संपादकीय

ट्रंप को झुलसाती आग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उठते-बैठते लगातार दावे करते रहते हैं कि दुनियाभर के अलग-अलग देश में चल रहे युद्ध और संघर्ष को उन्होंने ही रुकवाया है। वे शेखी तो इस तरह बघारते रहते हैं कि मानो विश्व शांति के एकमात्र ठेकेदार वही हैं और नियति ने यह जिम्मेदारी अकेले उन्हें ही सौंपी है। जबकि हकीकत में अब ट्रंप की ही नाक के नीचे अशांति की आग भड़क उठी है। रविवार को अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा जनांदोलन हुआ। वहां के २,६०० शहरों में अमेरिकी जनता ने ट्रंप के खिलाफ भव्य रैलियां कीं। `नो किंग्स प्रोटेस्ट’ नामक ट्रंप विरोधी प्रदर्शन में करीब ७० लाख लोग शामिल हुए। रविवार को पूरे अमेरिका में लोगों ने यह आरोप लगाते हुए कि ट्रंप तानाशाही की ओर बढ़ रहे हैं, प्रदर्शन किया। दरअसल, ट्रंप महाशय केवल अमेरिका के ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के तानाशाह बनना चाहते हैं। इसीलिए उन्होंने दुनिया पर `टैरिफ वॉर’ थोपा। इसके जरिए उन्होंने वैश्विक व्यापार युद्ध छेड़ दिया। एक तरफ वह विभिन्न देशों में युद्ध रोकने की हांकते हैं और दूसरी तरफ खुद दुनिया को व्यापार युद्ध में झोंक रहे हैं। वे दुनिया की
शांति और अर्थव्यवस्था
को खतरे में धकेल रहे हैं। ट्रंप महाशय भले ही अपने पैâसलों को `अमेरिका फर्स्ट’ कहकर उस पर राष्ट्रवादी का मुलम्मा चढ़ा रहे हों, लेकिन असल में उनके कई पैâसलों का झटका अमेरिकी जनता को भी लग रहा है। ट्रंप की इसी जिद की वजह से उनकी खपद की सरकार `शटडाउन’ की आफत झेल रही है। इसी वजह से अमेरिकी जनता नाराज है। रविवार को इसका लावा फट पड़ा। जून और जुलाई में ट्रंप के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। अब इस रविवार को तीसरी बार लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा जाहिर किया। बावजूद इसके ट्रंप की सनक कम होने और उनके पैर जमीन पर आने के अभी भी कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। जहां देश की जनता उनके खिलाफ सड़कों उतर आई है, वहीं ये महाशय फ्लोरिडा में अपना `वीकेंड’ मना रहे हैं। भले ही रविवार के `नो किंग्स प्रोटेस्ट’ विरोध प्रदर्शनों को लेकर उन्होंने `मैं राजा नहीं हूं’ कहा हो, लेकिन वहीं दूसरी ओर एक मजाकिए वीडियो में उन्होंने अपने अंदाज में दिखा दिया कि वे `गिरे तो भी ऊपर’ हैं। उनके ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किए गए एक एआई-जनरेटेड वीडियो में ट्रंप ने खुद को एक मुकुट पहने फाइटर जेट के
एक पायलट के रूप में
दर्शाया है। साथ ही, उनके जेट पर `किंग ट्रंप’ लिखा हुआ है। अमेरिकी जनता में ट्रंप के खिलाफ इतना बड़ा आक्रोश क्यों है, इसका जवाब उनके द्वारा पोस्ट किए गए इस वीडियो में दिखाई गई उनकी जिद और हठधर्मिता में निहित है। अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप ने लोकतांत्रिक मूल्यों, न्याय आदि को ताक पर रख दिया है। वे सत्ता और अधिकारों का खुलेआम दुरुपयोग कर रहे हैं। वे इसके खिलाफ उठ रहे जनाक्रोश को नजरअंदाज कर रहे हैं। अमेरिका से लेकर भारत तक, दुनिया के अलग-अलग देशों में इससे अलग क्या हो रहा है? ट्रंप न केवल अमेरिका का, बल्कि पूरी दुनिया का तानाशाह बनना चाहते हैं। रूस के पुतिन और चीन के शी जिनपिंग का भी यही सपना है। भारत में भी मोदी को उनके अंधभक्तों ने `विश्व गुरु’ के पद पर बिठा रखा है। सवाल इतना ही है कि जिस तरह अमेरिका में जनता ने रविवार को ट्रंप के खिलाफ तीसरी बार `यलगार’ बुलंद किया है, वैसा ही अन्य तानाशाही शासनों में कब होगा? भले ही ट्रंप हर दिन विश्व शांति के कबूतर उड़ा रहे हों, लेकिन अमेरिकी जनता में उनके खिलाफ बेहद अशांति है। इसी अशांति की आग की आंच अब ट्रंप को झुलसा रही है। दुनियाभर में जहां भी तानाशाही की अति होती है, वहां लोकतंत्र की आत्मा जागृत होती है। यह इतिहास है!

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