड्यूटी लगा रखी है. साथ ही जब स्कूल सुबह 10:30 बजे खुलता है तो 112 नंबर पहुंच जाती है और जब शाम को 4:30 बजे छुट्टी होती है तो भी 112 नंबर गाड़ी आ जाती है. यहां सुरक्षा के इंतजार पहले से ही थे. इसलिए इस आदेश का पालन करना तो हमारे लिए खुशी की बात है.
स्कूल की छात्राओं ने क्या कहा?
वहीं कक्षा 11वीं की छात्रा महक मिश्रा बताती है कि वह लवकुश नगर से दूर मुड़ेरी गांव से आती है. अभी तक तो मेरे साथ ऐसी कोई अप्रिय घटना नहीं घटी है. हालांकि, हमारे स्कूल के भीतर आवारा कुत्ते प्रवेश नहीं कर पाते हैं. साथ ही स्कूल के बाहर भी आवारा कुत्तों को नहीं भटकने दिया जाता है. इसलिए अभी तक हमारे साथ ऐसी कोई भी अनहोनी घटना नहीं हुई है.
शिक्षक पढ़ाने के साथ सुरक्षा भी करते हैं
कक्षा 9वीं (सेक्शन A) की छात्रा रागिनी अहिरवार बताती हैं कि इस स्कूल में दो गेट हैं. एक गेट से साइकिल वाली लड़कियां बाहर निकलती है और दूसरे गेट से बस्ता वाली लड़कियां बाहर निकलती हैं. यहां पर स्टाफ की ड्यूटी भी लगाई जाती है. इसलिए आवारा कुत्तों से अभी तक हमें कोई खतरा नहीं हुआ है और आगे भी नहीं होगा. क्योंकि हमारे स्कूल में शिक्षक पढ़ाने के साथ हमारी देखरेख भी करते हैं.
बन सकती खतरे की स्थिति
बता दें, जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक विद्यालय परिसर में बच्चों का दिनभर आवागमन रहता है और ऐसे में आवारा कुत्तों की मौजूदगी से डर और खतरे की स्थिति बन सकती है. इसी कारण सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने स्तर पर प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करें.
जिला शिक्षा अधिकारी एएस पाण्डेय ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा शिक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है. किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में गंभीर घटना का कारण बन सकती है. इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि सभी स्कूलों में सुरक्षित, अनुशासित और भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित किया जा सके.




